{"_id":"5c16b2eebdec2253b332b968","slug":"131544991470-nainital-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुसाफिरों को नहीं भा रहा छुक छुक रेल गाड़ी का सफर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुसाफिरों को नहीं भा रहा छुक छुक रेल गाड़ी का सफर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हल्द्वानी। काठगोदाम से ट्रेनों से जाने वाले मुसाफिरों की संख्या में लगातार गिरावट आई है। वहीं रेलवे को होने वाली आय भी प्रभावित हुई है।
कुमाऊं में प्रवेश करने के लिए काठगोदाम रेलवे स्टेशन आखिर रेलवे स्टेशन है। पहाड़ और मैदान के लिए मुसाफिरों का सफर इसी स्टेशन से होता है लेकिन मुसाफिरों का रेलवे से सफर करने में मोहभंग हुआ है। रेलवे के आंकड़ों की गौर करें तो तीन सालों में सिर्फ एक बार ही 50 हजार से ज्यादा मुसाफिरों ने सफर किया। पिछले साल के मुकाबले इस साल मुसाफिरों की संख्या में तकरीबन 10,174 यात्रियों की संख्या कम हुई है। वहीं आय में भी 5,93,913 रुपये की आय कम हुई है।
मुसाफिरों को नहीं भा रहा छुक छुक गाड़ी का सफर
काठगोदाम से जाने वाले मुसाफिरों की संख्या में 19.40 फीसदी की गिरावट
साल मुसाफिरों की संख्या आय
2016-17 48,062 1,05,50,215
2017-18 52,438 87,99,300
2018-19 42,264 82,05,387
इस वजह से ट्रेन के सफर से मोहभंग
- ट्रेनों में रिजर्वेशन को लेेकर मारामारी
- सामान्य बोगियां में भारी भीड़ में सीट न मिलने पर भी यात्री करते हैं परहेज
- पिछले चार-पांच सालों में हाइवे के निर्माण से सड़क से सफर में बचता है समय
- हर रूट के लिए नहीं है ट्रेनें, लंबे रूट की सिर्फ साप्ताहिक हैं ट्रेनें
रेलवे का किराया दूसरे सेवाओं से कम है। यहां सुविधाएं भी लगातार अपग्रेड की जा रही हैं। ट्रेनों की समयबद्धता पर भी जोर है। फिर भी यदि यात्री कम हो रहे हैं तो इसके कारणों की वजह देखकर मंथन किया जएगा।
-राजेंद्र सिंह, सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी, इज्जतनगर मंडल बरेली
विज्ञापन
कुमाऊं में प्रवेश करने के लिए काठगोदाम रेलवे स्टेशन आखिर रेलवे स्टेशन है। पहाड़ और मैदान के लिए मुसाफिरों का सफर इसी स्टेशन से होता है लेकिन मुसाफिरों का रेलवे से सफर करने में मोहभंग हुआ है। रेलवे के आंकड़ों की गौर करें तो तीन सालों में सिर्फ एक बार ही 50 हजार से ज्यादा मुसाफिरों ने सफर किया। पिछले साल के मुकाबले इस साल मुसाफिरों की संख्या में तकरीबन 10,174 यात्रियों की संख्या कम हुई है। वहीं आय में भी 5,93,913 रुपये की आय कम हुई है।
मुसाफिरों को नहीं भा रहा छुक छुक गाड़ी का सफर
काठगोदाम से जाने वाले मुसाफिरों की संख्या में 19.40 फीसदी की गिरावट
साल मुसाफिरों की संख्या आय
2016-17 48,062 1,05,50,215
2017-18 52,438 87,99,300
2018-19 42,264 82,05,387
इस वजह से ट्रेन के सफर से मोहभंग
- ट्रेनों में रिजर्वेशन को लेेकर मारामारी
- सामान्य बोगियां में भारी भीड़ में सीट न मिलने पर भी यात्री करते हैं परहेज
- पिछले चार-पांच सालों में हाइवे के निर्माण से सड़क से सफर में बचता है समय
- हर रूट के लिए नहीं है ट्रेनें, लंबे रूट की सिर्फ साप्ताहिक हैं ट्रेनें
रेलवे का किराया दूसरे सेवाओं से कम है। यहां सुविधाएं भी लगातार अपग्रेड की जा रही हैं। ट्रेनों की समयबद्धता पर भी जोर है। फिर भी यदि यात्री कम हो रहे हैं तो इसके कारणों की वजह देखकर मंथन किया जएगा।
विज्ञापन
-राजेंद्र सिंह, सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी, इज्जतनगर मंडल बरेली