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मुर्गे मुर्गियों को रखे जाने व ट्रांसपोर्टेशन में हो शासनादेश का पालन
Updated Wed, 15 Aug 2018 02:24 AM IST
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नैनीताल। हाईकोर्ट ने मुर्गियों को फर्मों में रखे जाने और ब्रायलर मुर्गों के ट्रांसपोर्टेशन में क्रूरतापूर्ण तरीके अपनाए जाने पर रोक लगाने संबंधी जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए केन्द्र सरकार को विधि आयोग की ओर से तैयार दिशा-निर्देशों के आधार पर नियमावली बनाए जाने व उसका अमल सुनिश्चित किए जाने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि है कि केन्द्र सरकार तीन सप्ताह के अंदर नियमों का निर्धारण करें।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा व जस्टिस मनोज तिवारी की खंडपीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता गौरी मौलेखी की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद ये निर्देश जारी किये। कोर्ट ने राज्य सरकार को भी निर्देश दिये कि वह 2013 में जारी शासनादेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराए जिसमें इनके रखे जाने व ट्रांसपोर्टेशन के संबंध में निर्देशित किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में गत वर्ष एक याचिका दायर कर कहा गया था कि प्रदेश में अंडे देने वाली मुर्गियों को आजीवन एक ए 4 आकार के कागज से भी कम मात्र 450 वर्ग सेमी के स्थान में रखा जाता है जहां वो पंख भी नहीं फैला सकतीं। इसी प्रकार ब्रायलर मुर्गों को एक से दूसरे स्थान ट्रकों में ठूंसकर, उल्टा लटकाकर ले जाया जाता है जो मानवीयता तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम दोनों के खिलाफ है। उनको फार्म में भी पर्याप्त जगह में नहीं रखा जाता है। मामले को सुनने के बाद खंडपीठ ने केन्द्र सरकार को निर्देश दिये कि वह केन्द्रीय विधि आयोग की ओर से दिए गए निर्देशों के आधार पर तीन सप्ताह में नियमावली बना कर उनका कड़ाई से अनुपालन भी सुनिश्चित कराये।
खंडपीठ ने राज्य सरकार से भी कहा है कि वह प्रदेशभर में 2013 में जारी अपने ही शासनादेश का क्रियान्वयन सुनिश्चित कराये जिसके द्वारा मुर्गे मुर्गियों को बैटरी केज (छोटे पिंजरों) में रखे जाने तथा अमानवीय तरीके से इधर उधर ले जाये जाने पर रोक लगाई गई थी।
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मुर्गे मुर्गियों को रखे जाने और ट्रांसपोर्टेशन में हो शासनादेश का पालन
केंद्र सरकार से विधि आयोग के निर्देशों पर नियम बनाने के आदेश
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा व जस्टिस मनोज तिवारी की खंडपीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता गौरी मौलेखी की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद ये निर्देश जारी किये। कोर्ट ने राज्य सरकार को भी निर्देश दिये कि वह 2013 में जारी शासनादेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराए जिसमें इनके रखे जाने व ट्रांसपोर्टेशन के संबंध में निर्देशित किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में गत वर्ष एक याचिका दायर कर कहा गया था कि प्रदेश में अंडे देने वाली मुर्गियों को आजीवन एक ए 4 आकार के कागज से भी कम मात्र 450 वर्ग सेमी के स्थान में रखा जाता है जहां वो पंख भी नहीं फैला सकतीं। इसी प्रकार ब्रायलर मुर्गों को एक से दूसरे स्थान ट्रकों में ठूंसकर, उल्टा लटकाकर ले जाया जाता है जो मानवीयता तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम दोनों के खिलाफ है। उनको फार्म में भी पर्याप्त जगह में नहीं रखा जाता है। मामले को सुनने के बाद खंडपीठ ने केन्द्र सरकार को निर्देश दिये कि वह केन्द्रीय विधि आयोग की ओर से दिए गए निर्देशों के आधार पर तीन सप्ताह में नियमावली बना कर उनका कड़ाई से अनुपालन भी सुनिश्चित कराये।
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खंडपीठ ने राज्य सरकार से भी कहा है कि वह प्रदेशभर में 2013 में जारी अपने ही शासनादेश का क्रियान्वयन सुनिश्चित कराये जिसके द्वारा मुर्गे मुर्गियों को बैटरी केज (छोटे पिंजरों) में रखे जाने तथा अमानवीय तरीके से इधर उधर ले जाये जाने पर रोक लगाई गई थी।
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मुर्गे मुर्गियों को रखे जाने और ट्रांसपोर्टेशन में हो शासनादेश का पालन
केंद्र सरकार से विधि आयोग के निर्देशों पर नियम बनाने के आदेश