फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   कुमाऊं में फेल हो गई हिमाचल कूप योजना

कुमाऊं में फेल हो गई हिमाचल कूप योजना

Tue, 27 Jun 2017 02:07 AM IST
Updated Tue, 27 Jun 2017 02:07 AM IST
विज्ञापन
कुमाऊं में फेल हो गई हिमाचल कूप योजना
कुमाऊं में फेल हो गई हिमाचल कूप योजना
विज्ञापन


हल्द्वानी।
कुमाऊं के सभी जिलों में पेयजल का गंभीर संकट बना हुआ है। सरकार द्वारा बनाए गए हिमाचल कूप लगभग सूख चुके हैं। नौलों का पानी सुबह-सुबह ही समाप्त हो जा रहा है। सूखे के चलते चाल-खाल भी जवाब दे चुके हैं। चुपटौले भी पूरी तरह सूख चुके हैं। प्राकृतिक गाड़, गधेरों और धारों पर दबाव बढ़ गया है। पहाड़ के लोग भीषण जल संकट से जूझ रहे हैं। पेयजल व्यवस्था से जुड़े अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। विभागीय लापरवाही का खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
अमर उजाला संवाददाता ने बीते दिनों रामगढ़ से बेरीनाग, पांखू, राईआगर और गंगोलीहाट क्षेत्र में स्थापित हैंडपंप (हिमाचल कूप) का निरीक्षण किया। पाया गया कि हर 14 में से 13 नलकूप खराब पड़े हैं। इन इलाकों में पेयजल व्यवस्था का जायजा लेने पर पता चला कि लोग प्राकृतिक जल स्रोतों धारों, गधेरों और आसपास बहने वाली गाड़ के पानी पर निर्भर हैं। गांवों के पुराने चाल, खाल भी देखरेख के अभाव में खत्म हो गए हैं। चुपटौले भी पूरी तरह सूखे पड़े हैं। लोगों को किमी दूर से पानी ढोना पड़ रहा है। पानी के अभाव में लोगों का जीवन मुश्किल में पड़ गया है।
विज्ञापन


बेड़ीनाग में चौथे दिन मिलता है पानी

गोरी घटिया नदी से बेड़ीनाग केे लिए पेयजल की लिफ्ट स्कीम बनाई गई। विभाग की दोषपूर्ण वितरण व्यवस्था के कारण यहां हर इलाके में लोगों को चौथे दिन पेयजल की आपूर्ति की जाती है। संपन्न, नेता और प्रभावशाली लोगों को रोजाना पेयजल की आपूर्ति की जाती है। सामान्य जनता की आवाज दबाई जाती रही है। उन्हें कभी भी ठीक तरह से पानी की आपूर्ति नहीं की जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


क्या हैं चाल, खाल, चुपटौले
चाल, खाल और चुरटौले की जो स्थानीय परिवेश में संज्ञा दी गई है। उसमें चाल वह है जहां पानी तो उपलब्ध है मगर नौले बनाना संभव नहीं है। ऐसे जगह पर बड़ा सा गड्ढा खोदकर पानी एकत्रित किया जाता है। खाल का मतलब है चारों से से पहाड़ियों से घिरे इलाके में एक मैदान होता है। जहां पानी उपलब्ध नहीं होता है। पहाड़ों से बहकर आने वाले पानी को एकत्रित करने के लिए खाल (बड़ा सा गड्ढा) बनाया जाता है। यह पानी जानवरों के पीने के काम आता है। चुपटौले का मतलब है जहां कहीं भी थोड़ी मात्रा में पानी आता है, उसे एकत्रित कर रोजमर्रा के काम में लाया जाया है। यह छोटे-छोटे गड्ढे में जमा किया जाता है।

चेक कराएंगे कितने हैंडपंप खराब हैं

जलसंस्थान के महाप्रबंधक एचके पांडे नलकूप (हिमाचल कूप) के बड़ी संख्या में खराब होने से इनकार करते हैं। उनका कहना है कि कहीं एक दो हैंडपंप खराब हो सकते हैं। कितने हैंडपंप खराब हैं, इन्हें चेक कराया जाएगा।


बेड़ीनाग में दिक्कत वजह पता करेंगे

जलसंस्थान पिथौरागढ़ के जीएम वीके मिश्रा का कहना है कि बेरीनाग में जल संकट का मामला उनके संक्षान में नहीं आया है। वहां लिफ्ट स्कीम होने के बावजूद क्यों पानी का संकट बना है, इसे देखा जाएगा और इसका कोई सर्वमान्य हल निकाला जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed