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फोरलेन बनाने वाली कंपनी पर मेहरबानी
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- फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। एक लाख घनमीटर उपखनिज के भंडारण की क्षमता वाली कंपनी को नौ लाख घन मीटर उपखनिज की निकासी की अनुमति दे दी गई। यह कंपनी फोर लेन हाईवे बना रही है और खनन विभाग का कहना है कि कंपनी ने भंडारण क्षमता को बढ़ाने का आवेदन किया हुआ है। अपने हित प्रभावित होने की आशंका से अब गौला के वाहन संचालक भी विरोध में उतर आए हैं।
शासन की ओर से हाल ही में रुद्रपुर से काठगोदाम तक हाईवे बना रही कंपनी को गौला नदी से नौ लाख घन मीटर उपखनिज निकालने की अनुमति दी गई है। इतना ही नहीं कंपनी को नया गेट खोलने की अनुमति भी दी गई है। कंपनी के पास एक साल में मात्र एक लाख घन मीटर और एक समय में 63420 घनमीटर से कम उपखनिज भंडारण की अनुमति है। शासनादेश में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि एक समय में कंपनी 63420 घन मीटर से अधिक उपखनिज का भंडारण नहीं करेगी। वन विकास निगम के मुताबिक कंपनी यहां से प्रतिदिन करीब 650 घन मीटर उपखनिज की निकासी कर रही है। उप निदेशक खनन राजपाल लेघा के मुताबिक कंपनी ने भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए आवेदन किया हुआ है। इसी कंपनी के खिलाफ स्टोन क्रशर के मानक पूरा न करने का भी आरोप है। इस मामले की जांच खान और प्रदूषण नियंत्रण विभाग को संयुक्त रूप से करनी है। लेघा का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण विभाग इस मामले की जांच करेगा। उधर, गौला नदी के खनन से जुड़े वाहनों के संचालक को अपने हितों की चिंता सता रही है। इनका कहना है कि नदी में इस बार उपखनिज बेहद कम है। उस पर कंपनी को नौ लाख घन मीटर उपखनिज निकासी की अनुमति दे गई है। इससे खनन सीजन शुरू होने पर उनके लिए उपखनिज बेहद कम रह जाएगा। कंपनी के प्रतिनिधि से बात करने की कोशिश की गई लेकिन बात नहीं हो पाई। पक्ष मिलने पर उसे प्रकाशित किया जाएगा।
हाईवे बना रही कंपनी पर सरकार मेहरबान
भंडारण की क्षमता एक लाख, उप खनिज निकासी की अनुमति नौ लाख घन मीटर की
क्षमता बढ़ाने की अनुमति मांगी हुई है कंपनी ने: खान विभाग
वाहन संचालक विरोध में उतरे, हितों पर चोट की है आशंका
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शासन की ओर से हाल ही में रुद्रपुर से काठगोदाम तक हाईवे बना रही कंपनी को गौला नदी से नौ लाख घन मीटर उपखनिज निकालने की अनुमति दी गई है। इतना ही नहीं कंपनी को नया गेट खोलने की अनुमति भी दी गई है। कंपनी के पास एक साल में मात्र एक लाख घन मीटर और एक समय में 63420 घनमीटर से कम उपखनिज भंडारण की अनुमति है। शासनादेश में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि एक समय में कंपनी 63420 घन मीटर से अधिक उपखनिज का भंडारण नहीं करेगी। वन विकास निगम के मुताबिक कंपनी यहां से प्रतिदिन करीब 650 घन मीटर उपखनिज की निकासी कर रही है। उप निदेशक खनन राजपाल लेघा के मुताबिक कंपनी ने भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए आवेदन किया हुआ है। इसी कंपनी के खिलाफ स्टोन क्रशर के मानक पूरा न करने का भी आरोप है। इस मामले की जांच खान और प्रदूषण नियंत्रण विभाग को संयुक्त रूप से करनी है। लेघा का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण विभाग इस मामले की जांच करेगा। उधर, गौला नदी के खनन से जुड़े वाहनों के संचालक को अपने हितों की चिंता सता रही है। इनका कहना है कि नदी में इस बार उपखनिज बेहद कम है। उस पर कंपनी को नौ लाख घन मीटर उपखनिज निकासी की अनुमति दे गई है। इससे खनन सीजन शुरू होने पर उनके लिए उपखनिज बेहद कम रह जाएगा। कंपनी के प्रतिनिधि से बात करने की कोशिश की गई लेकिन बात नहीं हो पाई। पक्ष मिलने पर उसे प्रकाशित किया जाएगा।
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हाईवे बना रही कंपनी पर सरकार मेहरबान
भंडारण की क्षमता एक लाख, उप खनिज निकासी की अनुमति नौ लाख घन मीटर की
क्षमता बढ़ाने की अनुमति मांगी हुई है कंपनी ने: खान विभाग
वाहन संचालक विरोध में उतरे, हितों पर चोट की है आशंका