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हत्यारोपी को आजीवन कारावास और 15 हजार रुपये अर्थदंड
Updated Sun, 25 Jun 2017 12:55 AM IST
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हत्यारोपी को आजीवन कारावास और 15 हजार रुपये अर्थदंड
नैनीताल।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में गोपाल सिंह की हत्या के मामले में आरोप साबित होने के बाद आरोपी को आजीवन कारावास और 15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
19 दिसंबर 2014 को गेठिया सेनिटोरियम निवासी प्रताप सिंह बिष्ट का भाई गोपाल सिंह बिष्ट घर से लापता हो गया था। खोजबीन के बाद भी जब गोपाल सिंह का कहीं पता नहीं चला तो परिजनों ने ज्योलीकोट चौकी में गुमशुदगी की तहरीर दी। 27 दिसंबर को शक के आधार पर लापता युवक के परिजनों ने गेठिया निवासी मनोज सिंह बिष्ट से पूछताछ की तो मनोज ने परिजनों को बताया कि उसने 19 दिसंबर को गोपाल सिंह को घर के पास स्थित गधेरे में ले जाकर उसकी हत्या कर दी है और शव को मिट्टी व पत्थरों से दबा दिया है। परिजनों द्वारा ज्योलीकोट पुलिस को मामले की सूचना देने के बाद मनोज के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छुपाने का मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने मनोज सिंह बिष्ट की निशानदेही पर लापता गोपाल सिंह का सड़ा गला शव और दूसरे दिन आरोपी के घर की रसोई से हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी और आरी बरामद कर ली थी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत में 21 जून को हुई सुनवाई में आरोपी मनोज बिष्ट को हत्या का दोषी करार दिया गया था। इस दौरान अभियोजन पक्ष की ओर पैरवी करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने अभियोजन तथ्य साबित करने के लिए 11 गवाह पेश किए थे।
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शनिवार को सजा के लिए हुई सुनवाई में जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी ने आईपीसी की धारा 302 में आजीवन कारावास और दस हजार रुपये जुर्माना तथा जुर्माना अदा न करने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास सुनाया। साथ ही आईपीसी की धारा 201 में तीन साल का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड तथा अर्थदंड न देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है।
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नैनीताल।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में गोपाल सिंह की हत्या के मामले में आरोप साबित होने के बाद आरोपी को आजीवन कारावास और 15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
19 दिसंबर 2014 को गेठिया सेनिटोरियम निवासी प्रताप सिंह बिष्ट का भाई गोपाल सिंह बिष्ट घर से लापता हो गया था। खोजबीन के बाद भी जब गोपाल सिंह का कहीं पता नहीं चला तो परिजनों ने ज्योलीकोट चौकी में गुमशुदगी की तहरीर दी। 27 दिसंबर को शक के आधार पर लापता युवक के परिजनों ने गेठिया निवासी मनोज सिंह बिष्ट से पूछताछ की तो मनोज ने परिजनों को बताया कि उसने 19 दिसंबर को गोपाल सिंह को घर के पास स्थित गधेरे में ले जाकर उसकी हत्या कर दी है और शव को मिट्टी व पत्थरों से दबा दिया है। परिजनों द्वारा ज्योलीकोट पुलिस को मामले की सूचना देने के बाद मनोज के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छुपाने का मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
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रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने मनोज सिंह बिष्ट की निशानदेही पर लापता गोपाल सिंह का सड़ा गला शव और दूसरे दिन आरोपी के घर की रसोई से हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी और आरी बरामद कर ली थी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत में 21 जून को हुई सुनवाई में आरोपी मनोज बिष्ट को हत्या का दोषी करार दिया गया था। इस दौरान अभियोजन पक्ष की ओर पैरवी करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने अभियोजन तथ्य साबित करने के लिए 11 गवाह पेश किए थे।
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शनिवार को सजा के लिए हुई सुनवाई में जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी ने आईपीसी की धारा 302 में आजीवन कारावास और दस हजार रुपये जुर्माना तथा जुर्माना अदा न करने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास सुनाया। साथ ही आईपीसी की धारा 201 में तीन साल का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड तथा अर्थदंड न देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है।