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राजस्व और भूमि हस्तांतरण के बैगर आठ नाली जमीन में बदस्तूर निर्माण कार्य
Updated Sun, 16 Dec 2018 11:41 PM IST
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गरुड़ (बागेश्वर)। बारह करोड़ रुपये की लागत से बन रही गरुड़ ग्राम समूह पंपिंग पेयजल योजना निर्माण कार्य शुरू होते ही विवादों के घेरे में आ गई है। निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए पर्यावरण मंत्रालय से विभाग को आज तक मंजूरी नहीं मिली है। निर्माण एजेंसी ने बिना भूमि हस्तांतरण के आठ नाली जमीन में निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। अवैध खनन से जहां ककड़धार नाले रुख बदल गया है। पर्यावरण प्रेमियों ने अवैध खनन के मामले में निर्माण एजेंसी और पेयजल निर्माण निगम के ईई और जेई के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।
विधायक चंदन राम दास के प्रयासों से छह माह पहले गरुड़ ग्राम पेयजल पंपिंग योजना स्वीकृत हुई थी। पेयजल निर्माण निगम बागेश्वर ने पर्यावरण मंत्रालय से क्लीन चिट मिले बिना ही योजना की निविदा आमंत्रित कर दी। टेंडर स्वीकृत होने के बाद निर्माण एजेंसी ने निर्माण कार्य शुरू कर दिया। निर्माण ऐजेंसी ने बिना वन और राज्य सरकार की भूमि हस्तांतरित हुए गोमती नदी के किनारे राज्य सरकार की भूमि और वन भूमि में जेसीबी चलाकर निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। लोगों का आरोप है कि इसके अंतर्गत अवैध खनन किया जा रहा है।
ककड़धार, कज्यूली, सिटोली, अणां, मेलाडुंगरी, तैलीहाट आदि गांवों ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर सरकार ने गोमती नदी में अवैध खनन पर पाबंदी लगा रखी है। लेकिन यहां निर्माण एजेंसी द्वारा जेसीबी से रात दिन अवैध खनन किया जा रहा है। ग्रामीणों ने डीएम से अवैध खनन की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। पेयजल निर्माण निगम बागेश्वर के ईई सीपी गंगवार ने बताया कि विभाग ने गरुड़ ग्राम समूह पेयजल योजना के वन और राजस्व भूमि की पत्रावली तैयार कर दी है। पर्यावरण मंत्रालय से अभी मंजूरी नहीं मिली है। परिसीमन मिलने की प्रत्याशा विभाग ने इसकी निविदाएं आमंत्रित कर दी थी। ब्लॉक प्रमुख भरत फर्स्वाण का कहना है कि पेयजल निर्माण निगम अवैध खनन के लिए पूर्ण जिम्मेदार है। प्रमुख का कहना है कि अवैध खनन मामले में संबंधित विभाग व निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
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गरुड़ ग्राम समूह पंपिंग योजना की वन भूमि हस्तांतरण की पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी नहीं मिली है। निर्माण एजेंसी और केपीसीएल ने बिना भूमि हस्तांतरण के वन भूमि में पाइप लाइन और पेयजल टैंक का निर्माण किया है। विभाग ने अवैध खनन के मामले में ठेकेदार और निर्माण एजेंसी के खिलाफ जुर्म काटा है। दो दिन के अंदर जुर्म की राशि जमा नहीं हुई तो विभाग ठेकेदार और निर्माण एजेंसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने को बाध्य होगा। -आरके सिंह प्रभागीय वनाधिकारी बागेश्वर
बैगर वन और राजस्व भूमि हस्तांतरण के हुए निर्माण कार्य शुुरू करना अनुचित है। योजना का निर्माण कार्य शुरू कराने से पूर्व पेयजल निर्माण निगम ने वन और राजस्व भूमि का क्लीयरेंस करा लेना चाहिए। मामले की जांच की जाएगी। एसडीएम गरुड़ से मौका मुआयना कर रिपोर्ट शीघ्र देने को कहा है।- रंजना राजगुरु डीएम बागेश्वर
विधायक चंदन राम दास के प्रयासों से छह माह पहले गरुड़ ग्राम पेयजल पंपिंग योजना स्वीकृत हुई थी। पेयजल निर्माण निगम बागेश्वर ने पर्यावरण मंत्रालय से क्लीन चिट मिले बिना ही योजना की निविदा आमंत्रित कर दी। टेंडर स्वीकृत होने के बाद निर्माण एजेंसी ने निर्माण कार्य शुरू कर दिया। निर्माण ऐजेंसी ने बिना वन और राज्य सरकार की भूमि हस्तांतरित हुए गोमती नदी के किनारे राज्य सरकार की भूमि और वन भूमि में जेसीबी चलाकर निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। लोगों का आरोप है कि इसके अंतर्गत अवैध खनन किया जा रहा है।
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ककड़धार, कज्यूली, सिटोली, अणां, मेलाडुंगरी, तैलीहाट आदि गांवों ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर सरकार ने गोमती नदी में अवैध खनन पर पाबंदी लगा रखी है। लेकिन यहां निर्माण एजेंसी द्वारा जेसीबी से रात दिन अवैध खनन किया जा रहा है। ग्रामीणों ने डीएम से अवैध खनन की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। पेयजल निर्माण निगम बागेश्वर के ईई सीपी गंगवार ने बताया कि विभाग ने गरुड़ ग्राम समूह पेयजल योजना के वन और राजस्व भूमि की पत्रावली तैयार कर दी है। पर्यावरण मंत्रालय से अभी मंजूरी नहीं मिली है। परिसीमन मिलने की प्रत्याशा विभाग ने इसकी निविदाएं आमंत्रित कर दी थी। ब्लॉक प्रमुख भरत फर्स्वाण का कहना है कि पेयजल निर्माण निगम अवैध खनन के लिए पूर्ण जिम्मेदार है। प्रमुख का कहना है कि अवैध खनन मामले में संबंधित विभाग व निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
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गरुड़ ग्राम समूह पंपिंग योजना की वन भूमि हस्तांतरण की पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी नहीं मिली है। निर्माण एजेंसी और केपीसीएल ने बिना भूमि हस्तांतरण के वन भूमि में पाइप लाइन और पेयजल टैंक का निर्माण किया है। विभाग ने अवैध खनन के मामले में ठेकेदार और निर्माण एजेंसी के खिलाफ जुर्म काटा है। दो दिन के अंदर जुर्म की राशि जमा नहीं हुई तो विभाग ठेकेदार और निर्माण एजेंसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने को बाध्य होगा। -आरके सिंह प्रभागीय वनाधिकारी बागेश्वर
बैगर वन और राजस्व भूमि हस्तांतरण के हुए निर्माण कार्य शुुरू करना अनुचित है। योजना का निर्माण कार्य शुरू कराने से पूर्व पेयजल निर्माण निगम ने वन और राजस्व भूमि का क्लीयरेंस करा लेना चाहिए। मामले की जांच की जाएगी। एसडीएम गरुड़ से मौका मुआयना कर रिपोर्ट शीघ्र देने को कहा है।- रंजना राजगुरु डीएम बागेश्वर