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सरकारी स्कूलों में बिना किताबों के कक्षाओं में पढ़ाई
Updated Tue, 03 Apr 2018 02:12 AM IST
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हल्द्वानी। शिक्षा विभाग की ओर से संचालित विद्यालयों में दो अप्रैल से नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया लेकिन प्राइमरी और जूनियर हाइस्कूलों में कक्षाएं बिना पुस्तकों के शुरू हुईं। हाल यह रहा कि कक्षाओं में अध्यापिकाएं बच्चों को जन-गण-मन सिखाकर अपना समय बिताती रहीं। कुछ स्कूलों में पुरानी किताबों से अध्यापन कराया गया।
जिले के सरकारी प्राइमरी और जूनियर हाइस्कूलों में करीब 71 हजार बच्चे अध्ययनरत हैं। सोमवार को नया सत्र शुरू होने पर बच्चे स्कूल तो पहुंचे मगर बिना किताब के। प्रदेश सरकार ने एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के बदले इस सत्र से एनसीईआरटी पुस्तकें लागू की हैं। इसके लिए बच्चों को किताबें बाजार से खरीदने के लिए विभाग की ओर से बच्चों के खाते में किताबों का मूल्य के बराबर धनराशि ट्रांसफर की जाएगी। हाल यह है कि शिक्षा निदेशालय में अभी एनसीइआरटी की 60 लाख पुस्तकों की छपाई की प्रक्रिया ही चल रही है। कब किताबें छपेंगी और कब बाजार में पहुंचेगी, कुछ नहीं पता।
सरकारी स्कूलों में आठवीं तक के बच्चों के लिए नहीं आई एनसीईआरटी पुस्तकें
प्राइमरी स्कूल देवलचौड़ में बच्चों को जन-गण-मन सिखातीं रहीं अध्यापिकाएं
प्राइमरी और जूनियर हाइस्कूलों के प्रधानाध्यापकों को निर्देशित किया गया है कि जब तक नई पुस्तकें नहीं आती हैं तब तक बच्चों को पुरानी किताबों से पढ़ाया जाए।
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- हरेंद्र मिश्रा, खंड शिक्षा अधिकारी
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जिले के सरकारी प्राइमरी और जूनियर हाइस्कूलों में करीब 71 हजार बच्चे अध्ययनरत हैं। सोमवार को नया सत्र शुरू होने पर बच्चे स्कूल तो पहुंचे मगर बिना किताब के। प्रदेश सरकार ने एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के बदले इस सत्र से एनसीईआरटी पुस्तकें लागू की हैं। इसके लिए बच्चों को किताबें बाजार से खरीदने के लिए विभाग की ओर से बच्चों के खाते में किताबों का मूल्य के बराबर धनराशि ट्रांसफर की जाएगी। हाल यह है कि शिक्षा निदेशालय में अभी एनसीइआरटी की 60 लाख पुस्तकों की छपाई की प्रक्रिया ही चल रही है। कब किताबें छपेंगी और कब बाजार में पहुंचेगी, कुछ नहीं पता।
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सरकारी स्कूलों में आठवीं तक के बच्चों के लिए नहीं आई एनसीईआरटी पुस्तकें
प्राइमरी स्कूल देवलचौड़ में बच्चों को जन-गण-मन सिखातीं रहीं अध्यापिकाएं
प्राइमरी और जूनियर हाइस्कूलों के प्रधानाध्यापकों को निर्देशित किया गया है कि जब तक नई पुस्तकें नहीं आती हैं तब तक बच्चों को पुरानी किताबों से पढ़ाया जाए।
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- हरेंद्र मिश्रा, खंड शिक्षा अधिकारी