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52 जातियों को शिल्पकार घोषित करने पर सरकार का जवाब तलब
Updated Sun, 08 Oct 2017 02:31 AM IST
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नैनीताल। उच्च न्यायालय ने 52 जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने से संबंधित मामले में प्रदेश सरकार का जवाब तलब किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी।
16 दिसंबर 2013 को प्रदेश में 52 जातियों को अनुसूचित जाति (शिल्पकार) में शामिल करने के लिए अधिसूचित किया गया था। गढ़वाल राजपूत सभा ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर इस अधिसूचना को चुनौती दी थी। याची का कहना था कि अनुसूचित घोषित की गई कुछ जातियां अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य जातियों में शामिल थीं। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुरूप और संविधान के अनुच्छेद 341 व 342 के अनुसार अनुसूचित जाति घोषित करने का अधिकार राज्य सरकार को नहीं है। यह अधिकार सिर्फ भारत की संसद को है। भारत के राष्ट्रपति की ओर से ही इस तरह की अधिसूचना जारी की जा सकती है। याची के मुताबिक सूचना के अधिकार में मांगी गई सूचना में प्रदेश सरकार ने स्वयं 23 जुलाई 2015 को यह कहा कि अनुसूचित जाति का दर्जा देने का अधिकार राज्य सरकार को नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अधिसूचना जारी होने के बाद बहुत लोगों को नौकरी व अन्य लाभ प्राप्त हुए होंगे। खंडपीठ ने इस संबंध में प्रदेश सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिये।
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16 दिसंबर 2013 को प्रदेश में 52 जातियों को अनुसूचित जाति (शिल्पकार) में शामिल करने के लिए अधिसूचित किया गया था। गढ़वाल राजपूत सभा ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर इस अधिसूचना को चुनौती दी थी। याची का कहना था कि अनुसूचित घोषित की गई कुछ जातियां अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य जातियों में शामिल थीं। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुरूप और संविधान के अनुच्छेद 341 व 342 के अनुसार अनुसूचित जाति घोषित करने का अधिकार राज्य सरकार को नहीं है। यह अधिकार सिर्फ भारत की संसद को है। भारत के राष्ट्रपति की ओर से ही इस तरह की अधिसूचना जारी की जा सकती है। याची के मुताबिक सूचना के अधिकार में मांगी गई सूचना में प्रदेश सरकार ने स्वयं 23 जुलाई 2015 को यह कहा कि अनुसूचित जाति का दर्जा देने का अधिकार राज्य सरकार को नहीं है।
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मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अधिसूचना जारी होने के बाद बहुत लोगों को नौकरी व अन्य लाभ प्राप्त हुए होंगे। खंडपीठ ने इस संबंध में प्रदेश सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिये।
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