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आपदा से हेलीपैड का अस्तित्व खतरे में
Updated Sun, 06 Aug 2017 11:24 PM IST
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चौखुटिया (अल्मोड़ा)। आपदा के दौरान लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बनाया गया हेलीपैड खुद आपदा की भेंट चढ़ गया है। शुक्रवार को हुई भारी बारिश के बाद खचार नाले में आए उफान का पानी हेलीपैड के ऊपर बहता रहा। हेलीपैड के चारों ओर भू धसाव होने से हैलीपैड का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। हेलीपैड को नाले के निकट बनाए जाने को लेकर शुरुआती दौर से ही सवाल उठते रहे हैं। इसके बावजूद नाले के मुहाने पर हैलीपैड बना दिया।
अंधेरगर्दी का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है। चौखुटिया में दो साल पूर्व बने हैलीपैड का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। शुक्रवार को हुई भारी बारिश के बाद उफनाए खचार नाले का पानी उसके ऊपर बहता रहा। हेलीपैड के चारों ओर भू धसाव से उसके ज्यादा दिन तक टिकने की उम्मीद नहीं है। इसके निर्माणकर्ताओं द्वारा हेलीपैड बनाने के पीछे तर्क दिया जा रहा था कि इससे आपदा अथवा किसी तरह की संकट की घड़ी में जरूरतमंदों को हवाई मार्ग से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में आसानी होगी, परंतु इसके निर्माण के लिए स्थान का चयन करने और निर्माण करने वाले यह भूल गए कि आखिर नाले के निकट हेलीपैड बनाने से तो यह देर-सबेर नाले के तेज बहाव की भेंट चढ़ जाएगा।
जनता द्वारा समझाने के बावजूद संबंधित अधिकारी इसको लेकर कतई बेपरवाह रहे।
निर्माण के दौरान स्थानीय लोगों के साथ ही अमर उजाला ने भी उन्हें इसके लिए लगातार आगाह किया था, परंतु उनका मकसद हेलीपैड से जनता को लाभ पहुंचाने के बजाए अपनी जेब भरने का ज्यादा था। लाखों रुपये की बर्बादी के साथ ही सर्दियों में बच्चों द्वारा क्रिकेट खेलने के लिए बनाया मैदान उनसे जरूर छिन गया।
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अंधेरगर्दी का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है। चौखुटिया में दो साल पूर्व बने हैलीपैड का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। शुक्रवार को हुई भारी बारिश के बाद उफनाए खचार नाले का पानी उसके ऊपर बहता रहा। हेलीपैड के चारों ओर भू धसाव से उसके ज्यादा दिन तक टिकने की उम्मीद नहीं है। इसके निर्माणकर्ताओं द्वारा हेलीपैड बनाने के पीछे तर्क दिया जा रहा था कि इससे आपदा अथवा किसी तरह की संकट की घड़ी में जरूरतमंदों को हवाई मार्ग से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में आसानी होगी, परंतु इसके निर्माण के लिए स्थान का चयन करने और निर्माण करने वाले यह भूल गए कि आखिर नाले के निकट हेलीपैड बनाने से तो यह देर-सबेर नाले के तेज बहाव की भेंट चढ़ जाएगा।
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जनता द्वारा समझाने के बावजूद संबंधित अधिकारी इसको लेकर कतई बेपरवाह रहे।
निर्माण के दौरान स्थानीय लोगों के साथ ही अमर उजाला ने भी उन्हें इसके लिए लगातार आगाह किया था, परंतु उनका मकसद हेलीपैड से जनता को लाभ पहुंचाने के बजाए अपनी जेब भरने का ज्यादा था। लाखों रुपये की बर्बादी के साथ ही सर्दियों में बच्चों द्वारा क्रिकेट खेलने के लिए बनाया मैदान उनसे जरूर छिन गया।
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