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औपचारिकता मात्र रह गई है माहरा और फर्त्यालों की बगवाल
Updated Sun, 15 Apr 2018 10:52 PM IST
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। खोलि दे माता खोल भवानी धारमा किवाड़ा, चौकोटेकि पारवती तीले धारो बोला जैसे पारंपरिक झोड़ा गायन के साथ जैनोली का ऐतिहासिक चैतव म्यल सैमधार मंदिर परिसर में संपन्न हो गया। म्यल में पारंपरिक बगवाल तो अब औपचारिकता मात्र रह गई है, लेकिन ढोल-नगाड़ों के साथ पहुंचे ग्रामीणों ने झोड़े और चांचरी गाकर धूम मचा दी। इससे पूर्व सुबह फूलदेयी का त्योहार मनाने के बाद ग्रामीण टोलियों के रूप में सेमधार मंदिर पहुंचे, यहां मंदिर की परिक्रमा भी की गई। क्षेत्रीय विधायक करन माहरा ने भी म्यल में शिरकत की।
जैनोली में हर साल बैसाखी के दिन चैतव म्यल का आयोजन होता है। बताते हैं कि वर्षों पहले म्यल में क्षेत्र के फर्त्याल और माहरा जाति के लोगों में ओड़ा भेंटने को लेकर विवाद हो गया था, यह विवाद म्यल में बगवाल के रूप में मनाया जाता था, लेकिन अब यह परंपरा औपचारिक मात्र रह गई है। पिलखोली, जैनोली, जोग्याड़ी, शिलंगी, चमोली, तस्वाड़, खग्यार, डौनी, उपराड़ी, बजीना बजोल, टाना, पन्याली, डौरब, टूनाकोट, भडग़ांव के ग्रामीण नगारे निशानों के साथ झोड़ा गाते हुए सुबह मंदिर परिसर में एकत्रित हुए। इसके बाद झोड़ा गायन का सिलसिला चला।
इससे पूर्व सुबह के समय शिलंगी गांव में माहरा और फर्त्याल लोगों के बीच औपचारिक रूप से बगवाल खेली गई। पिलखोली निवासी प्रधान संगठन के पूर्व प्रदेश महामंत्री हरी सिंह नेगी ने कहा कि इस ऐतिहासिक मेले को राज्य मेले का दर्जा आज तक नहीं मिल सका है। मेला शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। मेले में क्षेत्रीय विधायक करन माहरा, बीडीसी सदस्य त्रिभुवन फर्त्याल, इंद्र सिंह, कनिष्ट प्रमुख अंबा दत्त पंत, जसवंत सिंह, मुकेश सिंह सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने सहयोग किया।
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जैनोली में हर साल बैसाखी के दिन चैतव म्यल का आयोजन होता है। बताते हैं कि वर्षों पहले म्यल में क्षेत्र के फर्त्याल और माहरा जाति के लोगों में ओड़ा भेंटने को लेकर विवाद हो गया था, यह विवाद म्यल में बगवाल के रूप में मनाया जाता था, लेकिन अब यह परंपरा औपचारिक मात्र रह गई है। पिलखोली, जैनोली, जोग्याड़ी, शिलंगी, चमोली, तस्वाड़, खग्यार, डौनी, उपराड़ी, बजीना बजोल, टाना, पन्याली, डौरब, टूनाकोट, भडग़ांव के ग्रामीण नगारे निशानों के साथ झोड़ा गाते हुए सुबह मंदिर परिसर में एकत्रित हुए। इसके बाद झोड़ा गायन का सिलसिला चला।
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इससे पूर्व सुबह के समय शिलंगी गांव में माहरा और फर्त्याल लोगों के बीच औपचारिक रूप से बगवाल खेली गई। पिलखोली निवासी प्रधान संगठन के पूर्व प्रदेश महामंत्री हरी सिंह नेगी ने कहा कि इस ऐतिहासिक मेले को राज्य मेले का दर्जा आज तक नहीं मिल सका है। मेला शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। मेले में क्षेत्रीय विधायक करन माहरा, बीडीसी सदस्य त्रिभुवन फर्त्याल, इंद्र सिंह, कनिष्ट प्रमुख अंबा दत्त पंत, जसवंत सिंह, मुकेश सिंह सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने सहयोग किया।
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