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दशा-दिशा बदलने के लिए तैयार अस्पताल

Tue, 05 Dec 2017 02:07 AM IST
Updated Tue, 05 Dec 2017 02:07 AM IST
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दशा-दिशा बदलने के लिए तैयार अस्पताल
बीके सिविल अस्पताल - फोटो : SELF
हल्द्वानी। जैव चिकित्सीय कचरे के निस्तारण के मसले पर अस्पताल संचालक, अधिकारी सहित अन्य संबंधित पक्ष सोमवार को एक मंच पर आए। अस्पताल संचालकों ने स्वीकार किया कि जैव चिकित्सीय कचरे के निस्तारण में कचरे की छंटाई एक समस्या है और इस समस्या के समाधान के लिए अस्पतालों को और अधिक प्रयास करना होगा। तय किया गया कि प्रशासन भी इस समस्या के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाएगा। तय किया गया कि नगर निगम के चतुर्थ श्रेणी और अस्पताल के कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन सबको एक मंच पर लाने में भूमिका सामाजिक सरोकार की पत्रकारिता के तहत अमर उजाला ने निभाई। एडीएम/नगर आयुक्त ने कहा कि अमर उजाला दिशा दिखाए और हम दशा बदलने को तैयार हैं।
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पिछले एक माह से अस्पतालों से निकलने वाले जैव चिकित्सीय कचरा लगातार हल्द्वानी के विभिन्न क्षेत्रों में मिल रहा था। नगर आयुक्त और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के तत्वावधान में अस्पतालों के मालिकों की बैठक भी हुई। दो दिन पूर्व हुई बैठक में ये सहमति बनी थी कि अस्पतालों से निकलने वाला सामान्य कूड़ा नगर निगम की गाड़ियां उठाएंगी। विमर्श के दौरान ये भी बात सामने आई कि पर्यावरण एवं प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अधिकारी को इस बात का पता नहीं था कि अस्पतालों से एक दिन में कितना जैव चिकित्सीय कचरा निकल रहा है और अस्पतालों ने निस्तारण के लिए क्या व्यवस्था की हुई है।
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विमर्श में अस्पताल संचालक और चिकित्सकों ने फिर एक बार फिर कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि झोलाछाप, पशु चिकित्सालय (निजी/सरकारी), होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक डाक्टरों की क्लीनिक से निकलने वाला जैव चिकित्सीय कचरा कहां जा रहा है। ये भी बात उठी कि हल्द्वानी में 50 से अधिक डेंटल क्लीनिक हैं लेकिन इनसे निकलने वाले जैव चिकित्सीय कचरे की भी कोई जानकारी नहीं है । डॉक्टरों ने कहा कि प्रशासन इस बात की जांच करे कि उक्त डाक्टर ग्लोबल में पंजीकृत हैं या नहीं।
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आईएमए हल्द्वानी शाखा के अध्यक्ष ने भी साफगोई से स्वीकारा कि अस्पतालों की व्यवस्था में कहीं कोई कमी हो सकती है। अगर ऐसा है तो उसे दूर करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही कहा कि इस बात की जानकारी अधिकारियों को भी होनी जरूरी है कि अस्पतालों के अलावा अन्य स्थानों से कितना जैव चिकित्सीय कचरा उत्पन्न हो रहा है और उसकी छंटाई कैसे हो रही है।
एडीएम प्रशासन/नगर आयुक्त हरबीर सिंह ने कहा कि नगर निगम अपने चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को प्रशिक्षण आठ दिसंबर को नगर निगम सभागार में दिलाएगा। प्रशिक्षण दिलाने का जिम्मा पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डीके जोशी का होगा। प्रशिक्षण में चतुर्थ श्रेणी कर्मी को जैव किचत्सीय कचरा क्या है और इसको कैसे निस्तारित किया जाता है इसकी जानकारी दी जाएगी। सिंह ने कहा कि दिसंबर के तीसरे सप्ताह में निजी अस्पताल अपने कर्मियों ( जो जैव चिकित्सीय कचरे को एकत्र करने और छंटाई से संबंधित है) को भी प्रशिक्षण दिलाएंगे। प्रशिक्षण मेडिकल कालेज में दिलाया जाएगा और प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की होगी। इस दौरान आलोक उप्रेती, डॉ. पवलीन कौर खुराना, दीपक पनेरू आदि थे।

कोई भी अस्पताल प्रबंधन जैव चिकित्सीय कचरा खुले में नहीं फेंक रहा है। अस्पतालों में निचले तबके के कर्मी अपने कुछ निजी स्वार्थ के चलते ऐसा कर रहे हैं। ग्लूकोज की बोतलें, सीरिंज आदि का कारोबार होता है। जैव चिकित्सीय कचरे को लेकर सभी लोग सजग हैं। रही बात निचले स्तर के कर्मियों की तो उन्हें प्रशिक्षित करने का काम किया जा रहा है और इसमें करीब 15 दिन का समय तो लगेगा ही। - डॉ. जेएस खुराना

