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विदेशी धरती पर भी छलका पलायन का दर्द

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 28 May 2019 02:11 AM IST
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विदेशी धरती पर भी छलका पलायन का दर्द
हल्द्वानी। पहाड़ से हो रहे पलायन का दर्द किसी से छुपा नहीं है। बागेश्वर के कुलदीप गंगोला की पलायन की समस्या पर बनाई गई फिल्म को अंतरराष्ट्रीय मंच पर काफी सराहना मिल चुकी है। कुलदीप की फिल्म घोस्ट विलेजेज ऑफ हिमालयाज का चयन इंटरनेशनल पीएसए कंप्टीशन के लिए हुआ है।
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मूल रूप से बागेश्वर निवासी कुलदीप साह गंगोला ने जुलाई 2018 में फिल्म पर काम करना शुरू किया, जो जनवरी 2019 में पूरा हुआ। फिल्म की पहली स्क्रीनिंग न्यूयार्क फिल्म फेस्टिवल में हुई। यहां फिल्म को ऑडियंस च्वाइस अवार्ड से नवाजा गया। फिल्म को दिल्ली में आयोजित हेबिटेट फिल्म फेस्टिवल और न्यूजर्सी में में भी खूब सराहा गया। अब फिल्म को इंटरनेशनल पीएसए कंप्टीशन के लिए चुना गया है। कुलदीप के पिता आलोक साह व्यवसायी हैं जबकि मां गृहिणी हैं। उनकी शिक्षा नैनीताल के सेंट जोसेफ कॉलेज से हुई। एफएडी इंटरनेशनल कॉलेज पुणे से डिप्लोमा करने के बाद उन्होंने न्यूयॉर्क फिल्म एकेडमी में फिल्म मेकिंग में ग्रेजुएशन की। वर्तमान में वह न्यूयार्क में एडीटर फिल्ममेकर के रूप में कार्यरत हैं।
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विदेशी धरती पर भी छलका पलायन का दर्द
कुलदीप गंगोला की फिल्म इंटरनेशनल पीएसए फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जाएगी

कहानी
घोस्ट विलेजेज ऑफ हिमालयाज कपकोट के खोलाखेत गांव निवासी 89 वर्षीय महिला की कहानी है। पलायन का दंश झेल रहे गांव में वृद्धा के अलावा कुछ लोग ही रहते हैं। 16 मिनट की इस फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे अपनों के इंतजार में वृद्धा का समय कैसे व्यतीत होता है। इसके साथ ही फिल्म में जंगली जानवरों का आतंक भी दिखाया गया है।
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बदहाल शिक्षा व स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ ही रोजगार के अवसर इजाद न होना पलायन का प्रमुख कारण है। कई लोगों की तरह मैं भी माइग्रेशन का प्रोडक्ट हूं। मेेरा मानना है कि एक जगह पैदा होकर वहीं रहने से कही बेहतर है कि दुनिया घूमकर जन्मभूमि में वापसी करें। अच्छे अवसरों के लिए बाहर जाना पड़ता है लेकिन अपनी जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। कई ऐसी चीजें हैं जो माइग्रेशन रोकने और रिवर्स माइग्रेशन के लिए सरकार कर सकती है। उन्हें इस पर ध्यान देना चाहिए। - कुलदीप
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