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गेहूं की बर्बादी के बाद भी हजारों काश्तकारों को बीमा लाभ नहीं
Updated Fri, 13 Apr 2018 01:45 AM IST
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Agriculture
- फोटो : DEMO PHOTO
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हल्द्वानी। बारिश के कारण गेहूं की फसल गंवा चुके केवल 15 प्रतिशत किसानों की ही प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना के तहत नुकसान की भरपाई हो पाएगी। बाकी किसानों को आपदा के तहत मुआवजा देने की बात की जा रही है। इसके मानक भी इतने कड़े हैं कि कुछ ही किसानों को इसका फायदा मिल पाएगा।
अप्रैल में हुई बेमौसम की बारिश ने खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को खासा नुकसान पहुंचाया है। रुक-रुक कर लगातार तीन दिन तक होती रही बारिश के कारण किसान गेहूं की फसल काट ही नहीं पाए। अब नाममात्र के किसानों को ही इस नुकसान की भरपाई हो पाएगी। जिले में करीब 50 हजार किसान हैं और इनमें से केवल 2882 किसान ही प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना के तहत पात्र हैं।
कृषि विभाग का कहना है कि बाकी किसानों को आपदा के तहत मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए पहले बारिश को आपदा घोषित करना होगा। आपदा में एक विकास खंड में 33 प्रतिशत नुकसान होने पर ही मुआवजे का प्रावधान है। जाहिर है कि इसमें भी न के बराबर किसानों को ही लाभ मिल पाएगा।
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इनसेट
बीमा योजना में शामिल फसलें
धान, गेहूं और मंडुवा
ये है मानक
कुल उत्पादन का 50 फीसदी से अधिक फसल के नुकसान पर क्लेम दिया जाता है। नुकसान का आंकलन राजस्व विभाग के सर्वे से होता है। बीमा योजना का लाभ किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से बैंक ऋण लेने वाले किसानों को ही मिलता है। जरूरी है कि कुल ऋण की डेढ़ फीसदी रकम बीमा प्रीमियम के रूप में जमा कराई हो। अधिकतर किसानों ने केसीसी के माध्यम से खेती के लिए बैंक से ऋण नहीं लिया है।
कोट
संयुक्त सर्वे के बाद ही यह पता चलेगा कि बारिश से गेहूं की कितनी फसल बर्बाद हुई है। यदि नुकसान बीमा के मानकों के अंदर है तो क्लेम दिया जाएगा।
- डॉ. शत्रुघ्न प्रसाद क्षेत्रीय प्रबंधक एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी
सिर्फ 15 फीसदी किसान ही कर पाएंगे नुकसान की भरपाई
प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना में 2882 किसान ही हकदार,
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अप्रैल में हुई बेमौसम की बारिश ने खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को खासा नुकसान पहुंचाया है। रुक-रुक कर लगातार तीन दिन तक होती रही बारिश के कारण किसान गेहूं की फसल काट ही नहीं पाए। अब नाममात्र के किसानों को ही इस नुकसान की भरपाई हो पाएगी। जिले में करीब 50 हजार किसान हैं और इनमें से केवल 2882 किसान ही प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना के तहत पात्र हैं।
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कृषि विभाग का कहना है कि बाकी किसानों को आपदा के तहत मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए पहले बारिश को आपदा घोषित करना होगा। आपदा में एक विकास खंड में 33 प्रतिशत नुकसान होने पर ही मुआवजे का प्रावधान है। जाहिर है कि इसमें भी न के बराबर किसानों को ही लाभ मिल पाएगा।
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इनसेट
बीमा योजना में शामिल फसलें
धान, गेहूं और मंडुवा
ये है मानक
कुल उत्पादन का 50 फीसदी से अधिक फसल के नुकसान पर क्लेम दिया जाता है। नुकसान का आंकलन राजस्व विभाग के सर्वे से होता है। बीमा योजना का लाभ किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से बैंक ऋण लेने वाले किसानों को ही मिलता है। जरूरी है कि कुल ऋण की डेढ़ फीसदी रकम बीमा प्रीमियम के रूप में जमा कराई हो। अधिकतर किसानों ने केसीसी के माध्यम से खेती के लिए बैंक से ऋण नहीं लिया है।
कोट
संयुक्त सर्वे के बाद ही यह पता चलेगा कि बारिश से गेहूं की कितनी फसल बर्बाद हुई है। यदि नुकसान बीमा के मानकों के अंदर है तो क्लेम दिया जाएगा।
- डॉ. शत्रुघ्न प्रसाद क्षेत्रीय प्रबंधक एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी
सिर्फ 15 फीसदी किसान ही कर पाएंगे नुकसान की भरपाई
प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना में 2882 किसान ही हकदार,