फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   राज्य आंदोलनकारियों को क्षैतिज आरक्षण असंवैधानिक

राज्य आंदोलनकारियों को क्षैतिज आरक्षण असंवैधानिक

Thu, 08 Mar 2018 03:04 AM IST
Updated Thu, 08 Mar 2018 03:04 AM IST
विज्ञापन
राज्य आंदोलनकारियों को क्षैतिज आरक्षण असंवैधानिक
नैनीताल। उच्च न्यायालय ने सरकार और राज्य आंदोलनकारियों को बड़ा झटका देते हुए सरकारी सेवा में दस प्रतिशत के क्षैतिज आरक्षण को असंवैधानिक घोषित कर दिया है। बुधवार को न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। इससे पहले खंडपीठ में मत विभाजन होने के कारण इस मामले में फैसला नहीं हो पाया था। इसके बाद यह मामला एकल पीठ के पास पहुंचा था और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकल पीठ ने भी करीब तीन महीने पहले सुनवाई पूरी करने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था।
विज्ञापन

सरकारी सेवा में दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का तत्कालीन कांग्रेस सरकार काफैसला विवाद में आने के कारण उच्च न्यायालय पहुंचा था। इसमें राज्य आंदोलनकारियों की सीधी नियुक्ति को चुनौती दी गई थी। इस बीच राज्य आंदोलनकारियों की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया था कि सरकार ने दो अलग-अलग शासनादेश जारी कर राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी सेवा में दस प्रतिशत का क्षैतिज आरक्षण दिया है। इसी के तहत उनको नियुक्तियां दी जा रही हैं। हाइकोर्ट ने बुधवार को सुनाए गए अपने फैसले में क्षैतिज आरक्षण को असंवैधानिक घोषित कर दिया है।
विज्ञापन

खंडपीठ में जजों ने दी थी अलग-अलग राय
इस प्रकरण खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई तो उसमें दोनों न्यायमूर्तियों की राय अलग-अलग होने पर मामला मुख्य न्यायाधीश को रेफर कर दिया गया था। खंडपीठ के न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया का मत था कि राज्य आंदोलनकारियों को आरक्षण देना असंवैधानिक है। इस पीठ के न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी ने आरक्षण को विधि सम्मत माना था। मत विभाजन होने के कारण मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ ने मामला तीसरी बेंच को रेफर किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

सरकार के सामने आंदोलनकारियों को मनाने की चुनौती
क्षैतिज आरक्षण को असंवैधानिक ठहराए जाने से सरकार और राज्य आंदोलनकारियों को बड़ा झटका लगा है। सरकार की ओर से राज्य आंदोलन में आंदोलनकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका का जिक्र करते हुए उनके लिए क्षैतिज आरक्षण को सही ठहराया गया था। ठीक गैरसैंण सत्र से पहले यह फैसला सामने आने से सरकार के सामने अब मायूस आंदोलनकारियों को मनाने की चुनौती भी होगी। राज्य आंदोलनकारी भी इस मामले को अब सरकार के पाले में खिसका रहे हैं। राज्य आंदोलनकारी राजेंद्र बिष्ट का कहना है कि सरकार इस मामले को सदन में लेकर आए और इस पर कानून बनाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed