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प्रदेश के विश्वविद्यालयों में जल्द खत्म होगी प्रभारी की व्यवस् था
Updated Fri, 27 Oct 2017 02:18 AM IST
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हल्द्वानी। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में कुलसचिव, उप कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक के पदों पर जल्द ही स्थायी नियुक्तियां की जाएंगी। इन पदों पर भर्ती लोकसेवा आयोग के माध्यम की जाएगी। प्रदेश सरकार ने इस संबंध में तैयारी शुरू कर दी है।
उच्चशिक्षा के अधीन कुमाऊं विश्वविद्यालय, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा आवासीय विश्वविद्यालय, श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय, संस्कृत विश्वविद्यालय, दून विश्वविद्यालय संचालित हो रहे हैं। कुमाऊं विश्वविद्यालय को छोड़कर किसी भी विश्वविद्यालय में स्थायी कुलसचिव, उपकुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक नहीं हैं। इन सभी विश्वविद्यालयों में कामचलाऊ व्यवस्था चल रही है। कुलसचिव, उप कुलसचिव से लेकर परीक्षा नियंत्रक के पदों पर प्रभारी व्यवस्था होने के चलते विश्वविद्यालयों में कार्य संस्कृति नहीं बन पा रही है। इन पदों पर काम करने वाले प्रोफेसरों और अन्य अधिकारियों पर अपने मूल पद के काम का भी दबाव होने के कारण वे चाहते हुए भी कुछ नहीं कर पाते।
उच्चशिक्षा के आधा दर्जन विश्वविद्यालयों के अलावा कृषि और तकनीकी शिक्षा से जुड़े छह और विश्वविद्यालय हैं, इनमें भी ये पद कामचलाऊ व्यवस्था के सहारे चल रहे हैं। इधर, विश्वविद्यालयों में व्यवस्थाएं सुधारने के मकसद से प्रदेश सरकार कई ठोस कदम उठाने जा रही है। उच्चशिक्षा मंत्री डॉ. धनसिंह रावत बताते हैं कि सरकार ने सभी राजकीय 12 विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलसचिव, उपकुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक की नियुक्तियां करने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि कुमाऊं विश्वविद्यालय में तो स्थायी कुलसचिव की तैनाती हो चुकी है लेकिन इस विश्वविद्यालय में उप कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक के पद पर प्रभारी ही काम कर रहे हैं। उच्चशिक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार ने इन सभी विश्वविद्यालयों में उक्त पदों पर भर्ती किए जाने को लोकसेवा आयोग को अध्याचन भेजने की तैयारी चल रही है। इसके बाद इन पदों पर अधिकारियों के एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में स्थानांतरित भी हो सकेंगे।
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उच्चशिक्षा के अधीन कुमाऊं विश्वविद्यालय, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा आवासीय विश्वविद्यालय, श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय, संस्कृत विश्वविद्यालय, दून विश्वविद्यालय संचालित हो रहे हैं। कुमाऊं विश्वविद्यालय को छोड़कर किसी भी विश्वविद्यालय में स्थायी कुलसचिव, उपकुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक नहीं हैं। इन सभी विश्वविद्यालयों में कामचलाऊ व्यवस्था चल रही है। कुलसचिव, उप कुलसचिव से लेकर परीक्षा नियंत्रक के पदों पर प्रभारी व्यवस्था होने के चलते विश्वविद्यालयों में कार्य संस्कृति नहीं बन पा रही है। इन पदों पर काम करने वाले प्रोफेसरों और अन्य अधिकारियों पर अपने मूल पद के काम का भी दबाव होने के कारण वे चाहते हुए भी कुछ नहीं कर पाते।
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उच्चशिक्षा के आधा दर्जन विश्वविद्यालयों के अलावा कृषि और तकनीकी शिक्षा से जुड़े छह और विश्वविद्यालय हैं, इनमें भी ये पद कामचलाऊ व्यवस्था के सहारे चल रहे हैं। इधर, विश्वविद्यालयों में व्यवस्थाएं सुधारने के मकसद से प्रदेश सरकार कई ठोस कदम उठाने जा रही है। उच्चशिक्षा मंत्री डॉ. धनसिंह रावत बताते हैं कि सरकार ने सभी राजकीय 12 विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलसचिव, उपकुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक की नियुक्तियां करने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि कुमाऊं विश्वविद्यालय में तो स्थायी कुलसचिव की तैनाती हो चुकी है लेकिन इस विश्वविद्यालय में उप कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक के पद पर प्रभारी ही काम कर रहे हैं। उच्चशिक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार ने इन सभी विश्वविद्यालयों में उक्त पदों पर भर्ती किए जाने को लोकसेवा आयोग को अध्याचन भेजने की तैयारी चल रही है। इसके बाद इन पदों पर अधिकारियों के एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में स्थानांतरित भी हो सकेंगे।
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