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परंपरागत फसलों के विकास को क्लस्टर आधारित प्रदर्शन
Updated Fri, 09 Feb 2018 02:29 AM IST
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हल्द्वानी। जिले में क्लस्टर आधारित खेती तो अस्तित्व में नहीं है लेकिन काश्तकारों को जागरूक करने के उद्देश्य से क्लस्टर गठित कर फसल प्रदर्शन और परंपरागत फसलों के विकास की योजना चल रही है। इसके लिए जिले के चार ब्लाकों में 15 क्लस्टर गठित किए गए हैं जहां ब्लाक स्तर पर काश्तकारों को परंपरागत फसलों की खेती के लिए जागरूक किया जा रहा है।
केेंद्र सरकार ने अपने सालाना बजट में क्लस्टर आधारित खेती को अनिवार्य करने की घोषणा की है। क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा देने की दिशा में हालांकि अभी कोई पहल नहीं हुई है लेकिन इसके समकक्ष योजना पर जिले में अमल हो रहा है। मुख्य कृषि अधिकारी (सीएओ) धनपत कुमार ने बताया कि फसल प्रदर्शन योजना और पारंपरिक फसल विकास योजना के तहत बेतालघाट, रामगढ़, धारी और ओखलकांडा में 15 क्लस्टर तैयार किए गए हैं। प्रत्येक क्लस्टर में 10 से 15 किसान शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि इन क्लस्टरों के माध्यम से जहां गेहूं की फसल का प्रदर्शन किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर मडुवा, रामदाना, गहत व मादिरा समेत मसाला प्रजाति की फसलों का प्रदर्शन कर ब्लाक के अन्य काश्तकारों को पारंपरिक खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है ताकि वह भी अपने खेतों में जैविक विधि से परंपरागत फसलों का उत्पादन कर सकें।
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केेंद्र सरकार ने अपने सालाना बजट में क्लस्टर आधारित खेती को अनिवार्य करने की घोषणा की है। क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा देने की दिशा में हालांकि अभी कोई पहल नहीं हुई है लेकिन इसके समकक्ष योजना पर जिले में अमल हो रहा है। मुख्य कृषि अधिकारी (सीएओ) धनपत कुमार ने बताया कि फसल प्रदर्शन योजना और पारंपरिक फसल विकास योजना के तहत बेतालघाट, रामगढ़, धारी और ओखलकांडा में 15 क्लस्टर तैयार किए गए हैं। प्रत्येक क्लस्टर में 10 से 15 किसान शामिल हैं।
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उन्होंने बताया कि इन क्लस्टरों के माध्यम से जहां गेहूं की फसल का प्रदर्शन किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर मडुवा, रामदाना, गहत व मादिरा समेत मसाला प्रजाति की फसलों का प्रदर्शन कर ब्लाक के अन्य काश्तकारों को पारंपरिक खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है ताकि वह भी अपने खेतों में जैविक विधि से परंपरागत फसलों का उत्पादन कर सकें।
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