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जिला अस्पताल से इलाज के नाम पर रेफर हो रहे गंभीर मरीज
Updated Sat, 07 Apr 2018 02:02 AM IST
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करीब तीन माह पहले लावारिस हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराई गई एक महिला अस्पताल प्रशासन और कर्मचारियों के लिए सिर दर्द बन चुकी है।
- फोटो : अमर उजाला
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नैनीताल। बीडी पांडेय जिला अस्पताल गंभीर रोगों के इलाज के नाम पर शून्य है। यहां आने वाले सभी गंभीर रोगियों को हल्द्वानी रेफर कर दिया जाता है। हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने के कारण मरीजों को बाहर भेजा जाता है। गंभीर रूप से जले, कटे, जहर खाए, रीढ़ की हड्डी में चोट के मरीजों को यहां इलाज नहीं मिलता है।
अस्पताल में एमआरआई, सीटी स्कैन समेत कई जांचों की कोई व्यवस्था नहीं है। डिजिटल एक्सरे मशीन काफी दिनों से खराब पड़ी है। ऐसे में एक्सरे भी नहीं हो रहे हैं। दवाइयों की भी कभी कभी कमी हो जाती है। हालांकि अस्पताल के मरीजों ने खाना और नाश्ता मेन्यू के हिसाब से मिलने की बात कही है।
हृदय रोग विशेषज्ञ की अस्पताल में तैनात नहीं
जहर खाए, झुलसे मरीज भी भेजे जा रहे हल्द्वानी
जल प्रदूषण की चपेट में नगर
नगर की आवोहवा में ताजगी है, लेकिन जल प्रदूषण की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। नगर में बिछी पानी की पाइप लाइनें जगह-जगह से टूटी हैं। कई बार पानी के पाइपों में मिट्टी भरने से बंद होने की शिकायतें आ चुकी हैं। ऐसे में पानी की शुद्धता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में पानी की गुणवत्ता शक के घेरे में हैं। पथरी व पेट संबंधी कई बीमारियों का कारण जल प्रदूषण को बताया जा रहा है। हालांकि जल संस्थान के ईई सुनील तिवारी का कहना है कि नमूनों की जांच के दौरान जल प्रदूषित नहीं पाया गया है।
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दौड़ना, खेलना और शाकाहार इनकी सेहत का राज
सूखाता में रहने वाले रिटायर शिक्षक 86 वर्षीय केसी पंत आज भी युवाओं की भांति दौड़ते और खेलते हैं। सुबह शाम दौड़ना, खेलना और शाकाहार उनकी सेहत का राज है। केसी पंत बताते हैं कि वह पूरी तरह से शाकाहारी हैं। यहां तक की वह लहसुन-प्याज भी नहीं खाते हैं। हमेशा से ही वह खेल के प्रति बहुत उत्साहित रहते थे। वह किसी हाल में सुबह दौड़ना नहीं भूलते। सुबह चार बजे उठने के बाद वह कई किलोमीटर तक दौड़ते हैं। बारिश के दिनों में वह छाता लगाकर टहलते हैं। युवा अवस्था में उन्होंने हॉकी, फुटबाल समेत कई खेल खेले और आज भी कभी कभार खेलते हैं। पंत कवि भी हैं। उनकी कई कविताएं पत्र-पत्रिकाओं में छप चुकी हैं।
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अस्पताल में एमआरआई, सीटी स्कैन समेत कई जांचों की कोई व्यवस्था नहीं है। डिजिटल एक्सरे मशीन काफी दिनों से खराब पड़ी है। ऐसे में एक्सरे भी नहीं हो रहे हैं। दवाइयों की भी कभी कभी कमी हो जाती है। हालांकि अस्पताल के मरीजों ने खाना और नाश्ता मेन्यू के हिसाब से मिलने की बात कही है।
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हृदय रोग विशेषज्ञ की अस्पताल में तैनात नहीं
जहर खाए, झुलसे मरीज भी भेजे जा रहे हल्द्वानी
जल प्रदूषण की चपेट में नगर
नगर की आवोहवा में ताजगी है, लेकिन जल प्रदूषण की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। नगर में बिछी पानी की पाइप लाइनें जगह-जगह से टूटी हैं। कई बार पानी के पाइपों में मिट्टी भरने से बंद होने की शिकायतें आ चुकी हैं। ऐसे में पानी की शुद्धता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में पानी की गुणवत्ता शक के घेरे में हैं। पथरी व पेट संबंधी कई बीमारियों का कारण जल प्रदूषण को बताया जा रहा है। हालांकि जल संस्थान के ईई सुनील तिवारी का कहना है कि नमूनों की जांच के दौरान जल प्रदूषित नहीं पाया गया है।
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दौड़ना, खेलना और शाकाहार इनकी सेहत का राज
सूखाता में रहने वाले रिटायर शिक्षक 86 वर्षीय केसी पंत आज भी युवाओं की भांति दौड़ते और खेलते हैं। सुबह शाम दौड़ना, खेलना और शाकाहार उनकी सेहत का राज है। केसी पंत बताते हैं कि वह पूरी तरह से शाकाहारी हैं। यहां तक की वह लहसुन-प्याज भी नहीं खाते हैं। हमेशा से ही वह खेल के प्रति बहुत उत्साहित रहते थे। वह किसी हाल में सुबह दौड़ना नहीं भूलते। सुबह चार बजे उठने के बाद वह कई किलोमीटर तक दौड़ते हैं। बारिश के दिनों में वह छाता लगाकर टहलते हैं। युवा अवस्था में उन्होंने हॉकी, फुटबाल समेत कई खेल खेले और आज भी कभी कभार खेलते हैं। पंत कवि भी हैं। उनकी कई कविताएं पत्र-पत्रिकाओं में छप चुकी हैं।