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दो साल में पर्यटन कारोबार को 1200 करोड़ का नुकसान

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 04 Jun 2021 12:30 AM IST
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1200 crore loss to tourism business in two years
रामनगर (नैनीताल)। रामनगर पर्यटन की धुरी पर टिका हुआ है। यहां पर पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य के अलावा जंगल सफारी के लिए आता है। पर्यटकों की आवाजाही से यहां का कारोबार खूब फल फूलता है। पिछले दो साल से पर्यटन सीजन चौपट हो गया है। कोरोना काल में पर्यटन कारोबार को 1200 करोड़ का नुकसान हुआ है। अब अक्तूबर से शुरू होने वाले सीजन पर सबकी नजर है।
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रामनगर की अर्थव्यवस्था पर्यटन कारोबार पर निर्भर है। यहां नवंबर से 30 जून तक पर्यटन सीजन होता है। कोरोना की पहली व दूसरी लहर में पर्यटन कारोबारियों का कारोबार पूरी तरह से तहस नहस हो गया।
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पर्यटन सीजन में आने वाला पर्यटक जहां जंगल सफारी करता तो वहीं होटल व रिजॉर्ट में ठहरता था। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए 30 अप्रैल से कॉर्बेट पार्क को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया था। पर्यटकों की आमद नहीं होने से कारोबार प्रभावित हुआ है। जून के अंत में हर साल मानसून सत्र के चलते पर्यटन बंद हो जाता है और वर्तमान में जून का पहला सप्ताह चल रहा है। हालात देखकर नहीं लगता कि अब जून में कॉर्बेट पार्क खुलेगा।
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दूसरी ओर पार्क वार्डन आरके तिवारी ने बताया कि कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए कॉर्बेट पार्क को बंद किया गया था। सरकार के दिशा निर्देश पर ही पार्क को खोला जाएगा।
पिछले साल 18 मार्च को हुआ था पार्क बंद
कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए पिछले साल 18 मार्च को कॉर्बेट टाइगर रिजर्व को बंद कर दिया था। जून में कॉर्बेट पार्क को सफारी के लिए खोला गया था। पिछले साल नवंबर के बाद पर्यटन गति पकड़ रहा था। शांत वादियों में पर्यटकों की चहलकदमी बढ़ने से रामनगर गुलजार रहने लगा था। अप्रैल की शुरुआत से फिर पर्यटकों की संख्या घटने लगी है। बाहरी पर्यटकों के लिए कोरोना जांच रिपोर्ट की अनिवार्यता और कई प्रदेशों में सप्ताहांत में लॉकडाउन लगने से रामनगर में वीरानी छा गई है।

अब अक्तूबर से पर्यटन की आस
होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष हरिमान ने बताया कि रामनगर में दो सौ से अधिक होटल-रिजॉर्ट हैं। सभी लॉकडाउन के बाद से बंद होने के कारण करीब 1200 करोड़ से अधिक का नुकसान का अनुमान है। अब अक्तूबर से फिर से शुरू होने वाले पर्यटन सीजन से आस है। ज्यादातर पर्यटक कोरोना के डर से आने से बच रहे हैं, जबकि अन्य पर्यटक आरटीपीसीआर रिपोर्ट जरूरी और नियमों की सख्ती के कारण नहीं आ रहे हैं। दूसरी ओर, जिप्सी वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष गिरीश धस्माना ने बताया कि कॉर्बेट पार्क में 307 जिप्सियां पंजीकृत हैं। ये सभी जिप्सियां कॉर्बेट पार्क के सभी जोनों में चलती है। एक जिप्सी चालक को महीने में अनुमानित आय 50 हजार के आसपास हैं। यानी इन दो सीजन में जिप्सी चालकों को भी चार से पांच करोड़ का नुकसान हुआ है।
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