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वर्क सुपरवाइजर के वेतनमान मामले को आठ सप्ताह में निस्तारित करें: हाइकोर्ट
Updated Fri, 16 Jun 2017 11:56 PM IST
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वर्क सुपरवाइजर के वेतनमान मामले को आठ सप्ताह में निस्तारित करें : हाइकोर्ट
नैनीताल।
हाइकोर्ट ने वर्क सुपरवाइजर के वेतनमान में भिन्नता के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद उपसचिव लोक निर्माण विभाग देहरादून को आठ सप्ताह के भीतर निस्तारित करने का आदेश दिया है।
शुक्रवार को न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। लोक निर्माण विभाग (भवाली) से 2016 में वर्क सुपरवाइजर के पद से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारी भुवन सिंह ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि विभाग की ओर से वर्क सुपरवाइजर एवं वर्क ऐजेंट के वेतनमान में भिन्नता की गई है।
वर्क ऐजेंट का ग्रेड वेतन बढ़ा दिया गया था। वर्क एजेंट के पद से वर्क सुपरवाइजर के पद पर प्रमोशन होता है। वर्क सुपरवाइजर के ग्रेड वेतन को नहीं बढ़ाया गया। विभाग ने शासन को 19 सितंबर 2016 को प्रस्ताव भेजा कि वर्क सुपरवाइजर का वेतनमान दो हजार रुपये से बढ़ाकर 2800 में उच्चीकृत किया जाए। यह मामला वर्तमान में उपसचिव लोक निर्माण विभाग में लंबित है।
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नैनीताल।
हाइकोर्ट ने वर्क सुपरवाइजर के वेतनमान में भिन्नता के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद उपसचिव लोक निर्माण विभाग देहरादून को आठ सप्ताह के भीतर निस्तारित करने का आदेश दिया है।
शुक्रवार को न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। लोक निर्माण विभाग (भवाली) से 2016 में वर्क सुपरवाइजर के पद से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारी भुवन सिंह ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि विभाग की ओर से वर्क सुपरवाइजर एवं वर्क ऐजेंट के वेतनमान में भिन्नता की गई है।
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वर्क ऐजेंट का ग्रेड वेतन बढ़ा दिया गया था। वर्क एजेंट के पद से वर्क सुपरवाइजर के पद पर प्रमोशन होता है। वर्क सुपरवाइजर के ग्रेड वेतन को नहीं बढ़ाया गया। विभाग ने शासन को 19 सितंबर 2016 को प्रस्ताव भेजा कि वर्क सुपरवाइजर का वेतनमान दो हजार रुपये से बढ़ाकर 2800 में उच्चीकृत किया जाए। यह मामला वर्तमान में उपसचिव लोक निर्माण विभाग में लंबित है।
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