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तीन साल से स्वामी राम कैंसर
Updated Sat, 07 Jul 2018 01:56 AM IST
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हल्द्वानी। सरकारी तंत्र की लापरवाही के चलते स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट को स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के तौर पर विकसित नहीं किया जा सका है। केंद्र स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के लिए धनराशि देने को तैयार है, पर राज्य सरकार इंस्टीट्यूट के लिए डॉक्टरों से लेकर वार्ड ब्वाय तक की भर्ती के संबंध में कोई फैसला नहीं कर सकी है। अब हाईकोर्ट के आर्डर के बाद शासन को तीन माह के अंदर कैंसर से इलाज से जुड़ी हर सुविधा को जुटाना होगा।
शासन में तीन साल से प्रस्ताव अटका हुआ
केंद्र आर्थिक मदद देने है तैयार
अब हाईकोर्ट के आर्डर के बाद तीन माह में सभी औपचारिकता करनी होंगी पूरी
पिछले साल मरीजों का इलाज
5548 मरीजों की ओपीडी में जांच हुई
1652 मरीजों को इलाज के लिए भर्ती किया गया
4264 रोगियों को रेडियोथेरेपी दी गई
18 विभाग खोले जाने का प्रस्ताव
स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट को अपग्रेड कर स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट बनाने का प्रस्ताव तीन साल पहले शासन को भेजा गया था। 120 करोड़ की योजना में में 90 प्रतिशत केंद्र सरकार देने को तैयार है। इसके बाद भी राज्य सरकार चुप्पी साधे बैठी है। स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में कैंसर के इलाज से जुड़े 18 अलग-अलग विभागों को तैयार किया जाना है, इसके लिए 277 विशेषज्ञ डॉक्टर से लेकर वार्ड ब्वाय तक की तैनाती होनी है। सूत्रों के अनुसार इस स्टाफ को तैनात करने से लेकर वेतन देने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है, ऐसे में मामला अटका कर रखा गया है। बीच में स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट को दूसरी जगह भी ले जाने की चर्चा उड़ती रहती थी, ऐसे में मामले को अटकाने के पीछे भी यह कारण होने का भी कयास लगाया जाता रहा है।
केवल दो डॉक्टर कार्यरत
मौजूदा समय में स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट में नियमित रूप से केवल दो असिस्टेंट प्रोफेसर स्तर के दो डॉक्टर (रेडिएशन ऑनकोलाजिस्ट) ही तैनात हैं, जबकि इंस्टीट्यूट के लिए प्रोफेसर (एक), एसोसिएट प्रोफेसर (एक) और असिस्टेंट प्रोफेसर (तीन पद) स्वीकृत हैं। यही दो डॉक्टर पूरे सिस्टम को संभालते हैं। जबकि रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीच में डॉक्टरों के प्रमोशन और नई नियुक्ति की बात भी हुई थी, पर मामला अटका दिया गया। इसी बीच कई संविदा पर तैनात डॉक्टरों ने सरकारी तंत्र की लापरवाह रवैये के चलते इंस्टीट्यूट को छोड़ना ही बेहतर समझा है। इसके बाद भी चिकित्सा- शिक्षा विभाग की नींद नहीं टूटी है।
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पीजी कोर्स शुरू करने की योजना
सूत्रों के अनुसार स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट में कैंसर की शिक्षा के लिए पीजी कोर्स शुरू करने की योजना थी, पर इसके लिए फैकल्टी की कमी आड़े आ गई। इसके चलते कैंसर के इलाज के साथ उसके विशेषज्ञों को तैयार करने की योजना को झटका लगा है। मौजूदा समय में इंस्टीट्यूट के ऊपरी हिस्से में सर्जरी के लिए ओटी, वार्ड, प्राइवेट वार्ड आदि को भारी भरकम राशि खर्च कर तैयार किया गया है, पर आज तक कोई उपयोग नहीं हो सका है।
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शासन में तीन साल से प्रस्ताव अटका हुआ
केंद्र आर्थिक मदद देने है तैयार
अब हाईकोर्ट के आर्डर के बाद तीन माह में सभी औपचारिकता करनी होंगी पूरी
पिछले साल मरीजों का इलाज
5548 मरीजों की ओपीडी में जांच हुई
1652 मरीजों को इलाज के लिए भर्ती किया गया
4264 रोगियों को रेडियोथेरेपी दी गई
18 विभाग खोले जाने का प्रस्ताव
स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट को अपग्रेड कर स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट बनाने का प्रस्ताव तीन साल पहले शासन को भेजा गया था। 120 करोड़ की योजना में में 90 प्रतिशत केंद्र सरकार देने को तैयार है। इसके बाद भी राज्य सरकार चुप्पी साधे बैठी है। स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में कैंसर के इलाज से जुड़े 18 अलग-अलग विभागों को तैयार किया जाना है, इसके लिए 277 विशेषज्ञ डॉक्टर से लेकर वार्ड ब्वाय तक की तैनाती होनी है। सूत्रों के अनुसार इस स्टाफ को तैनात करने से लेकर वेतन देने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है, ऐसे में मामला अटका कर रखा गया है। बीच में स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट को दूसरी जगह भी ले जाने की चर्चा उड़ती रहती थी, ऐसे में मामले को अटकाने के पीछे भी यह कारण होने का भी कयास लगाया जाता रहा है।
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केवल दो डॉक्टर कार्यरत
मौजूदा समय में स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट में नियमित रूप से केवल दो असिस्टेंट प्रोफेसर स्तर के दो डॉक्टर (रेडिएशन ऑनकोलाजिस्ट) ही तैनात हैं, जबकि इंस्टीट्यूट के लिए प्रोफेसर (एक), एसोसिएट प्रोफेसर (एक) और असिस्टेंट प्रोफेसर (तीन पद) स्वीकृत हैं। यही दो डॉक्टर पूरे सिस्टम को संभालते हैं। जबकि रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीच में डॉक्टरों के प्रमोशन और नई नियुक्ति की बात भी हुई थी, पर मामला अटका दिया गया। इसी बीच कई संविदा पर तैनात डॉक्टरों ने सरकारी तंत्र की लापरवाह रवैये के चलते इंस्टीट्यूट को छोड़ना ही बेहतर समझा है। इसके बाद भी चिकित्सा- शिक्षा विभाग की नींद नहीं टूटी है।
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पीजी कोर्स शुरू करने की योजना
सूत्रों के अनुसार स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट में कैंसर की शिक्षा के लिए पीजी कोर्स शुरू करने की योजना थी, पर इसके लिए फैकल्टी की कमी आड़े आ गई। इसके चलते कैंसर के इलाज के साथ उसके विशेषज्ञों को तैयार करने की योजना को झटका लगा है। मौजूदा समय में इंस्टीट्यूट के ऊपरी हिस्से में सर्जरी के लिए ओटी, वार्ड, प्राइवेट वार्ड आदि को भारी भरकम राशि खर्च कर तैयार किया गया है, पर आज तक कोई उपयोग नहीं हो सका है।