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एलबीएस कॉलेज सरकारी तो हुआ पर संसाधन नहीं बढ़े
Updated Thu, 24 Aug 2017 02:48 AM IST
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हल्द्वानी। लालकुआं और आसपास क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्चशिक्षा हासिल करने के लिए हल्द्वानी की दौड़ न लगानी पड़ी, इस मकसद से निजी लालबहादुर शास्त्री महाविद्यालय का राजकीयकरण तो किया गया मगर संसाधन अब तक मुहैया नहीं कराए गए। हाल यह है कि एक वर्ष से प्राध्यापकों और कर्मचारियों का समायोजन ही नहीं हो सका है। नये कक्षा कक्ष बनाने के लिए उच्चशिक्षा विभाग या फिर शासन की ओर से फूटी कौड़ी तक नहीं मिली।
हल्द्वानी से 10 किलो मीटर दूर हल्दूचौड़ में लालबहादुर शास्त्री महाविद्यालय का संचालन निजी संस्था द्वारा किया जाता था। पिछले साल तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इस महाविद्यालय का छह नवंबर 2015 को राजकीयकरण के आदेश जारी किए थे। शासन ने महाविद्यालय के लिए करीब 65 पद स्वीकृत किए हैं मगर इन पर तैनाती अब तक नहीं हो सकी है। उच्चशिक्षा विभाग ने केवल प्राचार्य पद पर डा. आरसी पुरोहित को भेजा गया। महाविद्यालय में बीए, बीएससी और बीकॉम के अलावा एमकॉम भी चल रहा है। इसके साथ बीएड भी चल रहा है। बीएससी के छात्रों के लिए प्रयोगशाला की समस्या का समाधान तो करा दिया लेकिन पढ़ाई के लिए पर्याप्त कमरे न होने की समस्या से जूझ रहे हैं। महाविद्यालय में बीएससी की कक्षाएं पिदले वर्ष से ही शुरू हुई हैं लेकिन इसके लिए कक्षाएं नहीं हैं। विज्ञान भवन के लिए बजट नहीं आया है। प्राचार्य ने बताया कि महाविद्यालय में अभी तक 284 प्रवेश हो चुके हैं।
लाखों की बस हुई बेकार
हल्द्वानी। लालबहादुर शास्त्री महाविद्यालय में विद्यार्थियों को लाने ले जाने के लिए लगी बस महाविद्यालय का राजकीयकरण होने के बाद से बेकार हो गई है। बस मरम्मत के लिए कम से 80 हजार रुपये का बजट चाहिए जो कि महाविद्यालय के पास है नहीं।
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अभी तक प्राध्यापकों एवं अन्य स्टाफ के समायोजन की प्रक्रिया चल रही है। गृह विज्ञान, बीएड के दो प्राध्यापकों का ही समायोजन हुआ तथा 16 प्राध्यापकों का समायोजन होना बाकी है। महाविद्यालय में क्लासरूमों की बहुत कमी है, इसका प्रस्ताव बनाकर निदेशालय को भेजा गया है।
- डॉ. आरसी पुरोहित, प्राचार्य
प्राध्यापकों और अन्य कर्मचारियों का समायोजन शासनादेश के अनुसार किया जा रहा है। शासन ने 11 कर्मचारियों के समायोजन आदेश जारी किए थे लेकिन उसमें यह शर्त रखी गई थी कि जिनका वेतन बैंक के माध्यम से दिया जा रहा हो उन्हें ही समायोजन किया जाए इस कारण चार का ही समायोजन हो सका है। छात्रों की मांग पर एमए की कक्षाएं शुरू कराने के संबंध में शासन को संस्तुति भेजी गई है।
- डॉ. बीसी मेलकानी, निदेशक उच्चशिक्षा विभाग
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हल्द्वानी से 10 किलो मीटर दूर हल्दूचौड़ में लालबहादुर शास्त्री महाविद्यालय का संचालन निजी संस्था द्वारा किया जाता था। पिछले साल तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इस महाविद्यालय का छह नवंबर 2015 को राजकीयकरण के आदेश जारी किए थे। शासन ने महाविद्यालय के लिए करीब 65 पद स्वीकृत किए हैं मगर इन पर तैनाती अब तक नहीं हो सकी है। उच्चशिक्षा विभाग ने केवल प्राचार्य पद पर डा. आरसी पुरोहित को भेजा गया। महाविद्यालय में बीए, बीएससी और बीकॉम के अलावा एमकॉम भी चल रहा है। इसके साथ बीएड भी चल रहा है। बीएससी के छात्रों के लिए प्रयोगशाला की समस्या का समाधान तो करा दिया लेकिन पढ़ाई के लिए पर्याप्त कमरे न होने की समस्या से जूझ रहे हैं। महाविद्यालय में बीएससी की कक्षाएं पिदले वर्ष से ही शुरू हुई हैं लेकिन इसके लिए कक्षाएं नहीं हैं। विज्ञान भवन के लिए बजट नहीं आया है। प्राचार्य ने बताया कि महाविद्यालय में अभी तक 284 प्रवेश हो चुके हैं।
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लाखों की बस हुई बेकार
हल्द्वानी। लालबहादुर शास्त्री महाविद्यालय में विद्यार्थियों को लाने ले जाने के लिए लगी बस महाविद्यालय का राजकीयकरण होने के बाद से बेकार हो गई है। बस मरम्मत के लिए कम से 80 हजार रुपये का बजट चाहिए जो कि महाविद्यालय के पास है नहीं।
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अभी तक प्राध्यापकों एवं अन्य स्टाफ के समायोजन की प्रक्रिया चल रही है। गृह विज्ञान, बीएड के दो प्राध्यापकों का ही समायोजन हुआ तथा 16 प्राध्यापकों का समायोजन होना बाकी है। महाविद्यालय में क्लासरूमों की बहुत कमी है, इसका प्रस्ताव बनाकर निदेशालय को भेजा गया है।
- डॉ. आरसी पुरोहित, प्राचार्य
प्राध्यापकों और अन्य कर्मचारियों का समायोजन शासनादेश के अनुसार किया जा रहा है। शासन ने 11 कर्मचारियों के समायोजन आदेश जारी किए थे लेकिन उसमें यह शर्त रखी गई थी कि जिनका वेतन बैंक के माध्यम से दिया जा रहा हो उन्हें ही समायोजन किया जाए इस कारण चार का ही समायोजन हो सका है। छात्रों की मांग पर एमए की कक्षाएं शुरू कराने के संबंध में शासन को संस्तुति भेजी गई है।
- डॉ. बीसी मेलकानी, निदेशक उच्चशिक्षा विभाग