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जवानी हम लूटा देगें सुनो इस देश की खातिर मगर अपने तिरंगे को झुकने नही देगें
Updated Mon, 23 Oct 2017 12:27 AM IST
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बाजपुर। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से आयोजित कवि सम्मेल में कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाईं। इस दौरान नन्हीं काव्य जैन ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का दिल जीत लिया।
रविवार की शाम इंटर कालेज परिसर में आयोजित कवि सम्मेलन का शुभारंभ विद्यालय के प्रबंधक वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र शर्मा, डा. नरेंद्र खत्री ने दीप प्रज्जवलित कर किया। संचालन स्थानीय कवि सुरेंद्र जैन और तकी बाजपुरी ने किया। विवेक चौहान ने कहा, ‘जवानी हम लुटा देंगे सुनो इस देश की खातिर, मगर अपने तिरंगे को कभी झुकने नहीं देंगे।’
रवि उप्रेती ने कहा, ‘किसी बेटे को क्या होती है मां क्या-क्या नहीं होती, इसे बस वो समझता है जिसकी मां नहीं होती’। चंदौसी से आए नसीम हाशमी ने कहा, ‘गुजरती रात है घर को चलें मां जागती होगी हमारे वास्ते, वरना किवाड़ कौ खोलेगा’। तकी बाजपुरी ने कहा, ‘जिस दिन से उसे मेरी जरूरत नहीं रही, उस शख्स को फिर मुझसे मुहब्बत नहीं रही’।
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ममता सिंह ने कहा, ‘अब कहां है श्याम वो द्रोपदी कहां, नर के जगत में नारी को आराम कहां’। राजेश पाठक ने कहा, ‘तुझे जब याद करता हूं जमाना भूल जाता हूं, मैं मरहम अपने जख्मों पर लगाना भूल जाता हूं’।
कवि डा. ओम प्रकाश शंकर मिश्र ने कहा, ‘बहुत लोग चेहरों पर नकाबों को लगाए हैं, किसी की मौत पर भी यह हिसाबों को लगाए हैं’। इस मौके पर भाजपा नेता राजेश कुमार, विकास गुप्ता, विजय गर्ग, गरिमा अग्रवाल आदि थे।
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रविवार की शाम इंटर कालेज परिसर में आयोजित कवि सम्मेलन का शुभारंभ विद्यालय के प्रबंधक वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र शर्मा, डा. नरेंद्र खत्री ने दीप प्रज्जवलित कर किया। संचालन स्थानीय कवि सुरेंद्र जैन और तकी बाजपुरी ने किया। विवेक चौहान ने कहा, ‘जवानी हम लुटा देंगे सुनो इस देश की खातिर, मगर अपने तिरंगे को कभी झुकने नहीं देंगे।’
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रवि उप्रेती ने कहा, ‘किसी बेटे को क्या होती है मां क्या-क्या नहीं होती, इसे बस वो समझता है जिसकी मां नहीं होती’। चंदौसी से आए नसीम हाशमी ने कहा, ‘गुजरती रात है घर को चलें मां जागती होगी हमारे वास्ते, वरना किवाड़ कौ खोलेगा’। तकी बाजपुरी ने कहा, ‘जिस दिन से उसे मेरी जरूरत नहीं रही, उस शख्स को फिर मुझसे मुहब्बत नहीं रही’।
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ममता सिंह ने कहा, ‘अब कहां है श्याम वो द्रोपदी कहां, नर के जगत में नारी को आराम कहां’। राजेश पाठक ने कहा, ‘तुझे जब याद करता हूं जमाना भूल जाता हूं, मैं मरहम अपने जख्मों पर लगाना भूल जाता हूं’।
कवि डा. ओम प्रकाश शंकर मिश्र ने कहा, ‘बहुत लोग चेहरों पर नकाबों को लगाए हैं, किसी की मौत पर भी यह हिसाबों को लगाए हैं’। इस मौके पर भाजपा नेता राजेश कुमार, विकास गुप्ता, विजय गर्ग, गरिमा अग्रवाल आदि थे।