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नोटिस का जवाब न देने पर शैलेंद्र कुमार सिंघल पर लगाया ग्यारह हजार का जुर्माना
Updated Thu, 05 Oct 2017 02:32 AM IST
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चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
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नैनीताल। पूर्व वन मंत्री नवप्रभात के दक्षिण अफ्रीका दौरे के मामले में उच्च न्यायालय ने नोटिस का जवाब न देने पर जसपुर के पूर्व कांग्रेस विधायक शैलेंद्र मोहन सिंघल पर 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इससे पूर्व अदालत प्रदेश सरकार पर भी जवाब दाखिल न करने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगा चुकी है। सिंघल कांग्रेस कार्यकाल में नवप्रभात के साथ इस दौरे पर गए थे।
जय प्रकाश डबराल ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 2006 में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन वन मंत्री नवप्रभात, पूर्व विधायक शैलेंद्र मोहन सिंघल, तीन वन अधिकारी और कई अन्य लोग इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए दक्षिण अफ्रीका गए थे। याची का कहना था कि विदेश दौरे के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया था। इस मामले में उच्च न्यायालय की निगरानी में सीधी जांच होनी चाहिए। पूर्व में न्यायालय ने शैलेंद्र मोहन सिंघल को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए थे। सिंघल की ओर से नोटिस का जवाब नहीं दिया गया।
बुधवार को वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की खंडपीठ ने नोटिस का जवाब न देने पर सिंघल पर 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अगली सुनवाई के लिए 10 नवंबर को होगी।
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जय प्रकाश डबराल ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 2006 में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन वन मंत्री नवप्रभात, पूर्व विधायक शैलेंद्र मोहन सिंघल, तीन वन अधिकारी और कई अन्य लोग इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए दक्षिण अफ्रीका गए थे। याची का कहना था कि विदेश दौरे के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया था। इस मामले में उच्च न्यायालय की निगरानी में सीधी जांच होनी चाहिए। पूर्व में न्यायालय ने शैलेंद्र मोहन सिंघल को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए थे। सिंघल की ओर से नोटिस का जवाब नहीं दिया गया।
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बुधवार को वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की खंडपीठ ने नोटिस का जवाब न देने पर सिंघल पर 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अगली सुनवाई के लिए 10 नवंबर को होगी।
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