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चारधाम यात्री बीमा घोटाले का मामला हाइकोर्ट पहुंचा
Updated Thu, 21 Sep 2017 02:15 AM IST
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नैनीताल। चारधाम यात्रियों से बीमा राशि वसूल कर उनका बीमा न कराने का मामला जनहित याचिका के जरिए हाइकोर्ट पहुुंच गया है। इस घोटाले की जांच को लेकर दायर अर्जी पर सुनवाई के बाद हाइकोर्ट ने जिला पंचायत उत्तरकाशी और ठेकेदार को नोटिस जारी किया है। साथ ही कोर्ट ने सरकार व जिला पंचायत से चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिया है।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार उत्तरकाशी निवासी भीष्म राणा ने हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि जिला पंचायत उत्तरकाशी की ओर से 2015 से 2017 तक यमनोत्री धाम की यात्रा कराने के लिए घोड़ा व अन्य सुविधाओं के लिए ठेका दिया था, जिसमें ठेकेदार के साथ यह अनुबंध हुआ था कि जो भी इन सुविधाओं से यात्रा करेगा तो उनका यात्री बीमा होगा। यह बीमे की राशि यात्रियों से ही वसूल किया जायेगा। ठेकेदार ने इस दौरान सभी यात्रियों से बीमे की राशि वसूल की, लेकिन जिला पंचायत ने किसी भी यात्री का यात्री बीमा नहीं कराया गया। जब याचिकाकर्ता को इसका पता चला तो उसने जिला पंचायत से इसकी सूचना आरटीआई में मांगी। आरटीआई में किसी भी यात्री का बीमा नहीं होना पाया गया। इससे स्पष्ट हो गया की जिला पंचायत व ठेकेदार की मिलीभगत से यात्री बीमा का घपला हुआ है। इसकी जांच कराने के लिए याचिकाकर्ता ने हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। मामले को सुनने के बाद कोर्ट ने जिला पंचायत उत्तरकाशी व ठेकेदार को नोटिस जारी कर दिया है। साथ ही जिला पंचायत व सरकार से चार सप्ताह में जवाब देने को कहा गया है।
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बुधवार को मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार उत्तरकाशी निवासी भीष्म राणा ने हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि जिला पंचायत उत्तरकाशी की ओर से 2015 से 2017 तक यमनोत्री धाम की यात्रा कराने के लिए घोड़ा व अन्य सुविधाओं के लिए ठेका दिया था, जिसमें ठेकेदार के साथ यह अनुबंध हुआ था कि जो भी इन सुविधाओं से यात्रा करेगा तो उनका यात्री बीमा होगा। यह बीमे की राशि यात्रियों से ही वसूल किया जायेगा। ठेकेदार ने इस दौरान सभी यात्रियों से बीमे की राशि वसूल की, लेकिन जिला पंचायत ने किसी भी यात्री का यात्री बीमा नहीं कराया गया। जब याचिकाकर्ता को इसका पता चला तो उसने जिला पंचायत से इसकी सूचना आरटीआई में मांगी। आरटीआई में किसी भी यात्री का बीमा नहीं होना पाया गया। इससे स्पष्ट हो गया की जिला पंचायत व ठेकेदार की मिलीभगत से यात्री बीमा का घपला हुआ है। इसकी जांच कराने के लिए याचिकाकर्ता ने हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। मामले को सुनने के बाद कोर्ट ने जिला पंचायत उत्तरकाशी व ठेकेदार को नोटिस जारी कर दिया है। साथ ही जिला पंचायत व सरकार से चार सप्ताह में जवाब देने को कहा गया है।
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