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किताबों में कमीशन का खेल, कायदे कानून फेल।
Updated Mon, 16 Apr 2018 01:36 AM IST
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नैनीताल। किताबों में कमीशन के खेल ने सरकारी कायदे कानून फेल करके रख दिए हैं। सरकार की मनाही के बावजूद स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ाई जा रही हैं। ऐसे में अभिभावकों को कक्षा 11 की जीव विज्ञान की किताब के 181 रुपये की जगह पर 700 से 1500 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि निजी प्रकाशक स्कूल में मोटा कमीशन दे रहा है इसलिए एनसीईआरटी की किताबें लागू नहीं हो पा रही हैं। अब इस खेल के खिलाड़ी इतने मजबूत हो चुके हैं कि सरकारी आदेश उनके सामने बौने साबित हो रहे हैं।
सरकार ने इस सत्र से निजी प्रकाशकों की किताबों की जगह पर एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाने का आदेेश जारी किया है। आदेशों की अवहेलना करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाने की बात ही है। अपर निदेशक प्रारंभिक व माध्यमिक शिक्षा मुकुल कुमार सती ने निजी प्रकाशकों की किताबें लेने पर स्कूल की मान्यता ही रद्द तक करने की बात कही थी लेकिन उनकी यह चेतावनी हवा-हवाई साबित हो रही है। इन आदेशों का असर सरोवर नगरी में दिखाई नहीं दिया है। यहां किसी सरकारी अधिकारी ने निरीक्षण तक नहीं किया है। ऐसे में खुलेआम निजी प्रकाशकों की किताबें अभिभावकों को उपलब्ध करवाई जा रही हैं। वहीं अपर निदेशक माध्यमिक व प्रारंभिक शिक्षा मुकुल कुमार सती का कहना है कि अभी तक उन्हें शिकायत नहीं मिली है।
एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाने, बेचने का नियम हो गया धुआं
आदेशों के बावजूद बिक रही निजी प्रकाशकों की किताबें
अभिभावकों का आरोप कमीशन के चक्कर में नहीं लागू हो पा रहा नियम
जहां से शिकायतें मिल रही हैं वहां हम निरीक्षण करते हैं। जो स्कूल निरीक्षण से रह गए हैं उनका भी जल्द निरीक्षण किया जाएगा। - सिरोहिता नेगी, उप शिक्षाधिकारी।
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सरकार ने इस सत्र से निजी प्रकाशकों की किताबों की जगह पर एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाने का आदेेश जारी किया है। आदेशों की अवहेलना करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाने की बात ही है। अपर निदेशक प्रारंभिक व माध्यमिक शिक्षा मुकुल कुमार सती ने निजी प्रकाशकों की किताबें लेने पर स्कूल की मान्यता ही रद्द तक करने की बात कही थी लेकिन उनकी यह चेतावनी हवा-हवाई साबित हो रही है। इन आदेशों का असर सरोवर नगरी में दिखाई नहीं दिया है। यहां किसी सरकारी अधिकारी ने निरीक्षण तक नहीं किया है। ऐसे में खुलेआम निजी प्रकाशकों की किताबें अभिभावकों को उपलब्ध करवाई जा रही हैं। वहीं अपर निदेशक माध्यमिक व प्रारंभिक शिक्षा मुकुल कुमार सती का कहना है कि अभी तक उन्हें शिकायत नहीं मिली है।
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आदेशों के बावजूद बिक रही निजी प्रकाशकों की किताबें
अभिभावकों का आरोप कमीशन के चक्कर में नहीं लागू हो पा रहा नियम
जहां से शिकायतें मिल रही हैं वहां हम निरीक्षण करते हैं। जो स्कूल निरीक्षण से रह गए हैं उनका भी जल्द निरीक्षण किया जाएगा। - सिरोहिता नेगी, उप शिक्षाधिकारी।
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