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आवास में धांधली का सूचना मांगना पड़ा महंगा

Tue, 27 Jun 2017 01:11 AM IST
Updated Tue, 27 Jun 2017 01:11 AM IST
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आवास में धांधली का सूचना मांगना पड़ा महंगा
आवास में धांधली की सूचना मांगना महंगा पड़ा
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नानकमत्ता/सितारगंज। मटिहा ग्रामसभा में आवासों के आवंटन में धांधली की सूचना मांगना उपप्रधान को महंगा पड़ गया। उपप्रधान ने सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत ग्रामसभा के विकास की सूचना मांगी तो पंचायत के अधिकतर सदस्य बिफर पड़े और फिर उन्होंने उपप्रधान के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया। अंतत: उपप्रधान को अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग से हार का सामना कर पद से हटना पड़ा, जो संभवत: जिले का पहला मामला है।

प्रदेश में वर्ष 2014 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हुए थे। इसमें सितारगंज ब्लॉक के ग्राम मटिहा में पिछड़ा वर्ग की आरक्षित सीट पर निर्भान सिंह प्रधान चुने गए। इसके बाद नौ मेंबरों में से वार्ड मेंबर दिलबाग सिंह निर्विरोध उपप्रधान बने। ग्राम पंचायत की खुली बैठकों में सड़क, नाले निर्माण, पेयजल, बिजली जैसी मूलभूत समस्याओं के साथ आवास अनुदान के मुद्दे उठे। इन पर पंचायत के अधिकतर सदस्यों ने एकराय होकर आवास आवंटन की सूची पारित कर दी और जब आवास बांटे गए तो उनमें धांधली हो गई। उपप्रधान का कहना था कि पात्रों को आवास देने के बजाय विदेश में रहने वाले लोगों के नाम पर आवास आवंटित होने की बात पर आपत्ति लगा दी और आरटीआई के तहत आवंटित आवासों की सूचना मांगी। वर्ष 2014 से लेकर दो जून 2017 तक मनरेगा के कार्यों के मामलों में धांधली की भी सूचना मांगी। आरोप है कि इसका पता चलते ही ग्राम प्रधान निर्भान उपप्रधान के खिलाफ हो गए और ग्राम पंचायत सदस्यों के साथ मिलकर नौ मई को जिला पंचायत राज अधिकारी विद्या सिंह सोमनाल के समक्ष उपप्रधान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव रख दिया। जिला प्रशासन ने भी मामले को गंभीर मानते हुए अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान की तिथि तय कर दी और उसी क्रम में रविवार को मतदान हुआ। इसमें नौ में से आठ सदस्यों ने वोट डाले और इनमें सात सदस्यों ने उपप्रधान के खिलाफ मतदान किया था। इनमें गीता राणा, संजीता राणा, दिनेश सिंह, नर सिंह, गौतम रिखी, लौंगश्री, गुरदयाल सिंह शामिल थे। मतदान में भाग न लेने वाले सदस्य बगीचा सिंह ने बताया कि वह और उपप्रधान धांधली का लगातार विरोध कर रहे थे। इसका खामियाजा उपप्रधान को भुगतना पड़ा। वहीं, विपक्षी सदस्य मामले में मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं। ग्रामीण भी बोले कि यह मामला राजनीति की भेंट चढ़ा है।
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गांव के विकास की जानकारी को लगाई आरटीआई पर पंचायत सदस्य बिफरे
जिले में अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग का पहला मामला
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