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'खतरनाक' रास्ते पर चल पड़ी उत्तराखंड सरकार
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 13 Sep 2013 08:25 AM IST
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प्रदेश में खनन का काम निजी हाथों में सौंपने के मामले में सुझाव के लिए कैबिनेट ने एक उपसमिति का गठन किया है। इसमें उपसमिति पांच मंत्री होंगे। कैबिनेट की 17 सितंबर को प्रस्तावित अगली बैठक में इस उपसमिति की रिपोर्ट पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
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विधायक निधि से आपदा राहत के लिए पैसा जारी करने के विषय में कैबिनेट में कोई फैसला नहीं लिया जा सका। सचिवालय में सीएम की विजय बहुगुणा की अध्यक्षता में सायं छह बजे शुरू कैबिनेट बैठक रात्रि आठ बजे तक चली।
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सूत्रों ने बताया कि एजेंडे में खनन कारोबार निजी हाथों में सौंपने का बिंदु शामिल नहीं था। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा इसी मुद्दे पर हुई।
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बाद में तय किया गया कि इस मामले में विचार के लिए पांच मंत्रियों की एक उपसमिति का गठन किया जाए। 17 सितंबर को प्रस्तावित कैबिनेट की अगली बैठक में इस उपसमिति की रिपोर्ट पर चर्चा के बाद खनन निजी हाथों में सौंपने के विषय में निर्णय लिया जाएगा। इस उपसमिति में इंदिरा ह्दयेश, यशपाल आर्य, हरक सिंह रावत, अमृता रावत और प्रीतम सिंह को शामिल किया गया है।
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गौरतलब है कि राज्य में खनन का काम इस समय कुमाऊं मंडल विकास निगम, गढ़वाल मंडल विकास निगम और वन विकास निगम के पास है। सरकार ने खनन के लिए 250 नए क्षेत्रों का चिन्हीकरण किया है।
सरकार की मंशा है कि खनन का काम सीधे तौर पर इन निगमों को देने की बजाय खुली निविदा के जरिए निजी हाथों में दिया जाए। इस समय खनन के काम में लगी संस्थाएं इसका विरोध कर रहीं हैं।
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बैठक में विधायक निधि से आपदा राहत के लिए पैसा देने के विषय पर भी चर्चा की गई। सूत्रों ने बताया कि इस मामले में कैबिनेट में सहमति न बनने की वजह से कोई फैसला नहीं लिया जा सका।
बैठक में गन्ना एवं चीनी विभाग अधीनस्थ सेवा नियमावली को मंजूरी देने के साथ ही युवा कल्याण विभाग की सेवा नियमावली बनाने पर सहमति जताई गई।
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