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अमेरिका के युवक ने कुमाऊंनी युवती के संग लिए सात फेरे
Updated Tue, 13 Mar 2018 02:15 AM IST
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नैनीताल में एनआरआई की शादी
- फोटो : अमर उजाला
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नैनीताल। कुमाऊंनी संस्कृति से प्रभावित होकर अमेरिका के युवक ने सात समंदर पार से सरोवर नगरी नैनीताल में आकर हल्द्वानी की युवती से सोमवार को सात फेरे लिए। अमेरिका में उच्च पद पर आसीन युवक के साथ 40 विदेशी बाराती भी नैनीताल पहुंचे हैं। विदेशी युवक घोड़े पर सवार होकर गाजे-बाजे के साथ जब नैनीताल की सड़कों पर अपने रिश्तेदारों के साथ निकला तो आकर्षण का केंद्र बन गया।
गौजाजाली बरेली रोड हल्द्वानी निवासी सेंचुरी पेपर मिल से सीनियर मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त शशि कुमार वर्मा की पुत्री शिम्पी अमेरिका में वार्नर ब्रदर्स (फिल्म बनाने वाली कंपनी) में कार्यरत हैं। वहीं पर उनकी मुलाकात चार्ल्स स्टेनहन और उनकी पत्नी जेनेट के पुत्र जे स्टेनहन से हुई। स्टेहन जीआईएसएफ स्पेशलिस्ट हैं। मुलाकात जब प्रेम में बदली तो दोनों ने विवाह करने का फैसला लिया। दोनों ने पिछले महीने फरवरी में अमेरिका में ही एक चर्च में सादे समारोह में विवाह किया लेकिन शिम्पी की इच्छा थी कि वह कुमाऊंनी रीति रिवाज से शादी करे। इस इच्छा से उसने जे स्टेनहन को अवगत कराया। कुमाऊंनी संस्कृति से प्रभावित होकर जे स्टेनहन ने उत्तराखंड में ही विवाह करने की हामी भर दी। इसके बाद शिम्पी व जे स्टेनहन के परिजन व मित्र पहले हल्द्वानी इसके बाद नैनीताल पहुंचे। रविवार को हल्द्वानी में तिलक की रस्म हुई। सोमवार को नैनीताल में गाजे-बाजे के साथ वर-वधू ने सात फेरे लिए। इससे पूर्व धुलि अर्ध्य, जयमाल समेत अन्य रस्में भी निभाई गईं। जे स्टेनहन के परिजन नैनीताल में हुए इस विवाह समारोह से बेहद खुश हैं। साथ ही उन्हें यहां का प्राकृतिक सौंदर्य भी बहुत भाया।
अमेरिका में भी कुमाऊंनी रीति-रिवाज को रखेंगी जीवंत
दुल्हन शिम्पी का कहना है कि आज भले ही वे अमेरिका में रह रही हैं। लेकिन अपने जीवन में कुमाऊंनी संस्कृति को हमेशा जीवंत रखेंगी। साथ ही अमेरिका में बसे अप्रवासी कुमाऊंनी लोगों को भी संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के लिए प्रेरित करेंगी। पिता शशि वर्मा ने बताया कि शिम्पी से एक बड़ी बहन स्मृति और एक छोटी बहन श्वेता है। भाई राय सचिन है। अमेरिका से लड़के के साथ उनकी बहन लिली और माता-पिता व अन्य रिश्तेदार पहुंचे और शादी की रस्मों में भाग लिया।
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शादी के कार्ड पर नैनीताल का नक्शा छपवाया
शादी में पहुंचने वाले विदेशी मेहमानों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए शादी के कार्डों पर नैनीताल का नक्शा छपवाया गया। ये निमंत्रण पत्र विदेश में छपवाए गए थे। विवाह की सभी रस्में नैनीताल के पंडित मार्कंडेय जोशी ने संपन्न कराईं।
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गौजाजाली बरेली रोड हल्द्वानी निवासी सेंचुरी पेपर मिल से सीनियर मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त शशि कुमार वर्मा की पुत्री शिम्पी अमेरिका में वार्नर ब्रदर्स (फिल्म बनाने वाली कंपनी) में कार्यरत हैं। वहीं पर उनकी मुलाकात चार्ल्स स्टेनहन और उनकी पत्नी जेनेट के पुत्र जे स्टेनहन से हुई। स्टेहन जीआईएसएफ स्पेशलिस्ट हैं। मुलाकात जब प्रेम में बदली तो दोनों ने विवाह करने का फैसला लिया। दोनों ने पिछले महीने फरवरी में अमेरिका में ही एक चर्च में सादे समारोह में विवाह किया लेकिन शिम्पी की इच्छा थी कि वह कुमाऊंनी रीति रिवाज से शादी करे। इस इच्छा से उसने जे स्टेनहन को अवगत कराया। कुमाऊंनी संस्कृति से प्रभावित होकर जे स्टेनहन ने उत्तराखंड में ही विवाह करने की हामी भर दी। इसके बाद शिम्पी व जे स्टेनहन के परिजन व मित्र पहले हल्द्वानी इसके बाद नैनीताल पहुंचे। रविवार को हल्द्वानी में तिलक की रस्म हुई। सोमवार को नैनीताल में गाजे-बाजे के साथ वर-वधू ने सात फेरे लिए। इससे पूर्व धुलि अर्ध्य, जयमाल समेत अन्य रस्में भी निभाई गईं। जे स्टेनहन के परिजन नैनीताल में हुए इस विवाह समारोह से बेहद खुश हैं। साथ ही उन्हें यहां का प्राकृतिक सौंदर्य भी बहुत भाया।
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अमेरिका में भी कुमाऊंनी रीति-रिवाज को रखेंगी जीवंत
दुल्हन शिम्पी का कहना है कि आज भले ही वे अमेरिका में रह रही हैं। लेकिन अपने जीवन में कुमाऊंनी संस्कृति को हमेशा जीवंत रखेंगी। साथ ही अमेरिका में बसे अप्रवासी कुमाऊंनी लोगों को भी संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के लिए प्रेरित करेंगी। पिता शशि वर्मा ने बताया कि शिम्पी से एक बड़ी बहन स्मृति और एक छोटी बहन श्वेता है। भाई राय सचिन है। अमेरिका से लड़के के साथ उनकी बहन लिली और माता-पिता व अन्य रिश्तेदार पहुंचे और शादी की रस्मों में भाग लिया।
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शादी के कार्ड पर नैनीताल का नक्शा छपवाया
शादी में पहुंचने वाले विदेशी मेहमानों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए शादी के कार्डों पर नैनीताल का नक्शा छपवाया गया। ये निमंत्रण पत्र विदेश में छपवाए गए थे। विवाह की सभी रस्में नैनीताल के पंडित मार्कंडेय जोशी ने संपन्न कराईं।