{"_id":"5b37e48b4f1c1b2b428b7973","slug":"101530389643-nainital-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"संसदीय समिति के समक्ष रखेंगे निजीकरण के विरोध में पक्ष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संसदीय समिति के समक्ष रखेंगे निजीकरण के विरोध में पक्ष
Updated Sun, 01 Jul 2018 01:44 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हल्द्वानी। नैनीताल बैंक ऑफीसर्स एसोसिएशन छह जुलाई को संसदीय समिति के समक्ष बैंक के निजीकरण के विरोध में अपना पक्ष रखेगी। एसोसिएशन का कहना है कि बैंक के निजीकरण से बैंक में कार्यरत सैकड़ों कर्मचारियों के भविष्य के साथ साथ खाताधारकों के हित भी प्रभावित होंगे।
एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रशेखर कन्याल ने बताया कि निजीकरण के मामले की सांसद भगत सिंह कोश्यारी की अध्यक्षता में गठित संसदीय समिति समीक्षा कर रही है। समीक्षा के बाद उक्त समिति इस संबंध में संसद में रिपोर्ट पेश करेगी। उन्होंने बताया कि समिति ने छह जुलाई को अगली सुनवाई तय की है, जिसमें नैनीताल बैंक ऑफीसर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों को भी बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि निजीकरण का मामला अभी संसदीय समिति के अधीन है। समिति की गरिमा को ध्यान में रख नैनीताल बैंक प्रबंधन ने समिति की रिपोर्ट आने तक डिजिटल वेंचर के समस्त कार्यकलापों पर रोक लगाने, बैंक में कंसल्टेंसी प्रथा खत्म करने, कंसल्टेंसी सेवाओं को 30 जून तक खत्म करने, यूनियन पदाधिकारियों व सदस्यों के दुर्भावनापूर्ण तरीके से किए गए तबादलों को वापस लेने की मांग की थी। बैंक मैनेजमेंट ने 11 अप्रैल को हुई वार्ता में उक्त मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन देकर यूनियन की हड़ताल को टाल दिया था लेकिन बैंक की दो बार बोर्ड मीटिंग होने के बाद भी यूनियन की मांगों पर अमल नहीं किया गया है। इससे बैंक कर्मियों में रोष है। उन्होंने बताया कि उक्त मुद्दों को यूनियन संसदीय समिति के समक्ष प्रमुखता से उठाते हुए बैंक के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग करेगी।
विज्ञापन
एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रशेखर कन्याल ने बताया कि निजीकरण के मामले की सांसद भगत सिंह कोश्यारी की अध्यक्षता में गठित संसदीय समिति समीक्षा कर रही है। समीक्षा के बाद उक्त समिति इस संबंध में संसद में रिपोर्ट पेश करेगी। उन्होंने बताया कि समिति ने छह जुलाई को अगली सुनवाई तय की है, जिसमें नैनीताल बैंक ऑफीसर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों को भी बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि निजीकरण का मामला अभी संसदीय समिति के अधीन है। समिति की गरिमा को ध्यान में रख नैनीताल बैंक प्रबंधन ने समिति की रिपोर्ट आने तक डिजिटल वेंचर के समस्त कार्यकलापों पर रोक लगाने, बैंक में कंसल्टेंसी प्रथा खत्म करने, कंसल्टेंसी सेवाओं को 30 जून तक खत्म करने, यूनियन पदाधिकारियों व सदस्यों के दुर्भावनापूर्ण तरीके से किए गए तबादलों को वापस लेने की मांग की थी। बैंक मैनेजमेंट ने 11 अप्रैल को हुई वार्ता में उक्त मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन देकर यूनियन की हड़ताल को टाल दिया था लेकिन बैंक की दो बार बोर्ड मीटिंग होने के बाद भी यूनियन की मांगों पर अमल नहीं किया गया है। इससे बैंक कर्मियों में रोष है। उन्होंने बताया कि उक्त मुद्दों को यूनियन संसदीय समिति के समक्ष प्रमुखता से उठाते हुए बैंक के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग करेगी।
विज्ञापन