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साइबर कैफे में नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म का मामला
Updated Sun, 13 May 2018 12:33 AM IST
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खटीमा। साइबर कैफे में एक नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म के मामले में एक व्यक्ति को बचाने का आरोप लगाते हुए कुछ महिलाओं ने कोतवाली में जमकर हंगामा काटा। इस दौरान एक युवती को महिला दरोगा के थप्पड़ रसीद करने पर महिलाओं का आक्रोश और अधिक भड़क गया। उन्होंने पुलिस पर अपराधियों को संरक्षण देने एवं अपराधों को बढ़ावा देने के आरोप की तोहमत मढ़ी।
एक महिला ने कोतवाली के मुख्य द्वार पर लेटकर जान देने की धमकी दे डाली। इस दौरान पुलिस को आक्रोशित महिलाओं को काबू करने में हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा। सीओ कमला बिष्ट के हस्तक्षेप पर स्थिति सामान्य बनी और आक्रोशित महिलाओं को समझाकर शांत किया गया।
पीजी कॉलेज की छात्रसंघ महासचिव प्रियम पांडे के नेतृत्व में कोतवाली पहुंची महिलाओं ने साइबर कैफे में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म पर संतोषजनक कार्रवाई न होने का मुद्दा उठाया। आरोप लगाया कि पुलिस ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले को बेहद हल्केपने से लिया। आक्रोशित महिलाओं ने कहा कि पुलिस मौके से पीड़ित किशोरी को थाने लाई लेकिन कैफे में काम करने वाले और कैफे मालिक को थाने नहीं लाई।
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महिलाओं ने आरोप लगाया कि साइबर कैफे में बिना कैफे स्वामी की सहमति से कोई कार्य नहीं हो सकता है। पुलिस ने इस प्रकरण को बेहद हल्के से लेकर कैफे में काम करने वाले एक कर्मचारी को जेल भेजकर अपने दायित्व की इतिश्री कर दी है। जबकि असली आरोपी को पुलिस संरक्षण दे रही है। इस दौरान महिलाओं की पुलिस से तीखी नोकझोंक भी हुई। छात्रसंघ महासचिव ने भी पुलिस की उदासीनता पर आक्रोश जताया है।
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एक महिला ने कोतवाली के मुख्य द्वार पर लेटकर जान देने की धमकी दे डाली। इस दौरान पुलिस को आक्रोशित महिलाओं को काबू करने में हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा। सीओ कमला बिष्ट के हस्तक्षेप पर स्थिति सामान्य बनी और आक्रोशित महिलाओं को समझाकर शांत किया गया।
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पीजी कॉलेज की छात्रसंघ महासचिव प्रियम पांडे के नेतृत्व में कोतवाली पहुंची महिलाओं ने साइबर कैफे में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म पर संतोषजनक कार्रवाई न होने का मुद्दा उठाया। आरोप लगाया कि पुलिस ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले को बेहद हल्केपने से लिया। आक्रोशित महिलाओं ने कहा कि पुलिस मौके से पीड़ित किशोरी को थाने लाई लेकिन कैफे में काम करने वाले और कैफे मालिक को थाने नहीं लाई।
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महिलाओं ने आरोप लगाया कि साइबर कैफे में बिना कैफे स्वामी की सहमति से कोई कार्य नहीं हो सकता है। पुलिस ने इस प्रकरण को बेहद हल्के से लेकर कैफे में काम करने वाले एक कर्मचारी को जेल भेजकर अपने दायित्व की इतिश्री कर दी है। जबकि असली आरोपी को पुलिस संरक्षण दे रही है। इस दौरान महिलाओं की पुलिस से तीखी नोकझोंक भी हुई। छात्रसंघ महासचिव ने भी पुलिस की उदासीनता पर आक्रोश जताया है।