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वायलेंट्री विलेज वन्यजीव प्रोटक्शन फोर्स लगाएगी वन्यजीवों पर अंकुश
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वन्यजीवों के आबादी में धमकने और मानव-वन्यजीव संघर्ष पर अब ग्रामीणों की प्रशिक्षित टीम अंकुश लगाएगी। वन महकमे ने इसके लिए ईको विकास समिति ग्राम स्तरीय वालेंटरी विलेज वन्यजीव प्रोटेक्शन फोर्स बनाने की तैयारी कर ली है। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के निर्देश पर शुरुआती दौर में लैंसडौन वन प्रभाग की पांचों रेंज के 37 वन्यजीव बाहुल्य गांवों में 115 लोगों की फोर्स की तैनाती के लिए चुना गया है। इससे जहां गांवों में जंगली जानवरों की धमक को रोका जा सकेगा, वहीं पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन पर भी रोक लगेगी।
लैंसडौन वन प्रभाग की कोटद्वार रेंज में गिवंई स्रोत, सनेह, रामपुर, कुंभीचौड़, झंडीचौड़, सत्तीचौड़, मवाकोट, ध्रुवपुर, शिवपुर आदि क्षेत्रों में गुलदार और हाथी की दहशत बनी रहती है। इस रेंज के लिए विभाग द्वारा शुरुआती दौर में 12 गांवों को चुना गया है। कोटड़ीढांग रेंज में कोटड़ी गांव में हाथी और गुलदार आए दिन धमकते रहते हैं। लैंसडौन रेंज में लैंसडौन, जयहरीखाल की निकटवर्ती करीब 19 ग्राम पंचायतों में गुलदार की दहशत व्याप्त है। इस रेंज में छह गांवों को योजना में शामिल किया गया है। दुगड्डा रेंज में दुगड्डा ब्लाक क्षेत्र के अंतर्गत आठ वन्यजीव बहुल्य गांव को शामिल किया गया है, जबकि लालढांग रेंज से जुड़े अधिकतर गांव में हाथी की धमक रहती है। यहां के 10 गांवों को योजना से जोड़ा गया है।
क्या है योजना
योजना के तहत वन्यजीव बाहुल्य गांव से एक से तीन लोगों को वन विभाग जंगली जानवरों को भगाने और इसकी सूचना देने के लिए प्रशिक्षण देेगा। इसके लिए उन्हें किट, पहचानपत्र के साथ मानदेय भी दिया जाएगा। इसके लिए कोटद्वार रेंज से 36 ग्रामीणों, कोटड़ीढांग रेंज से 02, लालढांग रेंज से 45, लैंसडौन रेंज से 14 और दुगड्डा रेंज से 18 ग्रामीणों का चयन किया गया है।
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मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के निर्देश पर लैंसडौन वन प्रभाग की पांचों रेंज में वन्यजीवों की रोकथाम के लिए ईको विकास समित ग्राम स्तरीय वालेंटरी विलेज वन्यजीव प्रोटक्शन फोर्स बनाने की योजना है। इसके लिए गांव और ग्रामीणों का चयन कर शासन को भेज दिया गया है। इसके बाद ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
-गिरीश चंद्र बेलवाल, एसडीओ, लैंसडौन वन प्रभाग
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लैंसडौन वन प्रभाग की कोटद्वार रेंज में गिवंई स्रोत, सनेह, रामपुर, कुंभीचौड़, झंडीचौड़, सत्तीचौड़, मवाकोट, ध्रुवपुर, शिवपुर आदि क्षेत्रों में गुलदार और हाथी की दहशत बनी रहती है। इस रेंज के लिए विभाग द्वारा शुरुआती दौर में 12 गांवों को चुना गया है। कोटड़ीढांग रेंज में कोटड़ी गांव में हाथी और गुलदार आए दिन धमकते रहते हैं। लैंसडौन रेंज में लैंसडौन, जयहरीखाल की निकटवर्ती करीब 19 ग्राम पंचायतों में गुलदार की दहशत व्याप्त है। इस रेंज में छह गांवों को योजना में शामिल किया गया है। दुगड्डा रेंज में दुगड्डा ब्लाक क्षेत्र के अंतर्गत आठ वन्यजीव बहुल्य गांव को शामिल किया गया है, जबकि लालढांग रेंज से जुड़े अधिकतर गांव में हाथी की धमक रहती है। यहां के 10 गांवों को योजना से जोड़ा गया है।
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क्या है योजना
योजना के तहत वन्यजीव बाहुल्य गांव से एक से तीन लोगों को वन विभाग जंगली जानवरों को भगाने और इसकी सूचना देने के लिए प्रशिक्षण देेगा। इसके लिए उन्हें किट, पहचानपत्र के साथ मानदेय भी दिया जाएगा। इसके लिए कोटद्वार रेंज से 36 ग्रामीणों, कोटड़ीढांग रेंज से 02, लालढांग रेंज से 45, लैंसडौन रेंज से 14 और दुगड्डा रेंज से 18 ग्रामीणों का चयन किया गया है।
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मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के निर्देश पर लैंसडौन वन प्रभाग की पांचों रेंज में वन्यजीवों की रोकथाम के लिए ईको विकास समित ग्राम स्तरीय वालेंटरी विलेज वन्यजीव प्रोटक्शन फोर्स बनाने की योजना है। इसके लिए गांव और ग्रामीणों का चयन कर शासन को भेज दिया गया है। इसके बाद ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
-गिरीश चंद्र बेलवाल, एसडीओ, लैंसडौन वन प्रभाग