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हाथी दांत तस्करी ने खोली विभागीय गश्त की पोल
Updated Sat, 28 Oct 2017 02:26 AM IST
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रामनगर (नैनीताल)। तराई पश्चिमी वन प्रभाग की आमपोखरा रेंज हमेशा अतिसंवेदनशील क्षेत्र रहा है। तराई से लेकर भाबर तक फैला यह जंगल खतरे में है। पहले यहां बाहरी वन अपराधी आते थे लेकिन अब जंगल में रहने वाले गुजर भी वन्यजीव अंग तस्करी करने लगे हैं। इस पर संरक्षण से जुड़े लोगों ने गहरी चिंता जताई है।
आमपोखरा रेंज के प्लॉट नंबर 22, 23 में वन गुजरों ने करीब 10 एकड़ आरक्षित वनभूमि को साफ किया है। कई पेड़ों का कटान कर धान की फसल बोई है। हाथी को मारकर दांत निकाल लेने तक से वनकर्मियों की गश्त की पोल खुल गई है। इस रेंज का जंगल कार्बेट टाइगर रिजर्व से भी सटा है। यहां हाथियों समेत बाघों की भी बड़ी संख्या है। वन गुजर दिनभर घने जंगलों में रहकर अपने जानवर चराते हैं। उन्हें देखकर वनकर्मी भी जंगल को सुरक्षित समझते हैं लेकिन अब हुए खुलासे से आशंका जताई जा रही कि न जाने कितने वन्यजीवों को इन लोगों ने मारा होगा। हाथी दांत तस्करी में गिरफ्तार वन गुजर मो. कासिम रात में अपनी बाइक से आसपास के क्षेत्र में ही बेचने जा रहा था, या किसी बड़े तस्कर के पास? इस बारे में कासिम से कड़ी पूछताछ होने पर कई अहम सुराग विभाग को मिल सकते हैं। यदि विभाग हाथी दांत के खरीदारों का पता लगा ले तो कई रहस्य खुलेंगे जो कई तस्करों की धरपकड़ में मददगार होंगे।
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आमपोखरा रेंज के प्लॉट नंबर 22, 23 में वन गुजरों ने करीब 10 एकड़ आरक्षित वनभूमि को साफ किया है। कई पेड़ों का कटान कर धान की फसल बोई है। हाथी को मारकर दांत निकाल लेने तक से वनकर्मियों की गश्त की पोल खुल गई है। इस रेंज का जंगल कार्बेट टाइगर रिजर्व से भी सटा है। यहां हाथियों समेत बाघों की भी बड़ी संख्या है। वन गुजर दिनभर घने जंगलों में रहकर अपने जानवर चराते हैं। उन्हें देखकर वनकर्मी भी जंगल को सुरक्षित समझते हैं लेकिन अब हुए खुलासे से आशंका जताई जा रही कि न जाने कितने वन्यजीवों को इन लोगों ने मारा होगा। हाथी दांत तस्करी में गिरफ्तार वन गुजर मो. कासिम रात में अपनी बाइक से आसपास के क्षेत्र में ही बेचने जा रहा था, या किसी बड़े तस्कर के पास? इस बारे में कासिम से कड़ी पूछताछ होने पर कई अहम सुराग विभाग को मिल सकते हैं। यदि विभाग हाथी दांत के खरीदारों का पता लगा ले तो कई रहस्य खुलेंगे जो कई तस्करों की धरपकड़ में मददगार होंगे।
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