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इंसेफलाइटिस बुखार के तीन संदिग्ध मरीज मिले
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भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति
- फोटो : www.pexels.com
हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में इंसेफेलाइटिस बुखार से पीड़ित तीन संदिग्ध मरीजों के आने से हड़कंप मच गया। मरीजों की रिपोर्ट जिला संक्रामक रोग विशलेषक अधिकारी को भेजी गई है। हालांकि डॉक्टर चमकी बुखार को लेकर भी नजर बनाए हुए हैं। बुखार की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को भी भेजी गई है।
तेज बुखार के कारण तीन बच्चे बीते चार दिनों में सुशीला तिवारी अस्पताल में आए थे। बुखार के संदिग्ध मरीज होने के कारण डॉक्टरों के भी हाथपांव फूल गए थे। तीनों बच्चों को एनआईसीयू में रखा गया था। सुशीला तिवारी अस्पताल के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ.अजय आर्या ने बताया कि जांच के लिए बच्चों के सैंपल भेजे गए थे। बच्चों में ए सेप्टिक मैनएंजाइटिस की पुष्टि हुई थी। बच्चे डिस्चार्ज होकर चले गए हैं। बताया कि जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि नहीं हुई है। वायरोलाजी लैब की प्रमुख डॉ.विनीता रावत ने बताया कि तीनों बच्चों में जापानी इंसेफ्लाइटिस की पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर बाल रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.ऋतु रखोलिया ने बताया कि लीची खाने या हाइपोग्लेसीमिया की हिस्ट्री नहीं थी। हालांकि बुखार के संदिग्ध रोगी आने पर डॉक्टर इंसेफेलाइटिस से लेकर चमकी बुखार तक पर नजर रख रहे हैं। पिछले वर्ष जापानी इंसेफेलाइटिस के 28 मरीज आए थे और कालाढूंगी निवासी एक मरीज की मृत्यु हुई थी।
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इंसेफेलाइटिस बुखार के तीन संदिग्ध मरीज मिले
चमकी बुखार को लेकर भी डॉक्टर बनाए हुए नजर, एसटीएच ने स्वास्थ्य विभाग को भेजी रिपोर्ट
जांच के दौरान नहीं हुई जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि
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तेज बुखार के कारण तीन बच्चे बीते चार दिनों में सुशीला तिवारी अस्पताल में आए थे। बुखार के संदिग्ध मरीज होने के कारण डॉक्टरों के भी हाथपांव फूल गए थे। तीनों बच्चों को एनआईसीयू में रखा गया था। सुशीला तिवारी अस्पताल के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ.अजय आर्या ने बताया कि जांच के लिए बच्चों के सैंपल भेजे गए थे। बच्चों में ए सेप्टिक मैनएंजाइटिस की पुष्टि हुई थी। बच्चे डिस्चार्ज होकर चले गए हैं। बताया कि जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि नहीं हुई है। वायरोलाजी लैब की प्रमुख डॉ.विनीता रावत ने बताया कि तीनों बच्चों में जापानी इंसेफ्लाइटिस की पुष्टि नहीं हुई है।
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दूसरी ओर बाल रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.ऋतु रखोलिया ने बताया कि लीची खाने या हाइपोग्लेसीमिया की हिस्ट्री नहीं थी। हालांकि बुखार के संदिग्ध रोगी आने पर डॉक्टर इंसेफेलाइटिस से लेकर चमकी बुखार तक पर नजर रख रहे हैं। पिछले वर्ष जापानी इंसेफेलाइटिस के 28 मरीज आए थे और कालाढूंगी निवासी एक मरीज की मृत्यु हुई थी।
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इंसेफेलाइटिस बुखार के तीन संदिग्ध मरीज मिले
चमकी बुखार को लेकर भी डॉक्टर बनाए हुए नजर, एसटीएच ने स्वास्थ्य विभाग को भेजी रिपोर्ट
जांच के दौरान नहीं हुई जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि