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चीन को युद्ध में मुंह की खानी पड़ेगी
Updated Thu, 27 Jul 2017 02:30 AM IST
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हल्द्वानी। देश के प्रमुख युद्धों में अदम्य साहस दिखा चुके मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) इंद्रजीत सिंह बोरा ने कहा कि चीन से डरने की जरूरत नहीं है। पिछले रिकॉर्ड को देख लिया जाए तो यह बात स्पष्ट है कि वह युद्ध नहीं कर सकता।
अमर उजाला से खास बातचीत में मेजर जनरल इंद्रजीत सिंह बोरा ने कहा कि चीन ने 1967 नाथुला दर्रे पर घुसपैठ की थी। तब भारतीय सेना ने डटकर मुकाबाला किया था। इस हमले में चीन के 400 सैनिक मारे गए और 86 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। 1987 में फिर चीन की सेना ने घुसपैठ करने की कोशिश की लेकिन भारतीय सेना के आक्रामक रुख अपनाने पर चीन के सैनिक पीछे हट गए। उन्होंने कहा कि इन दोनों युद्धों को उन्होंने नजदीक से देखा है। इस समय भी चीन की सेना गीदड़ भभकी दे रही है। वह भारतीय सेना से भिड़ने की स्थिति में नहीं है। भारतीय सेना के पास चीन से बेहतरीन तोपें, हवाई हमले के लिए हथियार और अत्याधुनिक परमाणु पनडुब्बी हैं। भारतीय सेना ने डोकलम के आस पास मोर्चा संभाल लिया है।
उन्होंने कहा कि चीन को मालूम है कि युद्ध हुआ तो उनका अधिक नुकसान होगा। यदि भारत के लोग चीन के सामानों का बहिष्कार करें तो चीन की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ेगा। कारगिल ऑपरेशन में शामिल रहे मेजर जनरल ने बताया कि 1999 में पाक सेना को मिटाने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई और रक्षामंत्री ने वार रूम में आकर सेना की तैयारी का जायजा लिया था। अटल जी के धमकाने पर पाक प्रधानमंत्री ने तत्काल अपनी सेना सीमा से बुला ली और युद्ध टल गया। यदि युद्ध होता तो पाक का नामों निशान मिट जाता लेकिन युद्ध में अपने देश को भी क्षति पहुंच सकती थी। इसी कारण युद्ध को स्थगित कर दिया गया था।
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अमर उजाला से खास बातचीत में मेजर जनरल इंद्रजीत सिंह बोरा ने कहा कि चीन ने 1967 नाथुला दर्रे पर घुसपैठ की थी। तब भारतीय सेना ने डटकर मुकाबाला किया था। इस हमले में चीन के 400 सैनिक मारे गए और 86 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। 1987 में फिर चीन की सेना ने घुसपैठ करने की कोशिश की लेकिन भारतीय सेना के आक्रामक रुख अपनाने पर चीन के सैनिक पीछे हट गए। उन्होंने कहा कि इन दोनों युद्धों को उन्होंने नजदीक से देखा है। इस समय भी चीन की सेना गीदड़ भभकी दे रही है। वह भारतीय सेना से भिड़ने की स्थिति में नहीं है। भारतीय सेना के पास चीन से बेहतरीन तोपें, हवाई हमले के लिए हथियार और अत्याधुनिक परमाणु पनडुब्बी हैं। भारतीय सेना ने डोकलम के आस पास मोर्चा संभाल लिया है।
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उन्होंने कहा कि चीन को मालूम है कि युद्ध हुआ तो उनका अधिक नुकसान होगा। यदि भारत के लोग चीन के सामानों का बहिष्कार करें तो चीन की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ेगा। कारगिल ऑपरेशन में शामिल रहे मेजर जनरल ने बताया कि 1999 में पाक सेना को मिटाने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई और रक्षामंत्री ने वार रूम में आकर सेना की तैयारी का जायजा लिया था। अटल जी के धमकाने पर पाक प्रधानमंत्री ने तत्काल अपनी सेना सीमा से बुला ली और युद्ध टल गया। यदि युद्ध होता तो पाक का नामों निशान मिट जाता लेकिन युद्ध में अपने देश को भी क्षति पहुंच सकती थी। इसी कारण युद्ध को स्थगित कर दिया गया था।
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