कूड़ा निस्तारण में लगे अस्पताल कर्मियों को भी प्रशिक्षित किए जाने की जरूरत है। साथ ही झोलाछाप समेत अन्य जगहों से निकलने वाले जैव चिकित्सीय कचरे पर भी प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। आईएमए गंभीरता के साथ इस मामले को देख रहा है और कहीं कोई कमी होगी तो उसे भी दूर किया जाएगा। - डॉ. अनिल अग्रवाल, अध्यक्ष, आईएमए, हल्द्वानी शाखा

जागरूकता हर स्तर पर जरूरी है। अस्पताल कर्मियों को प्रशिक्षण मिलने से उनकी भी जानकारी बढ़ेगी। नगर निगम की ओर से सामान्य कूड़ा उठवाने के बाद समस्या काफी कम हुई है। - डॉ. मोहन तिवारी

अस्पतालों के अलावा अन्य स्थानों से भी जैव चिकित्सीय कचरा निकलता है। स्लाटर हाउस से जो खून बहता है वो नालियों में सीधे जाता है। इस तरह से फैलाई जा रही गंदगी पर भी रोक लगाई जानी चाहिए। - डॉ. भूपेंद्र बिष्ट

जैव चिकित्सीय कचरे के निस्तारण के लिए सभी अस्पताल ग्लोबल को उचित धनराशि दे रहे हैं। अस्पताल के निचले स्तर के कर्मियों की मिलीभगत से गड़बड़ी हो रही होगी। अस्पताल अब इसकी निगरानी कर रहे हैं। - डॉ. मोहन सती

जैव चिकित्सीय कचरे रखने के लिए बने स्थान के आसपास कैमरा लगाया गया है। ग्लोबल वेस्ट को तौल करने के बाद लेता है। उसकी एक प्रति अस्पताल के पास होती है और एक ग्लोबल के पास। अस्पताल प्रबंधन अब और सजग हो गया है। - डॉ. प्रदीप पांडे

जैव चिकित्सीय कचरे को लेकर लोगों को जागरूक किए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए निगम एवं अस्पताल कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। - डॉ. शीबा मलिक

अस्पताल में रखने जाने वाले स्टाफ को जैव चिकित्सीय कचरे को लेकर प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। नई नियुक्ति होने पर पहले उसे प्रशिक्षण दिया जाए। प्रशिक्षण लेने वाले अस्पताल कर्मी अपने साथियों को भी प्रशिक्षण दें। - डॉ. हीरा सिंह भंडारी

जैव चिकित्सीय कचरे को लेकर असमंजस की स्थिति है। कर्मियों को जैव चिकित्सीय कचरे के बारे में प्रशिक्षण दिया जाना आवश्यक है। साथ ही उन्हें किस पन्नी में कौन सा कूड़ा रखना है इसके बारे में भी विस्तार से बताने की आवश्यकता है। - डॉ. शिवम मणि

एसटीएच में कूड़े की छंटनी हो पाना संभव नहीं है। पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण निजी अस्पतालों का जैव चिकित्सीय कचरे लेना भी असंभव है। हल्द्वानी में 50 डेंटल क्लीनिक हैं और उनका जैव चिकित्सीय कचरा कहां जा रहा है। प्रशासन की सख्ती के बावजूद बाजार में पालीथिन धड़ल्ले से प्रयोग हो रही है। - डॉ. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कालेज

जैव चिकित्सीय कचरे को इधर-उधर न फेंका जाए। इसके लिए सख्ती भी की जाएगी। कार्यशाला के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा सकता है। कुछ प्रेशर ग्रुप के कारण कई बार प्रशासन की कार्रवाई में बाधक बनते हैं। - अब्ज प्रसाद बाजपेयी, एसडीएम, हल्द्वानी


अस्पताल वेबसाइट में देंगे विवरण
सभी अस्पतालों को 2018 तक अपनी वेबसाइट बनानी होगी। पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डीके जोशी ने कहा कि अस्पतालों को वेबसाइट पर कितना जैव चिकित्सीय कचरा उत्पन्न हो रहा है और निस्तारण के लिए क्या किया जा रहा है उसके बारे में पूरी जानकारी देनी होगी। ग्लोबल को अपनी गाड़ियों में जीपीएस लगाना होगा। साथ ही जैव चिकित्सीय कचरे की थैलियों में बारकोड भी लगेगा। बारकोड सीधे प्लांट में खुलेगा और पूरी जानकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास आ जाएगी।
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