{"_id":"5b0482854f1c1b5c798b5c62","slug":"131527022213-nainital-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"60 वार्ड में होंगे चुनाव, नए वार्ड में हरकत हुई तेज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
60 वार्ड में होंगे चुनाव, नए वार्ड में हरकत हुई तेज
Updated Wed, 23 May 2018 02:20 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हल्द्वानी। परिसीमन पर हाई कोर्ट का फैसला आते ही नगर निगम हल्द्वानी की वार्ड संख्या 25 से बढ़कर दोबारा 60 हो गयी हैं। इस फैसले से भाजपाइयों के चेहरे खिल गए हैं। हालांकि, पार्टी को अब मेयर पद पर कई और दावों का सामना भी करना होगा। कांग्रेसी खेमे का मायूस होना भी तय है। कांग्रेस को अब दोबारा मेयर के दावेदार के लिए गांव की ओर रुख करना पड़ेगा।
पूर्व में कोर्ट की एकलपीठ ने परिसीमन पर रोक लगा दी थी। इससे नगर निगम में 60 की जगह 25 वार्ड में चुनाव होने के आसार बने थे। इस आदेश के बाद भाजपा के खेमे में मायूसी छा गई थी। इसका कारण भाजपा का 25 वार्ड में कमजोर होना बताया जा रहा था। भाजपा ने निगम चुनाव में अपनी रणनीति का आधार नए जुड़े वार्डों को बनाया था। माना जाता है कि गांव में भाजपा का जनाधार कांग्रेस से बेहतर है। इसलिए भाजपा इसे किसी भी सूरत में खोना नहीं चाहती थी। एकलपीठ के आदेश के खारिज होने के बाद भाजपा के खेमे में खुशी छा गई है।
भाजपा पर अब अपनी पुरानी रणनीति पर काम करने की तैयारी में हैं। हालांकि निगम में कई गांवों के शामिल होने से भाजपा में दावेदारों की संख्या बढ़ना तय है। भाजपा का ही दूसरा खेमा दोबारा मेयर के टिकट के लिए जोर लगाने की कोशिश कर सकता है। उधर कांग्रेस के सामने अब दोबारा इसे पार पाने के लिए चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। कांग्रेस निगम में शामिल हुए ग्रामीण क्षेत्र से मजबूत प्रत्याशी की तलाश करेगी।
विज्ञापन
भाजपाइयों के चेहरों खिले लेकिन बढ़ गई है अंदरूनी खींचतान की आशंका
-कांग्रेस के सामने दोबारा खड़ी हुई चुनौती
- गांव से ढूंढना होगा प्रत्याशी, फिर करनी होगी माथापच्ची
-भाजपा में दावेदारों की संख्या का बढ़ना भी हो गया है तय
विज्ञापन
पूर्व में कोर्ट की एकलपीठ ने परिसीमन पर रोक लगा दी थी। इससे नगर निगम में 60 की जगह 25 वार्ड में चुनाव होने के आसार बने थे। इस आदेश के बाद भाजपा के खेमे में मायूसी छा गई थी। इसका कारण भाजपा का 25 वार्ड में कमजोर होना बताया जा रहा था। भाजपा ने निगम चुनाव में अपनी रणनीति का आधार नए जुड़े वार्डों को बनाया था। माना जाता है कि गांव में भाजपा का जनाधार कांग्रेस से बेहतर है। इसलिए भाजपा इसे किसी भी सूरत में खोना नहीं चाहती थी। एकलपीठ के आदेश के खारिज होने के बाद भाजपा के खेमे में खुशी छा गई है।
विज्ञापन
भाजपा पर अब अपनी पुरानी रणनीति पर काम करने की तैयारी में हैं। हालांकि निगम में कई गांवों के शामिल होने से भाजपा में दावेदारों की संख्या बढ़ना तय है। भाजपा का ही दूसरा खेमा दोबारा मेयर के टिकट के लिए जोर लगाने की कोशिश कर सकता है। उधर कांग्रेस के सामने अब दोबारा इसे पार पाने के लिए चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। कांग्रेस निगम में शामिल हुए ग्रामीण क्षेत्र से मजबूत प्रत्याशी की तलाश करेगी।
विज्ञापन
भाजपाइयों के चेहरों खिले लेकिन बढ़ गई है अंदरूनी खींचतान की आशंका
-कांग्रेस के सामने दोबारा खड़ी हुई चुनौती
- गांव से ढूंढना होगा प्रत्याशी, फिर करनी होगी माथापच्ची
-भाजपा में दावेदारों की संख्या का बढ़ना भी हो गया है तय