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नाबालिगों के अपहरण में आरोपी को पांच साल की सजा
Updated Sat, 18 Aug 2018 01:24 AM IST
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हल्द्वानी। लालकुआं में दो नाबालिग लड़कियों के अपहरण के मामले में विशेष न्यायाधीश मनीष पांडे की अदालत ने आरोपी को पांच साल की सजा के साथ दस हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अदालत ने सुनवाई के बाद पिता को बेटी के साथ दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया।
सहायक अभियोजन अधिकारी नरेंद्र सिंह नेगी के अनुसार लालकुआं थाने में पिता ने 19 मार्च 17 को गुमशुदगी दर्ज कराई कि उनकी 15 और 12 साल की दो बेटियां लापता हैं। पुलिस ने पांच मई 17 को हल्द्वानी रोडवेज परिसर से लापता एक किशोरी को बदायूं जिले के नवादन फुलहरा मुसाझोक निवासी गजेंद्र के साथ बरामद कर लिया। पूछताछ से पता चला कि आरोपी गजेंद्र ने दूसरी लड़की को बरेली जिले के रंपुरा निवासी रिश्तेदार के घर भेज दिया था। पुलिस ने इस मामले में धारा 376(2), 363,366 के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपी गजेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। दूसरी लड़की को पुलिस ने बरेली से बरामद किया। एक लड़की ने अपने पिता पर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया। इस मुकदमे की विवेचक उपनिरीक्षक माया बिष्ट ने चार्जशीट दाखिल की। सुनवाई के दौरान पिता को दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया। चूंकि पीड़िता ने दुष्कर्म से इनकार कर दिया था। इस कारण आरोपी गजेंद्र को अपहरण का दोषी पाया गया। अदालत ने धारा 363 के तहत तीन साल की सजा के साथ पांच हजार रुपये अर्थदंड, धारा 366 के तहत पांच साल की सजा और दस हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
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सहायक अभियोजन अधिकारी नरेंद्र सिंह नेगी के अनुसार लालकुआं थाने में पिता ने 19 मार्च 17 को गुमशुदगी दर्ज कराई कि उनकी 15 और 12 साल की दो बेटियां लापता हैं। पुलिस ने पांच मई 17 को हल्द्वानी रोडवेज परिसर से लापता एक किशोरी को बदायूं जिले के नवादन फुलहरा मुसाझोक निवासी गजेंद्र के साथ बरामद कर लिया। पूछताछ से पता चला कि आरोपी गजेंद्र ने दूसरी लड़की को बरेली जिले के रंपुरा निवासी रिश्तेदार के घर भेज दिया था। पुलिस ने इस मामले में धारा 376(2), 363,366 के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपी गजेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। दूसरी लड़की को पुलिस ने बरेली से बरामद किया। एक लड़की ने अपने पिता पर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया। इस मुकदमे की विवेचक उपनिरीक्षक माया बिष्ट ने चार्जशीट दाखिल की। सुनवाई के दौरान पिता को दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया। चूंकि पीड़िता ने दुष्कर्म से इनकार कर दिया था। इस कारण आरोपी गजेंद्र को अपहरण का दोषी पाया गया। अदालत ने धारा 363 के तहत तीन साल की सजा के साथ पांच हजार रुपये अर्थदंड, धारा 366 के तहत पांच साल की सजा और दस हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
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