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संजीव चतुर्वेदी की शून्य एसीआर पर कैट ने लगाई रोक
Updated Fri, 22 Sep 2017 02:27 AM IST
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हल्द्वानी।केंद्रीय न्यायिक अभिकरण (कैट) ने शून्य एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) से जूझ रहे एम्स दिल्ली के पूर्व मुख्य सतर्कता अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को बड़ी राहत दी है। कैट ने वर्ष 2015-16 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, पूर्व निदेशक और उप निदेशक की संजीव की लिखी जीरो एसीआर पर रोक लगाते हुए केंद्र और राज्य सरकार को आदेश दिए है कि सेवा संबंधी किसी भी मामले में इस शून्य एसीआर का संज्ञान नहीं लिया जाए।
भारतीय वन्य सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने जून 2017 में नैनीताल उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के मुख्य सतर्कता अधिकारी की तैनाती के दौरान वर्ष 2015-16 में दुर्भावना से ग्रस्त होकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, एम्स के तत्कालीन निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा और उप निदेशक श्रीनिवास ने उनके एसीआर में शून्य दिया था। इस वजह से पिछले एक दशक की उत्कृष्ट सेवाओं पर बट्टा लग गया था। उन्होंने नैनीताल उच्च न्यायालय से इस एसीआर पर रोक लगाते हुए अंतरिम राहत देने की अपील की थी।
याचिका पर सुनवाई करते हुए नैनीताल हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ की खंडपीठ ने संजीव को पहले केंद्रीय न्यायिक अभिकरण (कैट) जाने के निर्देश दिए थे। इस पर जुलाई 2017 में संजीव ने कैट इलाहाबाद में दस्तक दी थी। कैट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया था कि संजीव ने इसी तरह की याचिका दिल्ली कैट में दायर की है इसलिए इस याचिका का कोई अर्थ नहीं है। वहीं संजीव का तर्क था कि उन्होंने दिल्ली में याचिका इसलिए दायर की थी कि स्वास्थ्य मंत्री, निदेशक, उप निदेश को एसीआर लिखने से रोका जाए। दूसरा तर्क दिया था कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ही शून्य एसीआर के खिलाफ अपील अधिकारी हैं जब उन्होंने अप्रैल 2017 में अपील की तो दुर्भावना से ग्रस्त केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने शून्य बरकरार रखा था । दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कैट की दो सदस्यीय सर्किट बेंच (इलाहाबाद कैट के सदस्य डॉ. मुर्तजा अली और चेन्नई कैट के प्रशासनिक सदस्य आर रामानुजम) ने 20 सितंबर को संजीव के पक्ष में फैसला दिया है। उन्होंने संजीव को वर्ष 2015-16 की एसीआर के खिलाफ स्टे दे दिया है। उन्होंने लिखित फैसले में कहा कि मामले की सुनवाई तक केंद्र और राज्य सरकार संजीव की सेवा संबंधी किसी भी मामले पदोन्नति, नियुक्ति, प्रतिनियुक्ति में इस एसीआर को संज्ञान न ले। इस मामले की अगली सुनवाई 23 अक्तूबर को होगी।
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भारतीय वन्य सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने जून 2017 में नैनीताल उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के मुख्य सतर्कता अधिकारी की तैनाती के दौरान वर्ष 2015-16 में दुर्भावना से ग्रस्त होकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, एम्स के तत्कालीन निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा और उप निदेशक श्रीनिवास ने उनके एसीआर में शून्य दिया था। इस वजह से पिछले एक दशक की उत्कृष्ट सेवाओं पर बट्टा लग गया था। उन्होंने नैनीताल उच्च न्यायालय से इस एसीआर पर रोक लगाते हुए अंतरिम राहत देने की अपील की थी।
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याचिका पर सुनवाई करते हुए नैनीताल हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ की खंडपीठ ने संजीव को पहले केंद्रीय न्यायिक अभिकरण (कैट) जाने के निर्देश दिए थे। इस पर जुलाई 2017 में संजीव ने कैट इलाहाबाद में दस्तक दी थी। कैट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया था कि संजीव ने इसी तरह की याचिका दिल्ली कैट में दायर की है इसलिए इस याचिका का कोई अर्थ नहीं है। वहीं संजीव का तर्क था कि उन्होंने दिल्ली में याचिका इसलिए दायर की थी कि स्वास्थ्य मंत्री, निदेशक, उप निदेश को एसीआर लिखने से रोका जाए। दूसरा तर्क दिया था कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ही शून्य एसीआर के खिलाफ अपील अधिकारी हैं जब उन्होंने अप्रैल 2017 में अपील की तो दुर्भावना से ग्रस्त केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने शून्य बरकरार रखा था । दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कैट की दो सदस्यीय सर्किट बेंच (इलाहाबाद कैट के सदस्य डॉ. मुर्तजा अली और चेन्नई कैट के प्रशासनिक सदस्य आर रामानुजम) ने 20 सितंबर को संजीव के पक्ष में फैसला दिया है। उन्होंने संजीव को वर्ष 2015-16 की एसीआर के खिलाफ स्टे दे दिया है। उन्होंने लिखित फैसले में कहा कि मामले की सुनवाई तक केंद्र और राज्य सरकार संजीव की सेवा संबंधी किसी भी मामले पदोन्नति, नियुक्ति, प्रतिनियुक्ति में इस एसीआर को संज्ञान न ले। इस मामले की अगली सुनवाई 23 अक्तूबर को होगी।
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