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भूस्खलन के घावों के बीच ताजा हुईं 1880 की दुर्घटना
Updated Sun, 16 Sep 2018 02:00 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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नैनीताल। सरोवर नगरी में हो रहे भूस्खलन से 1880 के जख्म एक बार फिर ताजा हो गए हैं। 18 सितंबर 1880 को हुए भूस्खलन से नगर में तबाही मच गई थी। आपदा में 151 लोग मारे गए थे और भारी संख्या में लोग बेघर हो गए थे। इस आपदा में मरने वालों की आत्मा की शांति के लिए नगर में हर साल शांति सभा का आयोजन होता है। इसमें नगर के स्कूल-कालेजों के विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक प्रतिभाग करते हैं।
नगर इस समय भूस्खलन की चपेट में है। पहले लोअर माल रोड नैनी झील में समा गया और फिर बलिया नाले से सटा रईस होटल क्षेत्र नाले के आगोश में चला गया। सेंट जोंस चर्च के परेसबाइटर इंचार्ज मार्क जे. वालश और सेक्रेटरी डॉ. पीटर डी. एमनुआल ने बताया कि 1880 के भूस्खलन में जान गंवाने वाले लोगों को लेकर सेंट जोंस चर्च में 18 सितंबर को शाम पांच बजे एक प्रार्थना सभा होगी।
1880 के भूस्खलन ने बदल दिया था नैनीताल का भूगोल, मारे गए थे 151 लोग
मृतकों की आत्मा की शांति के लिए हर साल होती है प्रार्थना सभा
-क्या हुआ था 18 सितंबर 1880 को
नैनीताल के इतिहास में 1880 की त्रासदी काले अक्षरों में दर्ज है। 18 सितंबर 1880 को शनिवार का दिन था। दो दिन से लगातार बारिश नगर में जारी थी और 510 एमएम बारिश हो चुकी थी। इसके बाद मल्लीताल में भूस्खलन शुरू हो गया। भूस्खलन इतना भीषण था कि मल्लीताल में तमाम इमारतें इसकी चपेट में आकर ध्वस्त हो गई थीं। उसी दौरान मलबा आने से फ्लैट्स मैदान का निर्माण हुआ था। मरने वाले 151 लोगों में 108 भारतीय और 43 ब्रिटिश नागरिक शामिल थे। अंग्रेजों ने इस हादसे से सबक लेकर 68 नालों का निर्माण नगर में कराया था, जो आज भी नगर को बचाए हुए है।
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नगर इस समय भूस्खलन की चपेट में है। पहले लोअर माल रोड नैनी झील में समा गया और फिर बलिया नाले से सटा रईस होटल क्षेत्र नाले के आगोश में चला गया। सेंट जोंस चर्च के परेसबाइटर इंचार्ज मार्क जे. वालश और सेक्रेटरी डॉ. पीटर डी. एमनुआल ने बताया कि 1880 के भूस्खलन में जान गंवाने वाले लोगों को लेकर सेंट जोंस चर्च में 18 सितंबर को शाम पांच बजे एक प्रार्थना सभा होगी।
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मृतकों की आत्मा की शांति के लिए हर साल होती है प्रार्थना सभा
-क्या हुआ था 18 सितंबर 1880 को
नैनीताल के इतिहास में 1880 की त्रासदी काले अक्षरों में दर्ज है। 18 सितंबर 1880 को शनिवार का दिन था। दो दिन से लगातार बारिश नगर में जारी थी और 510 एमएम बारिश हो चुकी थी। इसके बाद मल्लीताल में भूस्खलन शुरू हो गया। भूस्खलन इतना भीषण था कि मल्लीताल में तमाम इमारतें इसकी चपेट में आकर ध्वस्त हो गई थीं। उसी दौरान मलबा आने से फ्लैट्स मैदान का निर्माण हुआ था। मरने वाले 151 लोगों में 108 भारतीय और 43 ब्रिटिश नागरिक शामिल थे। अंग्रेजों ने इस हादसे से सबक लेकर 68 नालों का निर्माण नगर में कराया था, जो आज भी नगर को बचाए हुए है।
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