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कुमाऊं रेजीमेंट सेना की सर्वोच्च बटालियन

Sat, 27 Oct 2018 08:56 PM IST
Updated Sat, 27 Oct 2018 08:56 PM IST
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कुमाऊं रेजीमेंट सेना की सर्वोच्च बटालियन
सूचनार्थ..
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फोटो::


कुमाऊं रेजीमेंट सेना की सर्वोच्च बटालियन

- हल्द्वानी में पहली बार धूमधाम से मनाया गया कुमाऊं दिवस
अमर उजाला ब्यूरो
हल्द्वानी। पूर्व सैनिकों और सैन्य अधिकारियों ने धूमधाम से शनिवार को कुमाऊं दिवस मनाया। सैन्य अधिकारियों ने कुमाऊं रेजीमेंट के गौरवशाली इतिहास और इसके बदलाव के बारे में बताया। सैनिक से लेकर अधिकारी तक कुमाऊं रेजीमेंट के गीत बेडू़ पाको बारो मासा पर झूमे। हुड़के की थाप पर कार्यक्रम में शामिल सभी पूर्व सैनिकों ने चाचरी की प्रस्तुति दी।
शनिवार को इंद्रकला गार्डन में कुमाऊं दिवस का शुभारंभ मेजर जनरल और वीर चक्र विजेता सुरेंद्र साह, मेजर जनरल इंद्रजीत सिंह बोरा, कर्नल डीएस कार्की ने किया। वीर चक्र विजेता मेजर जनरल सुरेंद्र साह ने कहा कि मैं कुमाऊं रेजीमेंट के अलावा दूसरे रेजीमेंट में भी रहा। उन्होंने कहा कि जिस तरह कुमाऊं के सभी सैनिकों ने अपने कार्यकाल में अपने रेजीमेंट का सिर ऊंचा रखा, उसी तरह सेवानिवृत्त होने के बाद भी अपना कर्तव्य याद रखें।
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मेजर जनरल इंद्रजीत सिंह बोरा ने कहा कि कुमाऊं रेजीमेंट सेना की सर्वोच्च की बटालियन है। कहा कि इस रेजीमेंट के नाम और निशान के लिए सैकड़ों सैनिकों ने अपनी शहादत दी है।
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उन्होंने सभी पूर्व सैनिकों से एकता बनाए रखने का आह्वान किया। कहा कि अगर एक रहे तो सभी उनकी बात सुनेंगे। वयोवृद्ध पूर्व कर्नल डीएस कार्की ने कहा कि कुमाऊं रेजीमेंट 250 साल पुरानी रेजीमेेंट है। इतने समय में नाम और इतिहास में कई बदलाव आए हैं। कहा कि अगर किसी सैनिक, उसके आश्रित या परिवार को समस्या होती है तो हम सहायता को तैयार हैं। समस्या समाधान के लिए कोशिश करेंगे कि सेना के अधिकारी यहीं आकर समाधान करें।
मेजर बीएस रौतेला ने कुमाऊं रेजीमेंट ने कहा कि सलावत खां की इलीचपुर बिग्रेड, निजाम की सेना, सर हेनरी रसल की रसल्स बिग्रेड, हैदराबाद रेजीमेंट कुमाऊं के वीरों के सेना में आने और रेजीमेंट को प्रथम परमवीर चक्र मिलने का इतिहास बताया।


इंसेट
बेडू पाको बारो मासा पर झूमे
कुमाऊं दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। प्रभाकर ने कुमाऊं रेजीमेंट का गीत बेडू पाका बारो मासा प्रस्तुत किया। सूबेदार मेजर बंशीधर जोशी और सूबेदार मेजर रघुनाथ पांडे ने हाय तेरी रुमाला, गुलाबी मुखड़ी की शानदार प्रस्तुति दी। इन गीतों पर पूर्व सैनिकों ने हुड़के की थाप दी औ नृत्य किया।

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चाचरी के साथ कार्यक्रम का समापन
कुमाऊं रेजीमेंट का कुमाऊं दिवस कार्यक्रम काली माता की जय और चाचरी समूह नृत्य के साथ समाप्त हुआ। सभी पूर्व सैनिकों व सैन्य अधिकारियों ने एक साथ सामूहिक नृत्य किया। इसके बाद कार्यक्रम का समापन हुआ।
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बुजुर्ग सैनिक भी पहुंचे कार्यक्रम में
पूर्व सैनिकों में कुमाऊं दिवस के कार्यक्रम में उपस्थिति दर्ज कराई। करीब 80 वर्षीय बुजुर्ग पूर्व सैनिक भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। कई तो स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद कार्यक्रम में पहुंचे। इसके अलावा भी 80 और 90 वर्ष की उम्र के कई बुजुर्ग पूर्व सैनिक कार्यक्रम की शोभा बढ़ा रहे थे।

ट्राई जंक्शन पर कब्जा कर लिया: कैप्टन वीरेंद्र सिंह बोरा
करीब 90 वर्ष के सूबेदार मेजर वीरेंद्र सिंह बोरा ने 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में कुमाऊं रेजीमेंट की ओर से हिस्सा लिया था। 1962 के युद्ध को याद करते हुए वयोवृद्ध सेनानी बताते हैं कि चीन से युद्ध चल रहा था। इसी दौरान रेजीमेंट के 41 सैनिकों ने अरुणाचल-म्यांमार सीमा पर स्थित ट्राई जंक्शन पर हमला कर कब्जा कर लिया था। हाईलोंग वोलोंग पर भी लड़ाई हुई। रेजीमेंट के जवान बहादुरी से लड़े। लेकिन उनके करीब सभी साथी मारे गए। सेना के करीब 80 प्रतिशत जवान या तो मार दिए गए या तो चीन ने उनको कैद कर लिया। बताया कि उन्होंने 1965 के युद्ध में इच्छोगिल कैनाल पर कब्जा कर लिया था।


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जाड़े और पाकिस्तान से दो मोर्चे पर लड़ रही थी सेना: कैप्टन खिलानंद
कैप्टन खिलानंद बताते हैं कि वह 1971 में बांग्लादेश मुक्ति युद्ध में हिस्सा लिया। बांग्लादेश का शमशेर नगर शहर तब पाकिस्तान का हिस्सा था। कुमाऊं रेजीमेंट के सैनिक यहां नवंबर में लड़ाई कर रहे थे। सर्द मौसम होने के कारण उनको परेशानी हो रही थी। सर्दी और पाकिस्तानी सैनिकों से दो मोर्चों पर सेना लड़ रही थी। एक दिसंबर को जाड़ों की रात में करीब दो बजे पाकिस्तानी सेना ने गोलीबारी शुरू कर दी। दो दिसंबर को दिन में दस बजे फायरिंग बंद हो गई। करीब एक घंटे बाद ही पाकिस्तानी एयरफोर्स ने हमला कर दिया। हालांकि कुछ देर बाद भारतीय एयरफोर्स भी आ गई। तीन दिसंबर को भारत ने शमशेर नगर पर कब्जा कर लिया। इस दौरान उनको कई गोलियां लगी, वह घायल हो गए थे।
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