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भंडारण की कमी से गहराएगा पेयजल संकट
Updated Tue, 06 Feb 2018 02:33 AM IST
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हल्द्वानी। अभी गर्मी दूर है लेकिन शहर में पानी का संकट शुरू हो गया है। पेयजल किल्लत की प्रमुख वजह जलसंस्थान के पास पर्याप्त भंडारण क्षमता का नहीं होना है। जलसंस्थान के पास शहर और ग्रामीण इलाकों में 70 हजार कनेक्शन हैं। शहर की पेयजल वितरण व्यवस्था गौला और नलकूपों पर निर्भर है। गर्मियों में शहर में पेयजल की जबरदस्त किल्लत हो जाती है।
शहर में 60 साल पुरानी पेयजल योजना से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। मौजूदा आबादी के लिए पेयजल योजना की लाइनें छोटी पड़ गई हैं। जलसंस्थान के शहरी क्षेत्र में 45 और शहरी क्षेत्र मेें 25 हजार कनेक्शन हैं। शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पेयजल वितरण भी समान समय में होता है। जोन वाइज वितरण नहीं होने से कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति बाधित रहती है। इतनी बड़ी आबादी को पेयजल आपूर्ति करने के लिए छोटी पुरानी और छोटी पड़ चुकी लाइनों के अलावा भंडारण क्षमता का नहीं होना भी बड़ी बाधा है। जलसंस्थान को गौला से 35 एमएलडी और नलकूपों से 20 एमएलडी पानी की आपूर्ति होती है लेकिन इसके लिए पर्याप्त भंडारण क्षमता का अभाव है। जलसंस्थान के पास मात्र 20 एमएलडी पेयजल भंडारण क्षमता है। भंडारण क्षमता की कमी के कारण भी लोगों को पर्याप्त पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। जलसंस्थान पहले से ही भंडारण की कमी से जूझ रहा है। निगम सीमा विस्तार के बाद अब बढ़ी आबादी के लिए नए मानकों के तहत पेयजल आपूर्ति करने के लिए अधिक भंडारण की जरूरत है।
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शहर में 60 साल पुरानी पेयजल योजना से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। मौजूदा आबादी के लिए पेयजल योजना की लाइनें छोटी पड़ गई हैं। जलसंस्थान के शहरी क्षेत्र में 45 और शहरी क्षेत्र मेें 25 हजार कनेक्शन हैं। शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पेयजल वितरण भी समान समय में होता है। जोन वाइज वितरण नहीं होने से कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति बाधित रहती है। इतनी बड़ी आबादी को पेयजल आपूर्ति करने के लिए छोटी पुरानी और छोटी पड़ चुकी लाइनों के अलावा भंडारण क्षमता का नहीं होना भी बड़ी बाधा है। जलसंस्थान को गौला से 35 एमएलडी और नलकूपों से 20 एमएलडी पानी की आपूर्ति होती है लेकिन इसके लिए पर्याप्त भंडारण क्षमता का अभाव है। जलसंस्थान के पास मात्र 20 एमएलडी पेयजल भंडारण क्षमता है। भंडारण क्षमता की कमी के कारण भी लोगों को पर्याप्त पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। जलसंस्थान पहले से ही भंडारण की कमी से जूझ रहा है। निगम सीमा विस्तार के बाद अब बढ़ी आबादी के लिए नए मानकों के तहत पेयजल आपूर्ति करने के लिए अधिक भंडारण की जरूरत है।
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