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टिहरी बांध विस्थापितों के सरकारी भूमि कब्जाने के मामले में मांगा जवाब
Updated Thu, 27 Jul 2017 02:26 AM IST
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नैनीताल। हाइकोर्ट ने टिहरी बांध विस्थापितों की ओर से सरकारी जमीन पर कब्जा करने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सरकार को 31 जुलाई तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। नई टिहरी निवासी भवान सिंह ने हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सरकार ने टिहरी डैम बनने के बाद वहां रह रहे लोगों को नई टिहरी में विस्थापित कर दिया था। इन लोगों की ओर से विस्थापित जमीन के अलावा सरकार की जमीन पर भी कब्जा कर लिया गया। याचिका में कहा कि वर्ष 2016 में 71 लोगों के खिलाफ सरकारी जमीन कब्जाने की भी पुष्टि की गई थी, लेकिन सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण कार्रवाई नहीं की गई। याचिका में कहा कि इसकी शिकायत सरकार से भी की गई थी। पक्षों की सुनवाई के बाद हाइकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को 31 जुलाई तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए। ब्यूरो
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मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। नई टिहरी निवासी भवान सिंह ने हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सरकार ने टिहरी डैम बनने के बाद वहां रह रहे लोगों को नई टिहरी में विस्थापित कर दिया था। इन लोगों की ओर से विस्थापित जमीन के अलावा सरकार की जमीन पर भी कब्जा कर लिया गया। याचिका में कहा कि वर्ष 2016 में 71 लोगों के खिलाफ सरकारी जमीन कब्जाने की भी पुष्टि की गई थी, लेकिन सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण कार्रवाई नहीं की गई। याचिका में कहा कि इसकी शिकायत सरकार से भी की गई थी। पक्षों की सुनवाई के बाद हाइकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को 31 जुलाई तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए। ब्यूरो
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