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80 हजार क्विंटल चावल बदला गया
Updated Sat, 13 Jan 2018 02:38 AM IST
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Plastic Rice test
- फोटो : File Photo
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हल्द्वानी। आठ माह में आखिर 80 हजार क्विंटल बीआरएल घोषित चावल बदल ही गया। इस चावल को बदलने के लिए विभागीय अधिकारियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। पूर्व आरएफसी ने 30 हजार क्विंटल चावल बदलने में ही पांच माह लगा दिए थे।
अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की ओर से कमेटी बना कर चावल के सैंपल लिए गए थे। इसमें से 39 चट्टे फेल हो गए थे। आरएफसी ने छंटाई के लिए एक टीम का गठन किया था। टीम की कार्यप्रणाली और पुराने आरएफसी ने मिलों को बचाने का भरसक प्रयास किए। पांच माह में मात्र 30 हजार क्विंटल चावल ही बदल पाया। कर्मचारियों और मिलों को बचाने के लिए चावल बदलने में समय पर समय दिया जाता रहा। चावल नहीं बदलने से परेशान शासन ने ललित मोहन रयाल को संभागीय खाद्य नियंत्रक की जिम्मेदारी सौंपी। तीन महीने बाद 50 हजार क्विंटल चावल बदला गया।
पूर्व आरएफसी ने मिलों को बचने के लिए दिया पूरा समय
तीन माह में 50 हजार क्विंटल चावल बदला
1200 क्विंटल चावल कर्मचारियों ने बदला
हल्द्वानी। मिलों की ओर से चावल बदलने से मना करने के बाद आरएफसी ललित मोहन रयाल ने चावल को नीलाम करने की कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए। चावल नीलाम होने की डर से गोदाम में उस समय तैनात कर्मचारियों ने आपस में मिलकर 1200 क्विंटल चावल बदला।
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सिर्फ चार कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई
हल्द्वानी। खराब चावल लगाने वाले कर्मचारियों-अधिकारियों और चावल मिलों को अभी तक विभाग बख्शता आ रहा है। अब चावल बदलने के बाद साफ हो गया है कि मिलों और अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से चावल का खेल खेला गया।
नियमों की बात करें तो गोदाम में लगे चावल की जांच मिल पर जाकर वरिष्ठ विपणन निरीक्षक या विपणन निरीक्षक करता है। वहां से क्वालिटी चालान में लिखकर दिया जाना चाहिए। गोदाम में चावल पहुंचने पर गोदाम का वरिष्ठ विपणन निरीक्षक या विपणन निरीक्षक इसकी क्वालिटी की जांच करता है। गोदाम में चावल लगने के दौरान राज्य भंडारण निगम का गोदाम में तैनात तकनीकी स्टाफ इसकी जांच करता है। उसके बाद चावल गोदाम में लगाया जाना चाहिए। गोदाम में भंडारित चावल की जांच डिप्टी आरएमओ और आरएफसी को भी करनी होती है। वहीं एफसीआई की टीम को गोदाम में लगे चावल की रेंडम जांच करना चाहिए। खराब चावल आने पर मिलों को हर हाल में इसे वापस लेना होगा। नियमानुसार इस खराब चावल लगाने के दोषी ये सभी अधिकारी और मिलें हैं। इसके बाद विभाग की ओर से सिर्फ चार कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
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अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की ओर से कमेटी बना कर चावल के सैंपल लिए गए थे। इसमें से 39 चट्टे फेल हो गए थे। आरएफसी ने छंटाई के लिए एक टीम का गठन किया था। टीम की कार्यप्रणाली और पुराने आरएफसी ने मिलों को बचाने का भरसक प्रयास किए। पांच माह में मात्र 30 हजार क्विंटल चावल ही बदल पाया। कर्मचारियों और मिलों को बचाने के लिए चावल बदलने में समय पर समय दिया जाता रहा। चावल नहीं बदलने से परेशान शासन ने ललित मोहन रयाल को संभागीय खाद्य नियंत्रक की जिम्मेदारी सौंपी। तीन महीने बाद 50 हजार क्विंटल चावल बदला गया।
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पूर्व आरएफसी ने मिलों को बचने के लिए दिया पूरा समय
तीन माह में 50 हजार क्विंटल चावल बदला
1200 क्विंटल चावल कर्मचारियों ने बदला
हल्द्वानी। मिलों की ओर से चावल बदलने से मना करने के बाद आरएफसी ललित मोहन रयाल ने चावल को नीलाम करने की कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए। चावल नीलाम होने की डर से गोदाम में उस समय तैनात कर्मचारियों ने आपस में मिलकर 1200 क्विंटल चावल बदला।
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सिर्फ चार कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई
हल्द्वानी। खराब चावल लगाने वाले कर्मचारियों-अधिकारियों और चावल मिलों को अभी तक विभाग बख्शता आ रहा है। अब चावल बदलने के बाद साफ हो गया है कि मिलों और अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से चावल का खेल खेला गया।
नियमों की बात करें तो गोदाम में लगे चावल की जांच मिल पर जाकर वरिष्ठ विपणन निरीक्षक या विपणन निरीक्षक करता है। वहां से क्वालिटी चालान में लिखकर दिया जाना चाहिए। गोदाम में चावल पहुंचने पर गोदाम का वरिष्ठ विपणन निरीक्षक या विपणन निरीक्षक इसकी क्वालिटी की जांच करता है। गोदाम में चावल लगने के दौरान राज्य भंडारण निगम का गोदाम में तैनात तकनीकी स्टाफ इसकी जांच करता है। उसके बाद चावल गोदाम में लगाया जाना चाहिए। गोदाम में भंडारित चावल की जांच डिप्टी आरएमओ और आरएफसी को भी करनी होती है। वहीं एफसीआई की टीम को गोदाम में लगे चावल की रेंडम जांच करना चाहिए। खराब चावल आने पर मिलों को हर हाल में इसे वापस लेना होगा। नियमानुसार इस खराब चावल लगाने के दोषी ये सभी अधिकारी और मिलें हैं। इसके बाद विभाग की ओर से सिर्फ चार कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।