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वर्षों पहले जिन खेतों में लहराती थी फसलें आज पानी के अभाव में खेत पड़े बंजर
Updated Mon, 16 Apr 2018 01:39 AM IST
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भीमताल के सूखे खेत
- फोटो : अमर उजाला
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भीमताल। भीमताल विकासखंड से पांच किमी दूर डेढ़ किमी खड़ी पहाड़ी पर बसे अलचौना गांव वालों का दर्द कोई नहीं समझ पा रहा है। 15 वर्षों से सिंचाई विभाग की नहर में पानी न आने के कारण दो हजार नाली जमीन बंजर है, जबकि पहले यहां गेहूं, मक्का, धान, गहत, मटर, भट्ट, आलू, सोयाबीन की फसलों से खेत लहराते थे। हल्द्वानी मंडी में किसान फसलों के बेचकर मुनाफा कमाते थे।
गांव के लाल सिंह अलचौनी, दीवान सिंह, प्रेमबल्लभ, त्रिलोक सिंह, हिम्मत सिंह आदि ग्रामवासियों ने बताया कि खेतीबाड़ी न होने से 13 से अधिक परिवार गांव से पलायन कर चुके है। 67 साल की जशोदा देवी तो बताते-बताते रो पड़ी। तारा दत्त, भावना उप्रेती, लक्ष्मी देवी, रेवती देवी, दुर्गा देवी, पुष्पा देवी ने बताया खेत बंजर पड़े है। पीने का पानी गधेरों से लाना पड़ रहा है। जयंती देवी ने बताया कि वह अपनी बेटियों से पानी न होने की वजह से गर्मी के महीनों में मायके न आने का आग्रह करती है। भीमताल विकासखंड के ज्येष्ठ ब्लॉक उपप्रमुख अनिल चनौतिया ने कृषि अधिकारी से ग्रामीणों की समस्या का समाधान करने की मांग की है।
15 साल से सिंचाई विभाग की नहर में पानी न आने के कारण दो हजार नाली जमीन बंजर
13 से अधिक परिवार कर चुके हैं पलायन, गधेरों से पानी लाते हैं ग्रामीण
आखिर कैसे चुकाएं बैंकों का लोन
दीवान सिंह ने सहकारी समिति बैंक से 80 हजार (50 नाली) का कृषि ऋण, प्रेम बल्लभ ने 90 हजार (40 नाली) विपिन चंद्र ने 40 हजार (10 नाली) त्रिलोक सिंह ने दो लाख, हिम्मत सिंह ने एक लाख (20 नाली) विजय सिंह ने 90 हजार का कृषि ऋण खेती के लिए 10 साल पहले लिया था। खेतों के बंजर पड़े होने से ब्याज बढ़ने और ऋण को चुकाने में समस्या पैदा हो गई है।
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71 लाख की अघन पेयजल योजना में पानी नहीं
गांव में वर्ष 2005 में 71 लाख की अघन पेयजल योजना से गांव में टैंक और पाइप लाइन बिछाई गई लेकिन टैंक और पाइप लाइनों में पानी की बूंद नहीं टपकी।
अलचौना नहर
1- अलचौना की मुख्य नहर में पानी नही जा रहा है ये मुझे पता नही है। विभाग द्वारा इस नहर का निरीक्षण कर पानी की समस्या को हल किया जाएगा।
हरीश चंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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गांव के लाल सिंह अलचौनी, दीवान सिंह, प्रेमबल्लभ, त्रिलोक सिंह, हिम्मत सिंह आदि ग्रामवासियों ने बताया कि खेतीबाड़ी न होने से 13 से अधिक परिवार गांव से पलायन कर चुके है। 67 साल की जशोदा देवी तो बताते-बताते रो पड़ी। तारा दत्त, भावना उप्रेती, लक्ष्मी देवी, रेवती देवी, दुर्गा देवी, पुष्पा देवी ने बताया खेत बंजर पड़े है। पीने का पानी गधेरों से लाना पड़ रहा है। जयंती देवी ने बताया कि वह अपनी बेटियों से पानी न होने की वजह से गर्मी के महीनों में मायके न आने का आग्रह करती है। भीमताल विकासखंड के ज्येष्ठ ब्लॉक उपप्रमुख अनिल चनौतिया ने कृषि अधिकारी से ग्रामीणों की समस्या का समाधान करने की मांग की है।
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15 साल से सिंचाई विभाग की नहर में पानी न आने के कारण दो हजार नाली जमीन बंजर
13 से अधिक परिवार कर चुके हैं पलायन, गधेरों से पानी लाते हैं ग्रामीण
आखिर कैसे चुकाएं बैंकों का लोन
दीवान सिंह ने सहकारी समिति बैंक से 80 हजार (50 नाली) का कृषि ऋण, प्रेम बल्लभ ने 90 हजार (40 नाली) विपिन चंद्र ने 40 हजार (10 नाली) त्रिलोक सिंह ने दो लाख, हिम्मत सिंह ने एक लाख (20 नाली) विजय सिंह ने 90 हजार का कृषि ऋण खेती के लिए 10 साल पहले लिया था। खेतों के बंजर पड़े होने से ब्याज बढ़ने और ऋण को चुकाने में समस्या पैदा हो गई है।
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71 लाख की अघन पेयजल योजना में पानी नहीं
गांव में वर्ष 2005 में 71 लाख की अघन पेयजल योजना से गांव में टैंक और पाइप लाइन बिछाई गई लेकिन टैंक और पाइप लाइनों में पानी की बूंद नहीं टपकी।
अलचौना नहर
1- अलचौना की मुख्य नहर में पानी नही जा रहा है ये मुझे पता नही है। विभाग द्वारा इस नहर का निरीक्षण कर पानी की समस्या को हल किया जाएगा।
हरीश चंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग