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जमरानी बांध की मंजूरी का रास्ता साफ
Updated Sat, 27 Oct 2018 02:13 AM IST
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हल्द्वानी। जमरानी बांध परियोजना पर आपत्तियां निस्तारित होती जा रही हैं। अब केंद्रीय विद्युत यांत्रिकी अथारिटी की आपत्ति भी निस्तारित कर ली गई है। अब नवंबर में दिल्ली में केंद्रीय जलायोग की तकनीकी एडवाइजरी कमेटी की बैठक में जमरानी बांध परियोजना की विस्तृत डीपीआर पर चर्चा के बाद इसे मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है।
सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता मोहन चंद्र पांडे की अगुवाई में दिल्ली गई जमरानी बांध परियोजना से जुड़े अधिकारियों की टीम ने केंद्रीय विद्युत यांत्रिक अथारिटी की अधिकारियों के साथ बैठक कर जमरानी बांध के प्रस्तावित 14 मेगावाट बिजली उत्पादन संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा की। मुख्य अभियंता पांडे ने बताया कि केंद्रीय विद्युत यांत्रिकी अथारिटी के दिशा निर्देशों के क्रम में विद्युत परियोजना का 29.48 करोड़ रुपये का नया प्रस्ताव उन्हें सौंपा गया। इस प्रस्ताव पर केंद्रीय विद्युत यांत्रिक अथारिटी ने सहमति जताई है। विद्युत अथारिटी की सहमति के बाद शुक्रवार को दिल्ली में केंद्रीय जलायोग के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। बैठक में जमरानी बांध को लेकर सभी अधिकारियों ने सहमति जताई है। बैठक में केंद्रीय जलायोग के मुख्य अभियंता ने बताया कि नवंबर में दीवाली के बाद जमरानी बांध परियोजना की तकनीकी सलाहकार समिति की बैठक होगी। इसमें बांध परियोजना की 2600 करोड़ रुपये की विस्तृत डीपीआर पर चर्चा होगी। मुख्य अभियंता पांडे ने बताया कि टीएसी की बैठक में बांध परियोजना को स्वीकृति मिलने की पूरी संभावना है। भाबर की लाइफ लाइन जमरानी बांध परियोजना को 1975 में सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बाद 61.25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। गौला बैराज, नहरें, सिंचाई कालोनी आदि कार्यों में करीब 25.63 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। तब से लगातार तमाम आपत्तियों के कारण जमरानी बांध परियोजना को मंजूरी नहीं मिल पाई। अब वन, पर्यावरण, विद्युत समेत अधिकतर आपत्तियों का निस्तारण कर लिया गया है। नई डीपीआर भी सौंपी गई है। केंद्रीय जलायोग की टीम ने स्थलीय निरीक्षण के बाद जमरानी बांध को हर दृष्टि से उपयुक्त पाया है। अधिकारियों ने बताया कि बांध परियोजना को स्वीकृति मिलने की पूरी संभावना है। दिल्ली में हुई बैठक में जमरानी खंड के अधीक्षण अभियंता संजय शुक्ल, सहायक अभियंता संजय सिंह आदि भी मौजूद थे।
केंद्रीय विद्युत अथारिटी ने भी जताई सहमति, बांध परियोजना की डीपीआर पर नवंबर में होगा फैसला
शुक्रवार को दिल्ली में हुई शीर्ष अधिकारियों की बैठक में बनी सहमति
जमरानी बांध के फायदे
- हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था।
- तराई-भाबर और यूपी के बरेली, बहेड़ी, मुरादाबाद आदि जिलों की सिंचाई।
- 14 मेगावाट बिजली उत्पादन।
- पर्यटन विकास, मत्स्य पालन, नौकायन आदि।
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सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता मोहन चंद्र पांडे की अगुवाई में दिल्ली गई जमरानी बांध परियोजना से जुड़े अधिकारियों की टीम ने केंद्रीय विद्युत यांत्रिक अथारिटी की अधिकारियों के साथ बैठक कर जमरानी बांध के प्रस्तावित 14 मेगावाट बिजली उत्पादन संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा की। मुख्य अभियंता पांडे ने बताया कि केंद्रीय विद्युत यांत्रिकी अथारिटी के दिशा निर्देशों के क्रम में विद्युत परियोजना का 29.48 करोड़ रुपये का नया प्रस्ताव उन्हें सौंपा गया। इस प्रस्ताव पर केंद्रीय विद्युत यांत्रिक अथारिटी ने सहमति जताई है। विद्युत अथारिटी की सहमति के बाद शुक्रवार को दिल्ली में केंद्रीय जलायोग के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। बैठक में जमरानी बांध को लेकर सभी अधिकारियों ने सहमति जताई है। बैठक में केंद्रीय जलायोग के मुख्य अभियंता ने बताया कि नवंबर में दीवाली के बाद जमरानी बांध परियोजना की तकनीकी सलाहकार समिति की बैठक होगी। इसमें बांध परियोजना की 2600 करोड़ रुपये की विस्तृत डीपीआर पर चर्चा होगी। मुख्य अभियंता पांडे ने बताया कि टीएसी की बैठक में बांध परियोजना को स्वीकृति मिलने की पूरी संभावना है। भाबर की लाइफ लाइन जमरानी बांध परियोजना को 1975 में सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बाद 61.25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। गौला बैराज, नहरें, सिंचाई कालोनी आदि कार्यों में करीब 25.63 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। तब से लगातार तमाम आपत्तियों के कारण जमरानी बांध परियोजना को मंजूरी नहीं मिल पाई। अब वन, पर्यावरण, विद्युत समेत अधिकतर आपत्तियों का निस्तारण कर लिया गया है। नई डीपीआर भी सौंपी गई है। केंद्रीय जलायोग की टीम ने स्थलीय निरीक्षण के बाद जमरानी बांध को हर दृष्टि से उपयुक्त पाया है। अधिकारियों ने बताया कि बांध परियोजना को स्वीकृति मिलने की पूरी संभावना है। दिल्ली में हुई बैठक में जमरानी खंड के अधीक्षण अभियंता संजय शुक्ल, सहायक अभियंता संजय सिंह आदि भी मौजूद थे।
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केंद्रीय विद्युत अथारिटी ने भी जताई सहमति, बांध परियोजना की डीपीआर पर नवंबर में होगा फैसला
शुक्रवार को दिल्ली में हुई शीर्ष अधिकारियों की बैठक में बनी सहमति
जमरानी बांध के फायदे
- हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था।
- तराई-भाबर और यूपी के बरेली, बहेड़ी, मुरादाबाद आदि जिलों की सिंचाई।
- 14 मेगावाट बिजली उत्पादन।
- पर्यटन विकास, मत्स्य पालन, नौकायन आदि।