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हाइकोर्ट का समय बर्बाद करने वाले अफसरों पर एक लाख का जुर्माना
Updated Wed, 28 Mar 2018 02:29 AM IST
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high court
नैनीताल। हाइकोर्ट ने सरकार की ओर से दायर विशेष याचिका को खारिज करते हुए अपील दायर कराने वाले लोनिवि भवाली के अधिकारियों पर कोर्ट का बहुमूल्य समय बर्बाद करने के लिए एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। याचिकाकर्ता की सेवा को पेंशन में जोड़ने के आदेश भी दिए हैं।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। ग्राम अमरकपुर विकासखंड भीमताल निवासी देवीदत्त ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वह लोनिवि भवाली से 2013 में 30 वर्ष के सेवाकाल के बाद सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी इस सेवाकाल को विभाग की ओर से रिटायरमेंट के लाभों के लिए नहीं जोड़ा गया। याचिकाकर्ता ने वर्कचार्ज में की गई सेवाओं को पेंशन और अन्य देयों का लाभ देने की प्रार्थना की थी। एकलपीठ ने 22 दिसंबर 2017 को आदेश जारी कर याचिकाकर्ता की सेवाकाल को पेंशनरी बेनेफिट में जोड़े जाने का आदेश दिए थे।
एकलपीठ के इस आदेश को सरकार ने स्पेशल अपील के माध्यम से चुनौती दी थी। सरकार की तरफ से कोर्ट को अवगत कराया गया कि इससे संबंधित याचिकाएं न्यायालय की खंडपीठ में लंबित हैं। याचिकाकर्ता के अधिक्वता ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता से संबंधित मामला हबीब खान बनाम सरकार में सर्वोच्च न्यायालय पहले ही निर्णय दे चुका है जिसमें कहा गया है कि वर्कचार्ज की अवधि को पेंशनरी लाभों में जोड़ा जाय लेकिन सरकार द्वारा वर्कचार्ज सेवकों की सेवा को पेंशनरी लाभों में नहीं जोड़ा गया।
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वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। ग्राम अमरकपुर विकासखंड भीमताल निवासी देवीदत्त ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वह लोनिवि भवाली से 2013 में 30 वर्ष के सेवाकाल के बाद सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी इस सेवाकाल को विभाग की ओर से रिटायरमेंट के लाभों के लिए नहीं जोड़ा गया। याचिकाकर्ता ने वर्कचार्ज में की गई सेवाओं को पेंशन और अन्य देयों का लाभ देने की प्रार्थना की थी। एकलपीठ ने 22 दिसंबर 2017 को आदेश जारी कर याचिकाकर्ता की सेवाकाल को पेंशनरी बेनेफिट में जोड़े जाने का आदेश दिए थे।
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एकलपीठ के इस आदेश को सरकार ने स्पेशल अपील के माध्यम से चुनौती दी थी। सरकार की तरफ से कोर्ट को अवगत कराया गया कि इससे संबंधित याचिकाएं न्यायालय की खंडपीठ में लंबित हैं। याचिकाकर्ता के अधिक्वता ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता से संबंधित मामला हबीब खान बनाम सरकार में सर्वोच्च न्यायालय पहले ही निर्णय दे चुका है जिसमें कहा गया है कि वर्कचार्ज की अवधि को पेंशनरी लाभों में जोड़ा जाय लेकिन सरकार द्वारा वर्कचार्ज सेवकों की सेवा को पेंशनरी लाभों में नहीं जोड़ा गया।
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