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बेमानी साबित हुई पंचायतों को अधिकार संपन्न बनाने की बात

Tue, 24 Apr 2018 02:12 AM IST
Updated Tue, 24 Apr 2018 02:12 AM IST
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बेमानी साबित हुई पंचायतों को अधिकार संपन्न बनाने की बात
बागपत में बैठक को संबोधित करते भाकियू अध्यक्ष प्रताप गुर्जर। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
भीमताल ब्लॉक की ग्रामसभा नौल
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यहां नौल, साहखोला, बिजरौली तीन राजस्व गांव हैं। कुल आबादी 1500 है जबकि मतदाता केवल 450 हैं। जनसंख्या का बढ़ता बोझ बिजली, पानी, सफाई, स्वास्थ्य, गूल निर्माण, संपर्क मार्गों की मरम्मत जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। बावजूद इसके पंचायत को साल में केवल 2.45 लाख रुपये ही राज्य वित्त, 14वें वित्त से मिलते हैं।

पंचायतों को अधिकार संपन्न बनाने के लिए केंद्र ने वर्ष 1992 में 74वां संविधान संशोधन कर आम जन से जुड़े 29 विभागों को पंचायतों के अधीन तो किया लेकिन इसे अमलीजामा नहीं पहनाया गया। न तो विभाग पंचायतों के अधीन हुए और न ही विभागीय अधिकारियों ने पंचायतों की खुली बैठकों में हिस्सा लेने की जरूरत महसूस की। नतीजा यह रहा कि समस्याओं से जूझ रही पंचायतें आज भी अधिकार विहीन हैं। चंद्रेश पांडे की रिपोर्ट
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हल्द्वानी। ग्रामसभा नौल के प्रधान राहुल जोशी कहते हैं कि अब तक ग्राम पंचायत की तीन बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन कोई अधिकारी खुली बैठक में नहीं आया। जब भी अधिकारियों से समस्याएं हल कराने की मांग की तो विभागों के पास बजट की समस्या आ गई।
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खुद के प्रयासों से नौल बिजरौली पेयजल योजना के लिए 1.77 करोड़ रुपये स्वीकृत कराए जिसमें से 30 फीसदी राशि अवमुक्त हो चुकी है। प्रधानों को मिलने वाले मानदेय से ग्राम पंचायत में दो कंप्यूटर, कई सोलर लाइटें भी लगा चुके हैं। गांव के व्यावसायिक बोरिंग से एक एक कनेक्शन ग्रामीणों के लिए लेते हुए पानी के स्टोरेज के लिए टैंक बनवाए हैं और 40 परिवारों तक पेयजल लाइन भी बिछा चुके हैं।

पंचायतों को दिए गए प्रमुख अधिकार
हल्द्वानी। कृषि एवं कृषि विस्तार, भू सुधार एवं भूमि संरक्षण, जल प्रबंधन, लघु सिंचाई एवं जल संग्रहण क्षेत्र का विकास, पशुपालन, डेयरी, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन, सामाजिक वानिकी, सूक्ष्म वन उपज, ग्रामीण आवास, पेयजल, प्राथमिक शिक्षा, प्राथमिक स्वास्थ्य आदि।

सरकार ने प्रधानों को मिलने वाली राज्य वित्त में भी कटौती कर दी है। पिछले वर्ष अधिकारों की मांग को लेकर देहरादून में आंदोलन के बाद सरकार ने जनवरी में कैबिनेट में पंचायती राज एक्ट लाकर प्रधानों को अधिकार दिलाने की बात कही थी, लेकिन कुछ नहीं किया गया है।
- तारा सिंह बिष्ट, प्रदेश संयुक्त मंत्री ग्राम प्रधान संगठन।

उत्तराखंड में आज भी उत्तर प्रदेश का पंचायत एक्ट लागू है। प्रदेश सरकार ने पंचायत एक्ट ही लागू नहीं किया गया है। पंचायती राज एक्ट में तो प्रधानों के अधीन 29 विभाग किए गए हैं लेकिन ग्राम पंचायत की खुली बैठक में एक भी विभाग का अधिकारी मौजूद नहीं रहता है।
- कुंदन सिंह बोहरा, जिलाध्यक्ष ग्राम प्रधान संगठन।

ग्राम पंचायतों को जनसंख्या के आधार पर राशि का आवंटन होता है। अनुसूचित जाति, जनजाति के ग्राम पंचायतों को अलग से राशि दी जाती है। प्रदेश में ग्राम पंचायतों को मानकों के अनुसार राशि मिलना तो दूर पहले से मिली राशि में कटौती की जा रही है।

- गोपाल राम, ग्राम प्रधान, जगतपुर गौलापार।

ग्राम पंचायतों को जनसंख्या, क्षेत्रफल, वहां की भौगोलिक विषमता के हिसाब से राज्य वित्त, 14वें वित्त से राशि दी जाती है। इस धनराशि से ग्राम पंचायतें मूलभूत समस्याओं का समाधान कराती हैं।
- अतुल प्रताप सिंह जिला पंचायत राज अधिकारी नैनीताल

12 तोक और तीन राजस्व गांव और सालाना बजट मात्र 2.45 लाख
पंचायत दिवस पर विशेष
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