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आय बढ़ाने के रास्ते में रोड़ा बन गए पार्षद
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी।
Updated Fri, 12 Jun 2015 12:51 AM IST
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नगर निगम के जनप्रतिनिधि ही निगम की आमदनी बढ़ाने के रास्तों में रोड़ा साबित हो रहे हैं। आय बढ़ाने के नगर निगम कार्यसमिति के पारित प्रस्ताव फाइलों में धूल चाट रहे हैं। जनप्रतिनिधियों में भी दो फाड़ हैं। आपसी सहमति नहीं होने से कार्यसमिति के प्रस्तावों को स्वीकृति के लिए बोर्ड के एजेेंडे में जगह नहीं मिल पा रही है।
हल्द्वानी कुमाऊं का सबसे बड़ा नगर निगम है। निगम की हालत सबसे दयनीय है। आमदनी के स्रोत सीमित हैं। दशकों से किराया और लाइसेंस शुल्क नहीं बढ़ाया गया है। सभी संसाधनों से होने वाली आमदनी की तुलना में खर्चे कई गुना अधिक हैं। निगम की आय बढ़ाने के लिए निगम की कार्यसमिति ने करीब छह माह पूर्व कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए थे।
प्रस्तावों में लाइसेंस शुल्क बढ़ाने की सिफारिश की गई थी, इससे निगम आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सके। कार्यसमिति के प्रस्तावों से पार्षदों में ही दो फाड़ हो गए। इनमें पार्षदों के एक धड़े ने आय बढ़ाने के लिए लाइसेंस शुल्क वृद्धि की वकालत की, जबकि दूसरे धड़े ने व्यापारियों एवं प्रतिष्ठान स्वामियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हुए विरोध कर दिया। इसी उधेड़बुन में प्रस्तावों को नगर निगम की बोर्ड एजेंडे में नहीं लाया जा सका।
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कार्यसमिति के लाइसेंस शुल्क वृद्धि के प्रमुख प्रस्ताव (सालाना रुपये में)
लाइसेंस वर्तमान शुल्क पारित शुल्क
>> मीट लाइसेंस 600 रुपये 3000 रुपये
>> आटा चक्की 500 रुपये 1500 रुपये
>> तेल मशीन 1000 रुपये 4000 रुपये
>> फ्लोर मिल 4000 रुपये 10000 रुपये
>> बैंक्वट हाल 1000 रुपये 4000 रुपये
>> रिक्शा 75 रुपये 300 रुपये
आमदनी के प्रमुख स्रोत
>> 700 व्यापारी पंजीकृत और 60 लाख तहबाजारी
>> 1600 मकानों से 70 लाख हाउस टैक्स
>> 1123 दुकानों से 42 लाख किराया
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हल्द्वानी कुमाऊं का सबसे बड़ा नगर निगम है। निगम की हालत सबसे दयनीय है। आमदनी के स्रोत सीमित हैं। दशकों से किराया और लाइसेंस शुल्क नहीं बढ़ाया गया है। सभी संसाधनों से होने वाली आमदनी की तुलना में खर्चे कई गुना अधिक हैं। निगम की आय बढ़ाने के लिए निगम की कार्यसमिति ने करीब छह माह पूर्व कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए थे।
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प्रस्तावों में लाइसेंस शुल्क बढ़ाने की सिफारिश की गई थी, इससे निगम आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सके। कार्यसमिति के प्रस्तावों से पार्षदों में ही दो फाड़ हो गए। इनमें पार्षदों के एक धड़े ने आय बढ़ाने के लिए लाइसेंस शुल्क वृद्धि की वकालत की, जबकि दूसरे धड़े ने व्यापारियों एवं प्रतिष्ठान स्वामियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हुए विरोध कर दिया। इसी उधेड़बुन में प्रस्तावों को नगर निगम की बोर्ड एजेंडे में नहीं लाया जा सका।
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कार्यसमिति के लाइसेंस शुल्क वृद्धि के प्रमुख प्रस्ताव (सालाना रुपये में)
लाइसेंस वर्तमान शुल्क पारित शुल्क
>> मीट लाइसेंस 600 रुपये 3000 रुपये
>> आटा चक्की 500 रुपये 1500 रुपये
>> तेल मशीन 1000 रुपये 4000 रुपये
>> फ्लोर मिल 4000 रुपये 10000 रुपये
>> बैंक्वट हाल 1000 रुपये 4000 रुपये
>> रिक्शा 75 रुपये 300 रुपये
आमदनी के प्रमुख स्रोत
>> 700 व्यापारी पंजीकृत और 60 लाख तहबाजारी
>> 1600 मकानों से 70 लाख हाउस टैक्स
>> 1123 दुकानों से 42 लाख किराया