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भू-धंसाव की चपेट में पूरा गांव
गोपेश्वर/ब्यूरो
Updated Wed, 31 Jul 2013 06:05 PM IST
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भारी बारिश के बाद अब उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में नई समस्या पैदा हो गई। चमोली जिले में हो रही बारिश के चलते एक पूरा गांव भू-धंसाव की चपेट में आ गया है।
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घाट ब्लॉक के सकंड गांव में कई आवासीय भवन भू धंसाव के चलते खतरे की जद में पहुंच गए हैं। गांव के ऊपर भू धंसाव हो रहा है। भू-धंसाव के चलते गांव का प्राचीन नारायण मंदिर भी खतरे की जद में पहुंच गया है।
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गांव में जगदीश प्रसाद पुरोहित, सतेश्वर प्रसाद, संगीता देवी, पतंजलि पुरोहित, ऋषि कुमार और देवेंद्र पुरोहित के आवासीय भवन क्षतिग्रस्त हो गए हैं, लेकिन प्रशासन इसकी सुध नहीं ले रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन का नुमांइदा क्षेत्रीय पटवारी गांव में हालात का जायजा लेने तक नहीं आया।
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बादल फटने से सहमें ग्रामीण
इधर, बीती 23 जुलाई को ग्राम पंचायत सुनाली में बादल फटने के बाद से समीपवर्ती जैंटी गांव के ग्रामीण सहमे हुए हैं। जैंठी गांव में 59 परिवार रहते हैं। यहां अधिकांश आवासीय भवनों पर भू-धंसाव का खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय ग्रामीण दिनेश, प्रदीप सिंह, नरेंद्र सिंह, लक्ष्मण सिंह, लखपत सिंह, हिम्मत सिंह, जगदीश, चंद्र सिंह, शिव लाल, बुद्धिलाल और रणजीत लाल का कहना है कि गांव के शीर्ष भाग से सोनला-कंडारा मोटर मार्ग निर्माणाधीन है।
सड़क निर्माण के दौरान सड़क कटिंग का मलबा गांव के ऊपर डाला गया था। जो अब थोड़ी बारिश होने पर भी घरों में घुस रहा है। गांव में पिछले एक सप्ताह से बिजली भी नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि आपदा के बाद से गांव की खैर-ख्वाह लेने क्षेत्रीय पटवारी तक नहीं पहुंचा है।
इधर, उप जिलाधिकारी चमोली अवधेष कुमार सिंह का कहना है कि जैंटी गांव में आवासीय भवनों पर दरारें आई हुई हैं। जिसका प्रभावितों को मुआवजे का वितरण किया जा रहा है।
असंवेदनशील सरकार
बहरहाल आपदाग्रस्त क्षेत्रों में प्रशासनिक कार्यप्रणाली अब तो किसी से भी छुपी नहीं रह गई है लेकिन यह स्थिति यदि ऐसे ही बनी रही तो जल्द बड़ी दुर्घटनाएं सामने आ सकती हैं। ग्रामीणों के आरोप से साफ जाहिर है कि सरकार पहाड़ी क्षेत्रों में अभी भी खतरे को लेकर संवेदनशील रवैया अपनाने को राजी नहीं है।