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‘हुनर दिव्यांग नहीं होता’

Wed, 17 Jan 2018 02:13 AM IST
Updated Wed, 17 Jan 2018 02:13 AM IST
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‘हुनर दिव्यांग नहीं होता’
हल्द्वानी। हुनर दिव्यांग नहीं होता, जरूरत इस बात की है कि इंसान हार न मान कर जमाने के साथ कदमताल करने का जज्बा रखे। यह बात बोलने और सुनने की क्षमता न रखने वाले 28 वर्षीय दिव्यांग विक्रम हालदार ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान लिख कर साझा की। विक्रम ने सरस मेले में सीपियों, स्कैच पेंटिंग, फैब्रिक रंगों से बनी चित्रकला का स्टॉल लगाया है। बोलती चित्रकारी लोगों को खासा आकर्षित कर रही है।
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मेले में मूल रूप से सितारगंज के गोविंद नगर, पड़ाव गांव शक्तिफार्म निवासी विक्रम ने सत्यम शिवम स्वयं सहायता समूह नाम से स्टॉल लगाया है। माता-पिता के सहयोग से अपनी कला को प्रदर्शित कर रहे विक्रम को बचपन से ही चित्रकला का शौक रहा। विनय के शौक को माता अनीमा और पिता विनय हालदार ने पहचाना तो वह उनका (विनय का) हुनर बन गया। कक्षा नौ तक राजस्थान के गंगानगर में दिव्यांग छात्रों के स्कूल में पढ़े विक्रम के पिता और मां ने बताया कि वह बचपन से ही कलाकृति बनाता था, धीरे-धीरे वह बेहद खूबसूरत चित्र बनाने लगा। विनय रुद्रपुर सिड़कुल की एक फैक्ट्री में कार्यरत हैं जबकि अनीमा गृहणी हैं। विक्रम की बहन मुंबई में रहती है।
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‘जीविका’ से ही चल रही आजीविका
बिहार के रौशनी जीविका महिला कंबल उत्पादक समूह से कई परिवारों की आजीविका चल रही है। मेले में बिहार के मुज्जफरपुर से आए दंपति के स्टाल नंबर पांच पर हाथ और मशीन से बनाए कंबलों की खासी बिक्री हो रही है। महिला रामदुलारी भेड़ की ऊन से निर्मित कंबल और आसन लेकर पहुंची हैं। उनके मुताबिक समूह से 40 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। सभी कि जीविका इसी काम पर टिकी हैं। उनके स्टॉल पर 200 से 700 रुपये की रेंज में आसन मौजूद हैं।
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जूती पटियाले दी ..
लुधियाना से पहुंचे अशोक कुमार के स्टॉल पर पटियाला की जूती खरीदने के लिए युवतियों की भारी तादाद देखने को मिली। नागरा, पंजाबी जूती, कोल्हापुरी चप्पलों से सजे स्टॉल पर 250 रुपये से लेकर 350 रुपये तक की रेंज में जूतियां उपलब्ध हैं।


कर्नाटक के तेल से करिए बच्चे की मालिश
जय लक्ष्मी समूह चलाने वाली कर्नाटक के शिमोगा से पहुंची वनिता कुमारी के स्टॉल पर बच्चों की मालिश करने के लिए औषधीय तेल उपलब्ध हैं। वनिता के मुताबिक औषधीय तेल 200 रुपए से 600 रुपए तक कि शीशी ग्राम और लीटर के हिसाब से बिक रही हैं।


पंजाबी पकवानों की महक के कई कायल
पंजाब के हरिराम ने मेले में पंजाबी पकवानों की खुशबू बिखेरी है। उनके स्टॉल पर सरसों का साग और मक्के की रोटी, राजमा-चावल, तंदूरी पराठा आदि परोसा जा रहा है। वह पंजाब का स्वाद लोगों तक महज 40 से 50 रुपये प्लेट पहुंचा रहे हैं।


खूब भा रहे हैं कश्मीरी पशमीना
जम्मू-कश्मीर से आए रमीज राजा के स्टॉल पर कश्मीरी पशमीना और शॉल लगाए गए हैं। इनकी कीमत 10 हजार से 20 हजार रुपये तक है। इसके अलावा वह कश्मीरी सूट और स्टॉल भी बेच रहे हैं। इनकी कीमत पांच सौ से 3,500 रुपये तक है।


रेशम की साड़ियां 12 सौ से 12 हजार तक
कोलकाता से आए वर्धमान हथकरघा हैंडलूम की तरफ से मेले में रेशम की साड़ी का स्टॉल लगाया गया है। साड़ियों की कीमत 12 सौ से 12 हजार रुपये तक है।
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