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रामनगर वन प्रभाग को मिली कैट्स की मान्यता
Updated Sun, 23 Sep 2018 01:45 AM IST
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रामनगर वन प्रभाग में बाघ संरक्षण पर विदेशी मोहर लगी
- फोटो : अमर उजाला
रामनगर (नैनीताल)। बाघ संरक्षण के क्षेत्र में रामनगर वन प्रभाग विश्व स्तरीय मानकों का पालन कर रहा है। टाइगर ग्लोबल फोरम (जीटीएफ) के विश्व स्तरीय सर्वे में कंजर्वेशन एश्योर्ड टाइगर स्टैंडर्ड्स (कैट्स) ने इस पर मोहर लगा दी है। कैट्स की मान्यता उस प्रभाग को ही मिलती है, जहां बाघ संरक्षण, सुरक्षा, प्रबंधन के पुख्ता उपाय किए जा रहे हों। इससे पहले उत्तराखंड में लैंसडौन वन प्रभाग गढ़वाल को भी यह सम्मान मिल चुका है।
रामनगर वन प्रभाग में कई वर्षों से फील्ड सर्वे एवं डॉक्यूमेंटेशन की कार्यवाही चल रही थी। जीटीएफ ने इसका परीक्षण किया। परीक्षण में रामनगर वन प्रभाग जीटीएफ के सख्त 17 मानकों (स्टैंडर्ड) एवं 163 कसौटियों पर खरा उतरा। इसलिए जीटीएफ की नेशनल कमेटी ने नवंबर 2017 में इसकी स्वीकृति प्रदान की। नेशनल कमेटी के अनुमोदन के बाद रामनगर वन प्रभाग को कैट्स मान्यता के लिए इंटरनेशनल कैट्स फोरम में भेजा गया था। इंटरनेशनल कमेटी ने भी यहां बाघ संरक्षण एवं सुरक्षा के दृष्टिकोण से सभी मानकों पर खरा पाया। इसलिए जीटीएफ ने सितंबर में इस प्रभाग को कैट्स की लिस्ट में शामिल कर लिया गया है। रामनगर वन प्रभाग की डीएफओ नेहा वर्मा ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया। कहा कि कैट श्रेणी में आने के बाद इस क्षेत्र में बाघों की सुरक्षा के लिए इंटरनेशनल कम्यूनिटी से बजट मिल सकेगा। इससे प्रभाग के संसाधनों में भी बढ़ोतरी होगी।
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रामनगर वन प्रभाग में कई वर्षों से फील्ड सर्वे एवं डॉक्यूमेंटेशन की कार्यवाही चल रही थी। जीटीएफ ने इसका परीक्षण किया। परीक्षण में रामनगर वन प्रभाग जीटीएफ के सख्त 17 मानकों (स्टैंडर्ड) एवं 163 कसौटियों पर खरा उतरा। इसलिए जीटीएफ की नेशनल कमेटी ने नवंबर 2017 में इसकी स्वीकृति प्रदान की। नेशनल कमेटी के अनुमोदन के बाद रामनगर वन प्रभाग को कैट्स मान्यता के लिए इंटरनेशनल कैट्स फोरम में भेजा गया था। इंटरनेशनल कमेटी ने भी यहां बाघ संरक्षण एवं सुरक्षा के दृष्टिकोण से सभी मानकों पर खरा पाया। इसलिए जीटीएफ ने सितंबर में इस प्रभाग को कैट्स की लिस्ट में शामिल कर लिया गया है। रामनगर वन प्रभाग की डीएफओ नेहा वर्मा ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया। कहा कि कैट श्रेणी में आने के बाद इस क्षेत्र में बाघों की सुरक्षा के लिए इंटरनेशनल कम्यूनिटी से बजट मिल सकेगा। इससे प्रभाग के संसाधनों में भी बढ़ोतरी होगी।
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